तमिल संगीतकार देवा के निधन पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने जताया शोक, 400 फिल्मों में दिया संगीत
सारांश
मुख्य बातें
तमिल फिल्म जगत के प्रसिद्ध संगीतकार देवा के निधन पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शनिवार, 17 अक्टूबर को गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उपराष्ट्रपति ने कहा कि देवा ने अपने संगीत के माध्यम से आम लोगों के जीवन, भावनाओं और अनुभवों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। चेन्नई के एक निजी अस्पताल में उनके निधन की खबर से पूरे तमिल फिल्म उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई।
देवा की विरासत और योगदान
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने अपने शोक संदेश में रेखांकित किया कि देवा ने तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं की 400 से अधिक फिल्मों में संगीत देकर भारतीय सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने कहा कि देवा की यादगार धुनें और 'गाना' संगीत शैली में उनका विशिष्ट योगदान संगीत प्रेमियों की आने वाली पीढ़ियों द्वारा सदा याद रखा जाएगा। उपराष्ट्रपति ने संगीतकार के निधन को तमिल फिल्म और संगीत उद्योग के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
राधाकृष्णन ने शोकसंतप्त परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों, फिल्म जगत के सदस्यों और संगीत प्रेमियों के प्रति हार्दिक संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
देवा का जीवन और करियर
20 नवंबर 1950 को जन्मे देवा ने वर्ष 1986 में तमिल फिल्म 'माटुकारा मन्नारु' से संगीतकार के रूप में फिल्मी दुनिया में पदार्पण किया था। 'थेनिसाई थेन्द्रल' के नाम से लोकप्रिय देवा ने सुपरस्टार रजनीकांत की ब्लॉकबस्टर फिल्मों 'अन्नामलाई', 'अरुणाचलम' और 'बाशा' समेत अनेक सफल फिल्मों में संगीत दिया। उन्हें लोकप्रिय 'गाना' संगीत शैली को मुख्यधारा के सिनेमा में स्थापित करने का श्रेय भी दिया जाता है।
देवा ने न केवल संगीत रचा, बल्कि अनेक गीतों को अपनी आवाज़ भी दी। करीब दो सप्ताह पहले ही वे तमिल फिल्म 'मीसाया मुरुक्कु 2' की सफलता समारोह में शामिल हुए थे।
देवा के अपने शब्दों में — 'गाना' शैली की शुरुआत
उस समारोह में देवा ने 'गाना' संगीत शैली को अपनाने के पीछे की कहानी साझा की थी। उन्होंने कहा था, "जब मैंने फिल्म उद्योग में कदम रखा, तब मैं 28वाँ संगीत निर्देशक था और उस दौर में इलैयाराजा का दबदबा था। मुझसे पहले 27 संगीत निर्देशक आए, लेकिन वे लंबे समय तक टिक नहीं सके।"
उन्होंने आगे कहा था, "एक ओर दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा थे और दूसरी ओर ए.आर. रहमान। मैं जो भी गीत बनाता, वह या तो इलैयाराजा के गीत जैसा लगता, या यदि मैं पश्चिमी शैली का संगीत तैयार करता, तो वह रहमान के संगीत जैसा प्रतीत होता। ऐसे हालात में मैं अपनी अलग पहचान बनाना चाहता था और इसी वजह से मैंने गाना गीतों को सामने लाया।" यह बयान उनकी रचनात्मक दूरदर्शिता और संघर्ष दोनों को एक साथ उजागर करता है।
तमिल सिनेमा पर असर
गौरतलब है कि 'गाना' संगीत — जो चेन्नई की लोक परंपराओं से उपजी एक विशिष्ट शैली है — को मुख्यधारा तमिल सिनेमा में लाने में देवा की भूमिका अग्रणी रही। यह शैली आगे चलकर उनकी पहचान बन गई और आज तमिल फिल्म संगीत का एक अभिन्न हिस्सा है। देवा के निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा संगीतकार खो दिया है जिसने चार दशकों से अधिक समय तक दक्षिण भारतीय फिल्म संगीत को समृद्ध किया।