वोट चोरी पर उद्धव ठाकरे के दावों को शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने नकारा, बोले — 'एक भी सबूत नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना के प्रवक्ता राजू वाघमारे ने 18 अक्टूबर 2026 को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के 'वोट चोरी' संबंधी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कड़ा पलटवार किया। वाघमारे ने कहा कि विपक्षी दलों ने इस मामले में न चुनाव आयोग (ECI) के समक्ष और न ही सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, बिना प्रमाण के लगाए जा रहे ये आरोप महज 'हवा-हवाई बातें' हैं।
वाघमारे का सीधा प्रश्न
शिवसेना प्रवक्ता वाघमारे ने कहा, 'उद्धव ठाकरे को पहले यह बताना होगा कि वोट चुराने और वोट छीनने के अधिकार के बारे में वे जो दावे कर रहे हैं, उसके बारे में विरोधी पार्टी के किसी नेता ने एक भी सबूत पेश नहीं किया है, न तो चुनाव आयोग के सामने और न ही सुप्रीम कोर्ट के सामने।' उन्होंने आगे कहा, 'अगर उनके पास उस अपराध के लिए कोई सबूत नहीं है, जिसके बारे में वे बात कर रहे हैं, तो सिर्फ हवा में बातें करने से क्या होगा?'
वाघमारे ने यह भी स्पष्ट किया कि जो बातें सार्वजनिक हुई हैं, वे केवल समाचार रिपोर्टों के ज़रिए आई हैं और उनमें जो आंतरिक दस्तावेज़ सामने आए हैं, वे किसी भी विभाग की आंतरिक नोकझोंक का हिस्सा हैं। उनके अनुसार, इस आधार पर सरकार पर आरोप लगाना 'बिल्कुल गलत' है।
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों पर कड़ा एतराज़
शिवसेना प्रवक्ता ने दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों की भी आलोचना की। उनका कहना था कि अलग-अलग विपक्षी दल 'तुमसे बड़ा मैं' की होड़ में सड़कों पर उतर रहे हैं, जिससे राजधानी में चक्काजाम की स्थिति बन रही है। वाघमारे ने आरोप लगाया कि इस स्थिति के कारण व्यापारियों को व्यापार करने में कठिनाई हो रही है और बीमार लोगों को अस्पताल पहुँचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आंदोलन का असर आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ रहा है और दिल्ली के व्यापारी जो कह रहे हैं, वह सही है — 'सवाल व्यापार का नहीं, बल्कि रोज की जिंदगी जीने का है।'
अभिजीत दिपके की हिरासत पर शिवसेना का रुख
तिरंगा मार्च से पूर्व कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) प्रमुख अभिजीत दिपके की हिरासत के मामले में वाघमारे ने स्पष्ट किया कि दिपके को पहले ही कानूनी नोटिस जारी कर सूचित किया गया था कि जिस स्थान पर वे रैली करना चाहते हैं, वहाँ कानूनी प्रक्रिया के तहत रोक लगाई गई है।
उन्होंने कहा कि नोटिस मिलने के बावजूद दिपके द्वारा रैली करने का प्रयास 'कानून के खिलाफ' था, इसीलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया। वाघमारे ने यह भी बताया कि दिपके को बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि शिवसेना में विभाजन के बाद से ही उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (यूबीटी) और एकनाथ शिंदे गुट के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। 'वोट चोरी' का मुद्दा इसी व्यापक संघर्ष का एक हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या शिवसेना (यूबीटी) इस मामले में कोई दस्तावेज़ी साक्ष्य सामने लाती है, या यह विवाद केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहता है।