धर्म परिवर्तन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विवेक तन्खा की महत्वपूर्ण टिप्पणी
सारांश
Key Takeaways
- धर्म परिवर्तन पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पुराना है।
- यह केवल एससी वर्ग पर लागू होता है।
- यूसीसी को एक राष्ट्रीय कानून होना चाहिए।
- पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर एकजुटता की बात की।
- महिला आरक्षण बिल संसद में महिलाओं की सशक्तता बढ़ाएगा।
नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। धर्म परिवर्तन से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह कोई नया कानून नहीं है, बल्कि एक पुराना कानून है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि कोई एससी वर्ग का व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे अपनी स्टेटस खोनी पड़ती है। यह एसटी में लागू नहीं होता, बल्कि केवल एससी में।
उन्होंने आगे बताया कि संभवतः आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में इस पर कोई मामला हुआ होगा, जिसे सुधारते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया। यह कोई नई बात नहीं है। विवेक तन्खा ने अजीत जोगी के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अपनी स्टेटस एसटी बताते थे और ईसाई बन गए थे। उनके खिलाफ जो मामला था, वह एससी को लेकर था, क्योंकि वे एससी थे और ईसाई नहीं हो सकते थे। उनका कहना था कि वे एसटी हैं, इसलिए ईसाई बन सकते हैं।
गुजरात विधानसभा में यूसीसी बिल पर विवेक तन्खा ने कहा कि भाजपा ने कई स्थानों पर यूसीसी लागू किया है। उत्तराखंड में यूसीसी कानून बनाया गया है, लेकिन राज्यवार कानून बना कर कितना लाभ होगा, यह स्पष्ट नहीं है, क्योंकि यूसीसी को एक राष्ट्रीय कानून होना चाहिए। भाजपा का यह एजेंडा है, और वे इसे राज्यवार कानून बना कर आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड एक राष्ट्रीय मुद्दा है।
पश्चिम एशिया संकट के बारे में उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने बताया कि यह संकट का समय है, और पूरे देश को एकजुट रहना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं है कि देश एकजुट नहीं है। अच्छी बात यह थी कि उन्होंने कांग्रेस को नहीं कोसा और नेहरू जी के बारे में बात नहीं की। हम ऐसे ही भाषण की उम्मीद करते हैं।
भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने महिला आरक्षण बिल के बारे में कहा कि यह बिल काफी समय से लंबित था और इस बजट सत्र में इसे लाने की योजना है। इस बिल के आने से संसद में महिलाओं की सशक्तता बढ़ेगी।