डीजीसीए में पेशेवर नियुक्ति और स्वतंत्र सुरक्षा बोर्ड जरूरी: मीनू वाडिया
सारांश
मुख्य बातें
फेडरेशन ऑफ पायलट्स के संस्थापक अध्यक्ष और एयर इंडिया के पूर्व पायलट मीनू वाडिया ने 9 अगस्त को मुंबई में कहा कि भारत में विमानन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के पूरे ढाँचे में आमूल बदलाव अपरिहार्य है। उन्होंने एयर इंडिया के फुकेत-दिल्ली डोपिंग प्रकरण और देश में बार-बार हो रहे विमान हादसों को इस माँग की तात्कालिक पृष्ठभूमि बताया।
तीन दशकों की माँग, अब तक अनसुनी
वाडिया ने बताया कि फेडरेशन ऑफ पायलट्स पिछले 30-40 वर्षों से प्रधानमंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर दो प्रमुख माँगें रखती आई है — पहली, एक स्वतंत्र विमानन सुरक्षा बोर्ड का गठन, और दूसरी, डीजीसीए में अनुभवी पायलटों व एविएशन विशेषज्ञों की नियुक्ति। उन्होंने कहा, 'मैंने भी इस विषय पर कई बार पत्र लिखे हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि इस मामले में और दबाव बनेगा, ज़्यादा लोग इस पर बात करेंगे और संसद में भी यह मुद्दा उठाया जाएगा।'
गौरतलब है कि वाडिया ने स्वयं एयरफोर्स से एयर इंडिया में आने के बाद डीजीसीए के कामकाज को करीब से देखा। उनके अनुसार उन दिनों डीजीसीए के पूरे दफ्तर में एक भी एविएटर नहीं था — संस्था पूरी तरह नौकरशाहों के हाथ में थी।
नौकरशाही बनाम तकनीकी विशेषज्ञता
वाडिया ने तीखा सवाल उठाया: 'अगर वे सभी नौकरशाह हैं, तो आप उनसे एविएशन के बारे में समझने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?' उन्होंने कहा कि इसी कमी को दूर करने के लिए फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स की स्थापना की गई थी, ताकि तकनीकी मसलों पर पेशेवर दृष्टिकोण सरकार तक पहुँचाया जा सके।
उनका मानना है कि स्थिति में आंशिक सुधार तो हुआ है, लेकिन डीजीसीए का मूल रवैया नहीं बदला। 'वे अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। भले ही वे तकनीकी विशेषज्ञ न हों, फिर भी वे अधिकार छोड़ने को तैयार नहीं हैं — इसीलिए संस्थागत सुधार नहीं हो पाया,' उन्होंने कहा।
हादसों की जड़ में निगरानी और प्रशिक्षण की कमी
एयर इंडिया के फुकेत-दिल्ली डोपिंग मामले और हालिया विमान दुर्घटनाओं के संदर्भ में वाडिया ने कहा कि इन घटनाओं के पीछे केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की विफलता और प्रशिक्षण में कमी भी बड़ी वजह है। उनके अनुसार जब तक नियामक संस्था में पेशेवर पायलट और एविएशन विशेषज्ञ शीर्ष पदों पर नहीं बैठेंगे, सुरक्षा मानकों में वास्तविक सुधार संभव नहीं है।
टर्बुलेंस और मौसम की चुनौतियाँ
विमानों में आने वाली प्राकृतिक बाधाओं पर वाडिया ने बताया कि टर्बुलेंस का संबंध एयरक्राफ्ट के डिज़ाइन या निर्माण से नहीं होता। उन्होंने कहा, 'पहले जब टर्बुलेंस पहचानने की तकनीक बहुत सीमित थी, तब हवा में पूरे एयरक्राफ्ट टूटकर बिखर जाते थे — यहाँ तक कि पंख भी अलग हो जाते थे।' उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों में लाइन स्क्वॉल्स जैसी स्थिति होती है, जहाँ चारों ओर क्यूम्यलोनिम्बस बादल घेर लेते हैं और विमान उनसे बच नहीं पाता। ऐसे में पायलटों को उचित प्रशिक्षण और मौसम की सटीक जानकारी देना सबसे ज़रूरी है।
माँग: राजनीति-मुक्त स्वतंत्र जाँच बोर्ड
वाडिया ने स्पष्ट किया कि पायलट फेडरेशन की माँग है कि विमानन सुरक्षा को राजनीति और नौकरशाही से पूरी तरह अलग रखा जाए। एक स्वतंत्र जाँच बोर्ड बने जो हादसों की निष्पक्ष जाँच करे और जिसकी सिफारिशें सीधे लागू हों। उन्होंने कहा, 'हमारा मकसद किसी को दोष देना नहीं है। मकसद सिर्फ इतना है कि भारत में हवाई यात्रा सबसे सुरक्षित बने और हर यात्री बिना डर के सफर कर सके।' उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे और शीघ्र सुधारात्मक कदम उठाए जाएँगे।