26 अगस्त 2026
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असम की लाइब्रेरी में नई जान: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा बोले — बच्चों में पढ़ने की संस्कृति लौट रही है

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असम की लाइब्रेरी में नई जान: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा बोले — बच्चों में पढ़ने की संस्कृति लौट रही है

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 26 अगस्त को कहा कि राज्य की लाइब्रेरी फिर से जीवंत हो रही हैं। बुक टॉक्स, रोटेटिंग कलेक्शंस और हैंड्स-ऑन सत्रों के ज़रिए बच्चों में पठन संस्कृति को पुनर्जीवित करने की यह पहल डिजिटल युग में एक सार्थक शैक्षिक कदम है।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 26 अगस्त 2026 को कहा कि राज्यभर की लाइब्रेरी फिर से सक्रिय हो उठी हैं।
बुक टॉक्स , रोटेटिंग कलेक्शंस और इंटरैक्टिव हैंड्स-ऑन सत्र बच्चों को पढ़ने से जोड़ने के मुख्य माध्यम हैं।
कार्यक्रम का लक्ष्य बच्चों को आत्मविश्वासी पाठक , जिज्ञासु शिक्षार्थी और बेहतर संवादकर्ता बनाना है।
सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि लाइब्रेरी पुनर्जीवन केवल भवनों को सक्रिय करना नहीं, बल्कि पठन-अनुकूल माहौल तैयार करना है।
राज्य सरकार लाइब्रेरी को कक्षा से बाहर सीखने के प्रभावी मंच के रूप में विकसित करने पर ज़ोर दे रही है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार, 26 अगस्त को कहा कि राज्यभर की सार्वजनिक लाइब्रेरी एक बार फिर सक्रिय हो उठी हैं और बच्चे बुक टॉक्स, रोटेटिंग कलेक्शंस तथा इंटरैक्टिव पठन कार्यक्रमों के ज़रिए किताबों की दुनिया से जुड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन पहलों का मकसद केवल पढ़ी जाने वाली किताबों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों में आजीवन सीखने की आदत विकसित करना है।

मुख्यमंत्री की एक्स पोस्ट और मुख्य बातें

सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, 'असम की लाइब्रेरी फिर से जीवंत हो रही हैं। बुक टॉक्स, घूमने वाले पुस्तक संग्रह और व्यावहारिक गतिविधियों के ज़रिए बच्चे नई कहानियों, नए विचारों और अलग-अलग विषयों से परिचित हो रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'कहानियाँ बच्चों की सबसे अच्छी दोस्त बन सकती हैं।'

कार्यक्रमों की विशेषताएँ

बुक टॉक्स बच्चों को किसी कहानी पर अपने विचार साझा करने और आपसी संवाद विकसित करने का अवसर देते हैं। रोटेटिंग कलेक्शंस के ज़रिए विभिन्न लेखकों और विधाओं की किताबें नियमित अंतराल पर बदली जाती हैं, जिससे बच्चों की साहित्यिक विविधता से परिचय होता है। वहीं, हैंड्स-ऑन इंटरैक्टिव सत्र लाइब्रेरी को बच्चों के लिए अधिक आकर्षक और सहभागितापूर्ण स्थान बनाते हैं।

व्यापक लक्ष्य: कक्षा से परे सीखना

मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्ट किया कि लाइब्रेरी का यह पुनर्जीवन केवल पुराने भवनों को फिर से खोलने तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार इन स्थानों को कक्षा से बाहर सीखने के प्रभावी मंच के रूप में विकसित करना चाहती है, जहाँ बच्चों को विविध साहित्य तक पहुँच के साथ-साथ चर्चा, जिज्ञासा और स्वतंत्र चिंतन का वातावरण मिले। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल स्क्रीन के बढ़ते प्रभाव के बीच पठन संस्कृति को पुनर्जीवित करना देशभर में एक प्रमुख शैक्षिक चुनौती बन चुकी है।

बच्चों पर अपेक्षित असर

सरमा के अनुसार, लाइब्रेरी संस्कृति का यह पुनरुद्धार बच्चों को आत्मविश्वासी पाठक, जिज्ञासु शिक्षार्थी और बेहतर संवादकर्ता बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। गौरतलब है कि सामुदायिक पठन कार्यक्रम न केवल शैक्षणिक प्रदर्शन, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक विकास में भी योगदान देते हैं।

आगे की राह

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि असम की लाइब्रेरी ऐसे जीवंत सामुदायिक केंद्र बनें जहाँ पढ़ना एक आनंददायक अनुभव हो, न कि केवल शैक्षणिक दायित्व। इन प्रयासों के दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन आने वाले समय में राज्य के शैक्षिक प्रदर्शन संकेतकों से किया जा सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन कार्यक्रमों की पहुँच और प्रभाव को मापने का कोई ठोस ढाँचा है या नहीं। राज्य में कितनी लाइब्रेरी पुनर्जीवित हुई हैं, कितने बच्चे नियमित रूप से जुड़ रहे हैं — ये आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए। डिजिटल स्क्रीन के वर्चस्व के दौर में पठन संस्कृति को पुनर्जीवित करना निस्संदेह ज़रूरी है, परंतु बिना सत्यापन-योग्य परिणामों के यह पहल एक सुखद घोषणा से आगे नहीं जा सकती।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में लाइब्रेरी पुनर्जीवन कार्यक्रम क्या है?
यह असम सरकार की एक शैक्षिक पहल है जिसके तहत राज्यभर की सार्वजनिक लाइब्रेरी को बुक टॉक्स, रोटेटिंग कलेक्शंस और इंटरैक्टिव गतिविधियों के ज़रिए बच्चों के लिए आकर्षक सीखने के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 26 अगस्त को इसकी जानकारी साझा की।
बुक टॉक्स और रोटेटिंग कलेक्शंस बच्चों की कैसे मदद करते हैं?
बुक टॉक्स बच्चों को किसी कहानी पर अपने विचार साझा करने और संवाद कौशल विकसित करने का अवसर देते हैं। रोटेटिंग कलेक्शंस नियमित अंतराल पर नई किताबें उपलब्ध कराते हैं, जिससे बच्चे विभिन्न लेखकों और विधाओं से परिचित होते हैं।
सीएम सरमा के अनुसार इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
सरमा के अनुसार, इन कार्यक्रमों का लक्ष्य केवल पढ़ी जाने वाली किताबों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मविश्वासी पाठक, जिज्ञासु शिक्षार्थी और बेहतर संवादकर्ता बनाना है। पठन को जीवनभर सीखने की मजबूत नींव के रूप में स्थापित करना इसका व्यापक लक्ष्य है।
असम में लाइब्रेरी पुनर्जीवन से किसे फायदा होगा?
इस पहल का सीधा लाभ स्कूली उम्र के बच्चों को मिलेगा जो सामुदायिक लाइब्रेरी तक पहुँच सकते हैं। विविध साहित्य, चर्चा और स्वतंत्र चिंतन का वातावरण मिलने से उनके शैक्षणिक और सामाजिक-भावनात्मक विकास दोनों पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।
क्या यह पहल केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित है?
मुख्यमंत्री सरमा ने 'राज्यभर की लाइब्रेरी' का उल्लेख किया है, जो यह संकेत देता है कि यह कार्यक्रम केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। हालाँकि, ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इसकी पहुँच के विस्तृत आँकड़े अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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