3 अगस्त 2026
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संजय राउत के आरोपों पर शिवसेना का पलटवार: राजू वाघमारे बोले — सबूत लाओ, तब बात करो

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संजय राउत के आरोपों पर शिवसेना का पलटवार: राजू वाघमारे बोले — सबूत लाओ, तब बात करो

सारांश

शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने संजय राउत के सांसद सुरक्षा और कथित धन-वितरण के आरोपों को तथ्यहीन करार दिया। उन्होंने कहा — सुरक्षा गृह मंत्रालय तय करता है, कोई दल नहीं; और बिना सबूत के आरोप लगाना केवल ध्यान खींचने की कोशिश है।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने 18 जून को संजय राउत के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।
वाघमारे ने कहा कि कथित 'ऑपरेशन टाइगर' जैसा कोई अभियान एकनाथ शिंदे या शिवसेना ने नहीं चलाया।
सांसदों की सुरक्षा का निर्णय गृह मंत्रालय खतरे के आकलन के आधार पर लेता है, न कि कोई राजनीतिक दल।
संजय राउत को भी सरकार की ओर से सुरक्षा प्रदान की गई है।
सांसद खरीद के आरोपों पर वाघमारे ने कहा — ₹10 करोड़ से ₹1,000 करोड़ तक के दावे बिना किसी सबूत के लगाए जाते हैं।

शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने 18 जून को मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के हालिया बयानों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के लगाए गए आरोप केवल मीडिया का ध्यान खींचने की कोशिश हैं। वाघमारे ने सांसदों की सुरक्षा बढ़ाने के मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि किसी राजनीतिक दल के।

मुख्य घटनाक्रम

वाघमारे ने कहा कि न तो एकनाथ शिंदे ने और न ही शिवसेना ने कोई कथित 'ऑपरेशन टाइगर' चलाया है। उनके अनुसार, जब ऐसा कोई अभियान अस्तित्व में ही नहीं है, तो यह दावा करना कि किसी राजनीतिक उद्देश्य से सांसदों को सुरक्षा दी जा रही है, तथ्यहीन है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संजय राउत को भी सरकार की ओर से सुरक्षा प्रदान की गई है, जो यह साबित करता है कि सुरक्षा का निर्धारण किसी व्यक्ति के राजनीतिक विचारों के आधार पर नहीं, बल्कि खतरे के आकलन के आधार पर होता है।

सांसद खरीद के आरोपों पर प्रतिक्रिया

सांसदों को कथित तौर पर धन देकर अपने पक्ष में करने के आरोपों पर वाघमारे ने कहा कि कभी ₹10 करोड़, कभी ₹100 करोड़ और कभी ₹1,000 करोड़ देकर सांसद खरीदने जैसी बातें कही जाती हैं, लेकिन इन आरोपों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति कुछ भी कह सकता है, परंतु आरोपों को साबित करने के लिए ठोस प्रमाण होने चाहिए।

राजनीतिक इतिहास पर सवाल

वाघमारे ने राउत को उनके अपने राजनीतिक इतिहास की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था और बहुमत भी हासिल किया था, लेकिन बाद में महाविकास आघाड़ी का गठन कर राजनीतिक समीकरण बदले गए। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा की पीठ में खंजर किसने भोंका, यह जनता भली-भाँति जानती है।

बयानबाजी के स्तर पर आपत्ति

शिवसेना प्रवक्ता ने राउत और यूबीटी के कुछ प्रवक्ताओं की भाषा पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की गाली-गलौज की राजनीति की जा रही है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। वाघमारे ने कहा, 'हम उनकी भावनाओं को समझते हैं कि वे परेशान और दुखी हो सकते हैं, लेकिन जिस तरह के बयान दिए जा रहे हैं, उससे लगता है कि उन्हें गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है।'

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच वाकयुद्ध लगातार तेज हो रहा है। गौरतलब है कि सुरक्षा व्यवस्था और कथित दलबदल के आरोप अब विधानसभा और मीडिया दोनों मंचों पर केंद्रीय मुद्दा बनते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यूबीटी और शिंदे गुट के बीच यह तकरार और गहरी होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी सच है कि दोनों पक्ष अपने-अपने आरोपों को न्यायालय में नहीं, बल्कि मीडिया में साबित करना चाहते हैं। सुरक्षा के मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाना दोनों तरफ से होता दिख रहा है — और इसमें असली जवाबदेही का सवाल दब जाता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच महाराष्ट्र के मतदाता किस ओर झुक रहे हैं — और क्या यह राजनीतिक शोर उन्हें थका रहा है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजू वाघमारे ने संजय राउत के किन आरोपों का खंडन किया?
वाघमारे ने मुख्य रूप से दो आरोपों का खंडन किया — पहला, कि शिवसेना ने कथित 'ऑपरेशन टाइगर' चलाकर सांसदों को राजनीतिक उद्देश्य से सुरक्षा दिलाई; और दूसरा, कि सांसदों को धन देकर अपने पक्ष में किया गया। उन्होंने कहा कि इन दोनों आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है।
सांसदों की सुरक्षा का निर्णय कौन लेता है?
वाघमारे के अनुसार सांसदों को सुरक्षा देने या न देने का निर्णय पूरी तरह गृह मंत्रालय का होता है। सुरक्षा एजेंसियाँ खतरे के आकलन के आधार पर यह फैसला करती हैं, न कि किसी राजनीतिक दल के निर्देश पर।
क्या संजय राउत को भी सरकारी सुरक्षा मिली है?
हाँ, वाघमारे ने स्पष्ट किया कि संजय राउत को भी सरकार की ओर से सुरक्षा प्रदान की गई है। उन्होंने इसे इस बात का प्रमाण बताया कि सुरक्षा राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं दी जाती।
वाघमारे ने महाविकास आघाड़ी के गठन का ज़िक्र क्यों किया?
वाघमारे ने राउत को उनके राजनीतिक इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि शिवसेना-भाजपा ने मिलकर बहुमत जीता था, लेकिन बाद में महाविकास आघाड़ी बनाकर राजनीतिक समीकरण बदले गए। उनका इशारा था कि दूसरों पर 'धोखे' का आरोप लगाने से पहले यूबीटी को अपना इतिहास देखना चाहिए।
शिवसेना और यूबीटी के बीच यह विवाद किस मुद्दे पर है?
यह विवाद मुख्य रूप से सांसदों की सुरक्षा बढ़ाने, कथित 'ऑपरेशन टाइगर' और सांसद खरीद-फरोख्त के आरोपों पर केंद्रित है। यह महाराष्ट्र में 2022 के शिवसेना विभाजन के बाद से चल रहे व्यापक राजनीतिक टकराव का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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