मथुरा कूच यात्रा 30 अगस्त: विश्व हिंदू रक्षा परिषद के 25 हज़ार कार्यकर्ता करेंगे मार्च, कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और मांस-मदिरा बंदी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने 30 अगस्त 2026 को लखनऊ से मथुरा तक एक बड़े मार्च — 'मथुरा कूच यात्रा' — का ऐलान किया है, जिसमें संगठन के अनुसार करीब 25 हज़ार कार्यकर्ता और साधु-संत शामिल होंगे। यात्रा का उद्देश्य कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण और मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर मांस, मछली व मदिरा की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग सरकार और प्रशासन तक पहुँचाना है।
यात्रा का कार्यक्रम और रूट
परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय के अनुसार, यात्रा 30 अगस्त को सुबह नौ बजे लखनऊ स्थित परिषद कार्यालय से रवाना होगी। रास्ते में अलग-अलग जिलों से कार्यकर्ता इस यात्रा में जुड़ते जाएंगे और सभी एकसाथ मथुरा पहुँचकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे। लखनऊ के विभिन्न प्रमुख चौराहों पर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें लोगों से इस यात्रा में भाग लेने की अपील की गई है।
मुख्य मांगें
गोपाल राय ने स्पष्ट किया कि संगठन की दो प्रमुख माँगें हैं — पहली, कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण; और दूसरी, मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर मांस, मछली और मदिरा की दुकानों को तत्काल हटाना। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इन माँगों को पूरा करने की अपील की है।
परिषद के राष्ट्रीय महासचिव पंकज प्रधान ने भी इन माँगों को दोहराया और कहा कि सरकार को जल्द उचित कदम उठाने चाहिए।
अयोध्या का हवाला, मथुरा की माँग
गोपाल राय ने अयोध्या का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार वहाँ भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ और धार्मिक क्षेत्र में मांस-मदिरा की बिक्री पर रोक लगाने के कदम उठाए गए, उसी तर्ज पर मथुरा में भी कार्रवाई होनी चाहिए। संगठन के पोस्टरों में लिखा है — 'अयोध्या काशी हुई हमारी, अब है मथुरा की बारी' और 'हर सनातनी की गूंज, नहीं होंगे आधे-आधे, अब मथुरा में होगा केवल राधे-राधे।' यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक स्थलों की पवित्रता को लेकर बहस लगातार तेज़ हो रही है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद से विभिन्न हिंदू संगठन काशी और मथुरा में भी इसी तरह की माँगें उठाते रहे हैं। मथुरा में शाही ईदगाह और कृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा विवाद न्यायालयों में विचाराधीन है, जिसे देखते हुए इस यात्रा का राजनीतिक और सामाजिक महत्व और बढ़ जाता है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या
यदि यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सम्पन्न होती है, तो 30 अगस्त को मथुरा जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठन ने कार्यकर्ताओं और साधु-संतों से बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।