विश्व बाल श्रम निषेध दिवस: भजनलाल, योगी, सैनी समेत कई मुख्यमंत्रियों ने लिया बाल श्रम मुक्त समाज का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर 12 जून 2026 को देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के माध्यम से बाल श्रम उन्मूलन का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया। इन नेताओं ने हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण बचपन का अधिकार दिलाने की प्रतिबद्धता जताई और समाज को जागरूक होने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्रियों के संकल्प
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा, 'विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आइए, हम सभी बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लें। हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का अधिकार है। बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन हेतु जागरूकता और सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।'
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, 'बालश्रम समाज की एक गंभीर चुनौती है, जो बच्चों के सपनों, शिक्षा और बचपन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। यह उन्हें उनके अधिकारों से वंचित कर कम उम्र में ही जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा देता है।' उन्होंने प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास का आग्रह किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, 'हर बच्चे के हाथ में किताब, आंखों में सपना और जीने के लिए सुरक्षित वातावरण हो, यह उसका अधिकार और हमारा दायित्व है।' उन्होंने बाल अधिकारों के संरक्षण और बच्चों को शिक्षित एवं सम्मानपूर्ण वातावरण देने का आह्वान किया।
उपमुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की आवाज़
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, 'जहां बचपन सुरक्षित होगा, वहीं भविष्य समृद्ध होगा। बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं। उनका स्थान विद्यालय, खेल का मैदान और संस्कारों की पाठशाला में है, न कि श्रम के बोझ तले।' उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से वंचित एवं जरूरतमंद परिवारों तक शिक्षा का महत्व पहुँचाने की अपील की।
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने एक्स पर लिखा, 'विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आइए हम सब मिलकर एक ऐसे समाज का संकल्प लें, जहां किसी भी बच्चे का बचपन मजदूरी की भेंट न चढ़े। बाल श्रम न केवल एक कानूनी अपराध है बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी एक बड़ा प्रहार है।'
बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, 'बच्चों के हाथों में किताबें हों, औजार नहीं; उनके सपनों को उड़ान मिले, मजबूरी नहीं।' उन्होंने नागरिकों से अपने आसपास किसी भी बच्चे को मजदूरी के लिए मजबूर न होने देने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
बाल श्रम की चुनौती: पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि भारत में बाल श्रम की समस्या दशकों पुरानी है। बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 और उसके बाद के संशोधनों के बावजूद, असंगठित क्षेत्र, कृषि और घरेलू काम में बच्चों के श्रम की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। यह दिवस हर वर्ष 12 जून को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की पहल पर मनाया जाता है, ताकि वैश्विक स्तर पर बाल श्रम के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाई जा सके।
आम जनता पर असर और आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक नेतृत्व के संकल्प तब ही सार्थक होते हैं जब उनके साथ ठोस नीतिगत कदम उठाए जाएँ — जैसे स्कूल छोड़ने की दर में कमी, मध्याह्न भोजन योजना का विस्तार और वंचित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर नागरिक समाज की नज़र बनी हुई है। नेताओं के इस सामूहिक आह्वान से उम्मीद है कि बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में जमीनी कार्रवाई को नई गति मिलेगी।