संजय राउत के आरोपों पर शिवसेना का पलटवार: राजू वाघमारे बोले — सबूत लाओ, तब बात करो
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने 18 जून को मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के हालिया बयानों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के लगाए गए आरोप केवल मीडिया का ध्यान खींचने की कोशिश हैं। वाघमारे ने सांसदों की सुरक्षा बढ़ाने के मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि किसी राजनीतिक दल के।
मुख्य घटनाक्रम
वाघमारे ने कहा कि न तो एकनाथ शिंदे ने और न ही शिवसेना ने कोई कथित 'ऑपरेशन टाइगर' चलाया है। उनके अनुसार, जब ऐसा कोई अभियान अस्तित्व में ही नहीं है, तो यह दावा करना कि किसी राजनीतिक उद्देश्य से सांसदों को सुरक्षा दी जा रही है, तथ्यहीन है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संजय राउत को भी सरकार की ओर से सुरक्षा प्रदान की गई है, जो यह साबित करता है कि सुरक्षा का निर्धारण किसी व्यक्ति के राजनीतिक विचारों के आधार पर नहीं, बल्कि खतरे के आकलन के आधार पर होता है।
सांसद खरीद के आरोपों पर प्रतिक्रिया
सांसदों को कथित तौर पर धन देकर अपने पक्ष में करने के आरोपों पर वाघमारे ने कहा कि कभी ₹10 करोड़, कभी ₹100 करोड़ और कभी ₹1,000 करोड़ देकर सांसद खरीदने जैसी बातें कही जाती हैं, लेकिन इन आरोपों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति कुछ भी कह सकता है, परंतु आरोपों को साबित करने के लिए ठोस प्रमाण होने चाहिए।
राजनीतिक इतिहास पर सवाल
वाघमारे ने राउत को उनके अपने राजनीतिक इतिहास की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था और बहुमत भी हासिल किया था, लेकिन बाद में महाविकास आघाड़ी का गठन कर राजनीतिक समीकरण बदले गए। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा की पीठ में खंजर किसने भोंका, यह जनता भली-भाँति जानती है।
बयानबाजी के स्तर पर आपत्ति
शिवसेना प्रवक्ता ने राउत और यूबीटी के कुछ प्रवक्ताओं की भाषा पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की गाली-गलौज की राजनीति की जा रही है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। वाघमारे ने कहा, 'हम उनकी भावनाओं को समझते हैं कि वे परेशान और दुखी हो सकते हैं, लेकिन जिस तरह के बयान दिए जा रहे हैं, उससे लगता है कि उन्हें गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है।'
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच वाकयुद्ध लगातार तेज हो रहा है। गौरतलब है कि सुरक्षा व्यवस्था और कथित दलबदल के आरोप अब विधानसभा और मीडिया दोनों मंचों पर केंद्रीय मुद्दा बनते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यूबीटी और शिंदे गुट के बीच यह तकरार और गहरी होने की संभावना है।