28 अगस्त 2026
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मथुरा कूच यात्रा 30 अगस्त: विश्व हिंदू रक्षा परिषद के 25 हज़ार कार्यकर्ता करेंगे मार्च, कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और मांस-मदिरा बंदी की मांग

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मथुरा कूच यात्रा 30 अगस्त: विश्व हिंदू रक्षा परिषद के 25 हज़ार कार्यकर्ता करेंगे मार्च, कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और मांस-मदिरा बंदी की मांग

सारांश

अयोध्या के बाद अब मथुरा की बारी — विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने 30 अगस्त को लखनऊ से मथुरा तक 25 हज़ार कार्यकर्ताओं का मार्च बुलाया है। माँगें हैं: कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर और परिक्रमा मार्ग पर मांस-मदिरा की दुकानों पर तत्काल प्रतिबंध।

मुख्य बातें

विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने 30 अगस्त 2026 को लखनऊ से मथुरा तक 'मथुरा कूच यात्रा' का ऐलान किया है।
यात्रा में करीब 25 हज़ार कार्यकर्ता और साधु-संत शामिल होने का दावा किया गया है।
प्रमुख माँगें: कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण और परिक्रमा मार्ग पर मांस, मछली व मदिरा की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध।
यात्रा सुबह नौ बजे लखनऊ स्थित परिषद कार्यालय से रवाना होगी; रास्ते में विभिन्न जिलों के कार्यकर्ता जुड़ेंगे।
परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय और राष्ट्रीय महासचिव पंकज प्रधान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से माँगें पूरी करने की अपील की है।
लखनऊ के प्रमुख चौराहों पर पोस्टर लगाकर लोगों से यात्रा में शामिल होने की अपील की गई है।

विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने 30 अगस्त 2026 को लखनऊ से मथुरा तक एक बड़े मार्च — 'मथुरा कूच यात्रा' — का ऐलान किया है, जिसमें संगठन के अनुसार करीब 25 हज़ार कार्यकर्ता और साधु-संत शामिल होंगे। यात्रा का उद्देश्य कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण और मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर मांस, मछली व मदिरा की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग सरकार और प्रशासन तक पहुँचाना है।

यात्रा का कार्यक्रम और रूट

परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय के अनुसार, यात्रा 30 अगस्त को सुबह नौ बजे लखनऊ स्थित परिषद कार्यालय से रवाना होगी। रास्ते में अलग-अलग जिलों से कार्यकर्ता इस यात्रा में जुड़ते जाएंगे और सभी एकसाथ मथुरा पहुँचकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे। लखनऊ के विभिन्न प्रमुख चौराहों पर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें लोगों से इस यात्रा में भाग लेने की अपील की गई है।

मुख्य मांगें

गोपाल राय ने स्पष्ट किया कि संगठन की दो प्रमुख माँगें हैं — पहली, कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण; और दूसरी, मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर मांस, मछली और मदिरा की दुकानों को तत्काल हटाना। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इन माँगों को पूरा करने की अपील की है।

परिषद के राष्ट्रीय महासचिव पंकज प्रधान ने भी इन माँगों को दोहराया और कहा कि सरकार को जल्द उचित कदम उठाने चाहिए।

अयोध्या का हवाला, मथुरा की माँग

गोपाल राय ने अयोध्या का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार वहाँ भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ और धार्मिक क्षेत्र में मांस-मदिरा की बिक्री पर रोक लगाने के कदम उठाए गए, उसी तर्ज पर मथुरा में भी कार्रवाई होनी चाहिए। संगठन के पोस्टरों में लिखा है — 'अयोध्या काशी हुई हमारी, अब है मथुरा की बारी' और 'हर सनातनी की गूंज, नहीं होंगे आधे-आधे, अब मथुरा में होगा केवल राधे-राधे।' यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक स्थलों की पवित्रता को लेकर बहस लगातार तेज़ हो रही है।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद से विभिन्न हिंदू संगठन काशी और मथुरा में भी इसी तरह की माँगें उठाते रहे हैं। मथुरा में शाही ईदगाह और कृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा विवाद न्यायालयों में विचाराधीन है, जिसे देखते हुए इस यात्रा का राजनीतिक और सामाजिक महत्व और बढ़ जाता है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या

यदि यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सम्पन्न होती है, तो 30 अगस्त को मथुरा जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठन ने कार्यकर्ताओं और साधु-संतों से बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो राम मंदिर निर्माण के बाद से लगातार गति पकड़ रही है। ध्यान देने वाली बात यह है कि मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में सड़क पर दबाव और अदालती प्रक्रिया के बीच का तनाव नीति-निर्माताओं के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधी अपील यह भी संकेत देती है कि संगठन न्यायिक मार्ग की बजाय कार्यकारी हस्तक्षेप को प्राथमिकता दे रहा है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस पहलू को नज़रअंदाज़ करती है कि ऐसे मार्चों का असर स्थानीय व्यापारियों और अल्पसंख्यक समुदायों पर किस तरह पड़ता है, जो इस पूरी बहस में अनसुने रह जाते हैं।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मथुरा कूच यात्रा क्या है और इसे कौन आयोजित कर रहा है?
मथुरा कूच यात्रा विश्व हिंदू रक्षा परिषद द्वारा आयोजित एक मार्च है, जो 30 अगस्त 2026 को लखनऊ से मथुरा तक निकाला जाएगा। इसका उद्देश्य कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण और परिक्रमा मार्ग पर मांस-मदिरा की बिक्री बंद करवाने की माँग प्रशासन तक पहुँचाना है।
इस यात्रा में कितने लोग शामिल होंगे और यह कब शुरू होगी?
परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय के दावे के अनुसार, यात्रा में करीब 25 हज़ार कार्यकर्ता और साधु-संत शामिल होंगे। यात्रा 30 अगस्त को सुबह नौ बजे लखनऊ स्थित परिषद कार्यालय से रवाना होगी।
विश्व हिंदू रक्षा परिषद की मथुरा से क्या माँगें हैं?
संगठन की दो प्रमुख माँगें हैं — कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण, और मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर मांस, मछली व मदिरा की दुकानों पर तत्काल प्रतिबंध। ये माँगें जिला प्रशासन को ज्ञापन के रूप में सौंपी जाएंगी।
संगठन ने अयोध्या का उदाहरण क्यों दिया?
गोपाल राय ने कहा कि जिस तरह अयोध्या में राम मंदिर बना और धार्मिक क्षेत्र में मांस-मदिरा पर रोक लगाई गई, उसी तर्ज पर मथुरा में भी कार्रवाई होनी चाहिए। संगठन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसी आधार पर माँग पूरी करने की अपील की है।
मथुरा कूच यात्रा के बाद आगे क्या होगा?
यात्रा के मथुरा पहुँचने पर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि संगठन का अगला कदम क्या होगा। मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है।
राष्ट्र प्रेस
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