यूसीसी का लक्ष्य समान अधिकार, किसी धर्म के खिलाफ नहीं: हर्ष सांघवी

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यूसीसी का लक्ष्य समान अधिकार, किसी धर्म के खिलाफ नहीं: हर्ष सांघवी

सारांश

गुजरात विधानसभा में उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने यूसीसी की आवश्यकता पर जोर दिया, यह बताते हुए कि यह महिलाओं को कानूनी असमानताओं से मुक्ति दिलाने में सहायक होगा। उनका मानना है कि यह कानून सभी धर्मों के खिलाफ नहीं है।

मुख्य बातें

यूसीसी का उद्देश्य महिलाओं को कानूनी असमानताओं से मुक्ति दिलाना है।
यह समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने वाला कानून है।
गुजरात उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने के लिए कदम उठाएगा।
यूसीसी का विरोध नहीं होना चाहिए, यदि कोई संविधान में विश्वास करता है।
जनता की राय को ध्यान में रखा गया है, लगभग 20 लाख सुझाव प्राप्त हुए।

गांधीनगर, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने मंगलवार को गुजरात विधानसभा में इस बात पर जोर दिया कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) महिलाओं को कानूनी असमानताओं से मुक्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा विधेयक प्रस्तुत किए जाने के उपरांत चर्चा के दौरान सांघवी ने कहा कि व्यक्तिगत कानूनों के कारण उत्पन्न असमानताएँ ऐसी स्थिति पैदा कर रही हैं, जिसमें महिलाओं को न्याय प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि हमारा संविधान सभी के लिए कानूनी अधिकार सुनिश्चित करता है, और जो लोग वास्तव में संविधान और लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, उन्हें यूसीसी का विरोध नहीं करना चाहिए।

उन्होंने प्रस्तावित ढांचे को चार प्रमुख स्तंभों - लैंगिक न्याय, वैधता, राष्ट्रीयता और लोकतंत्र पर आधारित बताया और कहा कि गुजरात, उत्तराखंड के बाद, इस संहिता को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाएगा।

गोवा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ स्वतंत्रता के पहले से ही समान नागरिक संहिता लागू है, और वहाँ कभी कोई अन्याय नहीं हुआ।

सांघवी ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि दशकों तक सत्ता में रहे दलों ने तुष्टीकरण और रूढ़िवादी मानसिकता का पालन किया है।

गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा के इस कथन का जवाब देते हुए कि मसौदा रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए था, उन्होंने कहा कि यदि आप विधेयक का अध्ययन कर चुके होते, तो आप कम से कम दो धाराओं पर अपनी राय देते।

उन्होंने आगे कहा कि यूसीसी पर समिति की बैठकों में कांग्रेस सदस्यों का केवल एक ही मत था: "हमें अभी यूसीसी की आवश्यकता नहीं है।"

सांघवी के अनुसार, परामर्श के दौरान लगभग २० लाख सुझाव और प्रतिक्रियाएँ प्राप्त हुईं।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून किसी भी धर्म के विरुद्ध नहीं है, और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि यूसीसी का उद्देश्य समान कानूनी अधिकार सुनिश्चित करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देना है। इसमें महिलाओं के अधिकारों को सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण पहलू है। इसे सभी धर्मों के खिलाफ मानने से पहले, हमें इसके उद्देश्यों और प्रभावों को समझने की आवश्यकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) क्या है?
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) एक कानूनी ढांचा है जो सभी नागरिकों के लिए समान कानून सुनिश्चित करता है, जिससे सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा मिलता है।
यूसीसी का उद्देश्य क्या है?
यूसीसी का उद्देश्य महिलाओं को कानूनी असमानताओं से मुक्त करना और सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी अधिकार सुनिश्चित करना है।
क्या यूसीसी किसी धर्म के खिलाफ है?
नहीं, उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी के अनुसार, यूसीसी किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य सभी के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करना है।
गुजरात में यूसीसी कब लागू होगा?
गुजरात सरकार ने संकेत दिया है कि यह राज्य उत्तराखंड के बाद यूसीसी को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाएगा।
क्या यूसीसी पर जनता की राय ली गई थी?
हाँ, यूसीसी के लिए लगभग 20 लाख सुझाव और प्रतिक्रियाएँ प्राप्त हुईं, जो कि जनता की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती हैं।
राष्ट्र प्रेस