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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस: भजनलाल, योगी, सैनी समेत कई मुख्यमंत्रियों ने लिया बाल श्रम मुक्त समाज का संकल्प

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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस: भजनलाल, योगी, सैनी समेत कई मुख्यमंत्रियों ने लिया बाल श्रम मुक्त समाज का संकल्प

सारांश

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के मुख्यमंत्रियों-मंत्रियों ने एक्स पर एकजुट होकर बाल श्रम मुक्त समाज का संकल्प लिया — संदेश एक था: बच्चों के हाथ में किताब हो, औजार नहीं।

मुख्य बातें

12 जून 2026 को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने एक्स पर बाल श्रम उन्मूलन का संकल्प व्यक्त किया।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा , हरियाणा के नायब सिंह सैनी और उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ ने हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण बचपन का अधिकार दिलाने की बात कही।
यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाज के हर वर्ग से वंचित परिवारों तक शिक्षा का महत्व पहुँचाने का आग्रह किया।
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने बाल श्रम को कानूनी अपराध के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं पर प्रहार बताया।
बिहार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा — 'बच्चों के हाथों में किताबें हों, औजार नहीं।'

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर 12 जून 2026 को देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के माध्यम से बाल श्रम उन्मूलन का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया। इन नेताओं ने हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण बचपन का अधिकार दिलाने की प्रतिबद्धता जताई और समाज को जागरूक होने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्रियों के संकल्प

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा, 'विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आइए, हम सभी बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लें। हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का अधिकार है। बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन हेतु जागरूकता और सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।'

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, 'बालश्रम समाज की एक गंभीर चुनौती है, जो बच्चों के सपनों, शिक्षा और बचपन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। यह उन्हें उनके अधिकारों से वंचित कर कम उम्र में ही जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा देता है।' उन्होंने प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास का आग्रह किया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, 'हर बच्चे के हाथ में किताब, आंखों में सपना और जीने के लिए सुरक्षित वातावरण हो, यह उसका अधिकार और हमारा दायित्व है।' उन्होंने बाल अधिकारों के संरक्षण और बच्चों को शिक्षित एवं सम्मानपूर्ण वातावरण देने का आह्वान किया।

उपमुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की आवाज़

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, 'जहां बचपन सुरक्षित होगा, वहीं भविष्य समृद्ध होगा। बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं। उनका स्थान विद्यालय, खेल का मैदान और संस्कारों की पाठशाला में है, न कि श्रम के बोझ तले।' उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से वंचित एवं जरूरतमंद परिवारों तक शिक्षा का महत्व पहुँचाने की अपील की।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने एक्स पर लिखा, 'विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आइए हम सब मिलकर एक ऐसे समाज का संकल्प लें, जहां किसी भी बच्चे का बचपन मजदूरी की भेंट न चढ़े। बाल श्रम न केवल एक कानूनी अपराध है बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी एक बड़ा प्रहार है।'

बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, 'बच्चों के हाथों में किताबें हों, औजार नहीं; उनके सपनों को उड़ान मिले, मजबूरी नहीं।' उन्होंने नागरिकों से अपने आसपास किसी भी बच्चे को मजदूरी के लिए मजबूर न होने देने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

बाल श्रम की चुनौती: पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि भारत में बाल श्रम की समस्या दशकों पुरानी है। बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 और उसके बाद के संशोधनों के बावजूद, असंगठित क्षेत्र, कृषि और घरेलू काम में बच्चों के श्रम की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। यह दिवस हर वर्ष 12 जून को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की पहल पर मनाया जाता है, ताकि वैश्विक स्तर पर बाल श्रम के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाई जा सके।

आम जनता पर असर और आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक नेतृत्व के संकल्प तब ही सार्थक होते हैं जब उनके साथ ठोस नीतिगत कदम उठाए जाएँ — जैसे स्कूल छोड़ने की दर में कमी, मध्याह्न भोजन योजना का विस्तार और वंचित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर नागरिक समाज की नज़र बनी हुई है। नेताओं के इस सामूहिक आह्वान से उम्मीद है कि बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में जमीनी कार्रवाई को नई गति मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन संकल्पों के पीछे नीतिगत ढाँचा कितना मज़बूत है। बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम दशकों पुराना है, फिर भी असंगठित क्षेत्र में बाल श्रम की घटनाएँ थमी नहीं हैं। सोशल मीडिया पर संकल्प और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने के लिए स्कूल नामांकन दर, श्रम निरीक्षण तंत्र और सामाजिक सुरक्षा जाल को एक साथ मज़बूत करना होगा — अन्यथा हर 12 जून को यही चक्र दोहराता रहेगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस हर वर्ष 12 जून को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की पहल पर मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बाल श्रम की समस्या के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।
12 जून 2026 को किन-किन नेताओं ने बाल श्रम के खिलाफ संकल्प लिया?
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और बिहार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक्स पर बाल श्रम मुक्त समाज का संकल्प व्यक्त किया।
बाल श्रम के खिलाफ भारत में क्या कानूनी प्रावधान हैं?
भारत में बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 और उसके बाद के संशोधन बाल श्रम को प्रतिबंधित करते हैं। यह कानून 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को खतरनाक उद्योगों और कार्यस्थलों में काम करने से रोकता है तथा उल्लंघन पर दंड का प्रावधान करता है।
नेताओं ने बाल श्रम उन्मूलन के लिए क्या सुझाव दिए?
नेताओं ने समाज के प्रत्येक वर्ग को जागरूक होने, वंचित परिवारों तक शिक्षा का महत्व पहुँचाने और बाल श्रम का विरोध करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों का स्थान विद्यालय और खेल के मैदान में है, न कि श्रम के बोझ तले।
बाल श्रम से बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
बाल श्रम बच्चों को उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और सामान्य विकास के अधिकार से वंचित करता है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार, यह बच्चों के सपनों और बचपन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और उन्हें कम उम्र में ही जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा देता है।
राष्ट्र प्रेस
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