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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर असम CM हिमंता बिस्वा सरमा का आह्वान: बच्चों के हाथ में किताबें हों, बोझ नहीं

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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर असम CM हिमंता बिस्वा सरमा का आह्वान: बच्चों के हाथ में किताबें हों, बोझ नहीं

सारांश

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा — 'बच्चों के हाथों में किताबें हों, बोझ नहीं।' यह संदेश उस समय आया है जब बाल कल्याण संगठन ज़मीनी क्रियान्वयन और सामुदायिक भागीदारी की माँग तेज़ कर रहे हैं।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 12 जून 2026 को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर बाल श्रम उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।
उन्होंने एक्स पर लिखा कि बच्चों के हाथों में किताबें हों, बोझ नहीं और हर बच्चे को सीखने व आगे बढ़ने का अवसर मिले।
असम में ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए शिक्षा व बाल कल्याण के कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
राज्यभर में 12 जून को शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और सरकारी एजेंसियों ने जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।
बाल अधिकार विशेषज्ञों के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और श्रम कानूनों का सख्त पालन बाल श्रम से निपटने के लिए अनिवार्य हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 12 जून 2026 को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रम को जड़ से समाप्त करने और देश के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा तथा विकास के समान अवसर दिलाने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। गुवाहाटी से जारी इस संदेश में उन्होंने समाज, सरकार और नागरिक संगठनों — सभी की साझा जिम्मेदारी पर ज़ोर दिया।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'हमारे समाज का भविष्य हमारे बच्चों के हाथों में है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर, आइए हम सब मिलकर यह सुनिश्चित करें कि उन हाथों में किताबें हों, बोझ नहीं और हर बच्चे को सीखने व आगे बढ़ने का अवसर मिले।' यह संदेश ऐसे समय में आया है जब बाल कल्याण से जुड़े समूह बाल श्रम को रोकने और बच्चों को उनके मौलिक अधिकार दिलाने के लिए अधिक जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी की माँग कर रहे हैं।

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस का महत्व

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस प्रतिवर्ष 12 जून को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बाल श्रम में लगे लाखों बच्चों की स्थिति के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और बच्चों के शोषण को समाप्त करने के प्रयासों को प्रोत्साहित करना है। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों का लंबे समय से यह मत रहा है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा के उपाय और श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन ही बाल श्रम से निपटने के सबसे कारगर साधन हैं।

असम की पहल और सरकारी प्रयास

असम ने शिक्षा तक पहुँच और बच्चों के कल्याण को बढ़ाने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम शुरू किए हैं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए। राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर सरकारी पहलों में स्कूल में दाखिले को बेहतर बनाने, स्कूल छोड़ने वालों की दर को कम करने और कमजोर परिवारों की मदद करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। गौरतलब है कि ये प्रयास केवल कानूनी ढाँचे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सामुदायिक भागीदारी को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

राज्यभर में आयोजित कार्यक्रम

12 जून को असम भर में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और सरकारी एजेंसियों ने बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित और समावेशी वातावरण बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इन आयोजनों में बाल श्रम के विरुद्ध जागरूकता अभियान और शिक्षा को प्रोत्साहन देने वाले कार्यक्रम शामिल रहे।

आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, बाल श्रम को समाप्त करने के लिए केवल घोषणाएँ नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर निरंतर क्रियान्वयन और निगरानी ज़रूरी है। मुख्यमंत्री सरमा के इस आह्वान के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में कौन-से ठोस कदम उठाती है और क्या नई नीतिगत पहलें सामने आती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस आह्वान के पीछे कोई नई नीतिगत घोषणा या बजटीय प्रतिबद्धता है। असम में बाल श्रम की समस्या चाय बागानों और ईंट भट्टों जैसे असंगठित क्षेत्रों में अभी भी गहरी जड़ें जमाए हुए है, जहाँ कानून का क्रियान्वयन कमज़ोर रहा है। सोशल मीडिया पोस्ट से जागरूकता बढ़ती है, लेकिन बाल श्रम उन्मूलन के लिए ज़रूरत है स्कूल ड्रॉपआउट दर के सत्यापन योग्य आँकड़ों, श्रम निरीक्षण की आवृत्ति और कमज़ोर परिवारों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा की जवाबदेही की। बिना इन ठोस मापदंडों के, यह संदेश एक और वार्षिक अनुष्ठान बनकर रह जाने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस क्या है और यह कब मनाया जाता है?
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस प्रतिवर्ष 12 जून को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बाल श्रम में लगे लाखों बच्चों की स्थिति के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और बच्चों के शोषण को समाप्त करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।
असम CM हिमंता बिस्वा सरमा ने बाल श्रम पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 12 जून 2026 को एक्स पर लिखा कि बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, बोझ नहीं, और हर बच्चे को सीखने व आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सभी से मिलकर बाल श्रम समाप्त करने के सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
असम में बाल श्रम उन्मूलन के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
असम सरकार ने शिक्षा तक पहुँच और बाल कल्याण को बढ़ाने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए। इनमें स्कूल में दाखिले को बेहतर बनाना, स्कूल छोड़ने वालों की दर घटाना और कमज़ोर परिवारों को सहायता देना शामिल है।
बाल श्रम से निपटने के लिए विशेषज्ञ क्या सुझाव देते हैं?
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा के उपाय और श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन बाल श्रम से निपटने के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। साथ ही सामुदायिक भागीदारी और निरंतर निगरानी को भी आवश्यक माना जाता है।
12 जून 2026 को असम में बाल श्रम निषेध दिवस पर क्या हुआ?
12 जून 2026 को असम भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और सरकारी एजेंसियों ने बच्चों के लिए सुरक्षित और समावेशी वातावरण बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री सरमा ने भी एक्स पर संदेश जारी कर सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान किया।
राष्ट्र प्रेस
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