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वायनाड भूस्खलन: खूंटी के प्रवासी मजदूर अनमोल डोडराय का शव रांची पहुंचा, पहली बार निकला था घर से

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वायनाड भूस्खलन: खूंटी के प्रवासी मजदूर अनमोल डोडराय का शव रांची पहुंचा, पहली बार निकला था घर से

सारांश

पहली बार घर से निकले अनमोल डोडराय वायनाड के टनल निर्माण स्थल पर भूस्खलन की चपेट में आ गए। उनका शव 9 जुलाई को रांची पहुंचा। किसान पिता के इस बेटे की मौत ने झारखंड के प्रवासी मज़दूरों की असुरक्षित ज़िंदगी का दर्दनाक चेहरा उजागर किया है।

मुख्य बातें

अनमोल डोडराय का शव 9 जुलाई की सुबह 8:30 बजे फ्लाइट से रांची एयरपोर्ट पहुंचा।
अनमोल खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड के जरिया गांव के रहने वाले थे और तीन महीने पहले पहली बार घर से बाहर निकले थे।
वह वायनाड में टनल निर्माण कार्य में मज़दूरी कर रहे थे, जहाँ भूस्खलन में उनकी मौत हुई।
बड़ी बहन प्रेमलता ने सरकार से परिवार को आर्थिक सहायता और रोज़गार दिलाने की अपील की।
श्रम विभाग ने कंपनी की जानकारी जुटाने और परिवार को नियमानुसार सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू की।

केरल के वायनाड में हुए भीषण भूस्खलन में जान गंवाने वाले झारखंड के खूंटी जिले के प्रवासी मजदूर अनमोल डोडराय का पार्थिव शरीर गुरुवार, 9 जुलाई की सुबह करीब 8:30 बजे फ्लाइट से रांची एयरपोर्ट पहुंचा। परिवार के सदस्यों और झारखंड श्रम विभाग के अधिकारियों ने एयरपोर्ट पर शव प्राप्त किया, जिसके बाद एंबुलेंस के ज़रिए उसे तोरपा प्रखंड के जरिया गांव भेजा गया, जहाँ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

पहली बार घर से निकले थे अनमोल

अनमोल की बड़ी बहन प्रेमलता ने बताया कि उनका भाई करीब तीन महीने पहले पहली बार घर से बाहर रोज़गार की तलाश में निकला था और केरल के वायनाड में काम करने गया था। वह एक सीधा-सादा और ईमानदार लड़का था, जिसे बाहरी दुनिया और कामकाज की ज़्यादा जानकारी नहीं थी।

प्रेमलता ने कहा कि अनमोल ने परिवार को बताया था कि वह केरल में गार्ड की नौकरी करता है — वर्दी पहनकर ड्यूटी देता है और आसपास की गतिविधियों पर नज़र रखता है। हालाँकि, परिवार को उसके वास्तविक कार्य और कंपनी से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं थी। भूस्खलन में उनकी मौत की खबर मिलने के बाद पूरा परिवार सदमे में है।

टनल निर्माण स्थल पर हुई थी मौत

खूंटी के लेबर सुपरिटेंडेंट ने बताया कि अनमोल डोडराय तोरपा प्रखंड के जरिया गांव के रहने वाले थे और कुछ महीने पहले वायनाड में चल रहे टनल निर्माण कार्य में मज़दूरी करने गए थे। वहाँ हुए भूस्खलन में वह उसकी चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौत हो गई।

यह ऐसे समय में आया है जब वायनाड भूस्खलन से जुड़े राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी हैं। गौरतलब है कि इस आपदा में झारखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों के प्रवासी मज़दूर प्रभावित हुए हैं।

सरकार से आर्थिक मदद की गुहार

प्रेमलता ने सरकार से परिवार की आर्थिक मदद करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमज़ोर है — पिता किसान हैं और खेती-बाड़ी से परिवार का गुज़ारा होता है। घर में माता-पिता के अलावा एक छोटा भाई और छोटी बहन भी हैं, जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में परिवार को आर्थिक सहायता और रोज़गार की सख्त ज़रूरत है।

श्रम विभाग की कार्रवाई

श्रम विभाग के अधिकारी ने बताया कि अनमोल जिस कंपनी में काम कर रहे थे, उसके संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। कंपनी और संबंधित प्रशासन से संपर्क कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग की ओर से मिलने वाली सहायता राशि और अन्य लाभ दिलाने के लिए तत्काल प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

अधिकारी ने यह भी बताया कि वायनाड प्रशासन और वहाँ के कंट्रोल रूम से लगातार संपर्क बनाए रखा गया है। घटना के बाद राहत-बचाव अभियान जारी रहने के कारण पूरी जानकारी जुटाने में समय लगा। अब जिला प्रशासन से समन्वय कर मृतक के परिवार को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

क्या होगा आगे

अनमोल डोडराय के पैतृक गांव जरिया में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। श्रम विभाग के अनुसार, मृतक के परिवार को सरकारी सहायता राशि दिलाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। यह मामला झारखंड के उन हज़ारों प्रवासी मज़दूरों की कमज़ोर स्थिति को उजागर करता है जो बेहतर रोज़गार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं, लेकिन वहाँ उनकी सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा का कोई ठोस ढाँचा नहीं होता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं होता। जब तक प्रवासी मज़दूरों के लिए अनिवार्य पंजीकरण और बीमा कवर नहीं होगा, ऐसी मौतों के बाद परिवार की 'अपील' ही एकमात्र सहारा बनी रहेगी।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनमोल डोडराय कौन थे और वायनाड में क्या कर रहे थे?
अनमोल डोडराय झारखंड के खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड के जरिया गांव के युवा प्रवासी मज़दूर थे। वह करीब तीन महीने पहले पहली बार घर से बाहर निकले थे और वायनाड में चल रहे टनल निर्माण कार्य में मज़दूरी कर रहे थे, जहाँ भूस्खलन में उनकी मौत हो गई।
अनमोल का शव रांची कब और कैसे पहुंचा?
अनमोल का पार्थिव शरीर 9 जुलाई की सुबह करीब 8:30 बजे फ्लाइट से रांची एयरपोर्ट पहुंचा। वहाँ परिवार के सदस्यों और श्रम विभाग के अधिकारियों ने शव प्राप्त किया और फिर एंबुलेंस के ज़रिए उसे पैतृक गांव जरिया भेजा गया।
अनमोल के परिवार की क्या स्थिति है और उन्होंने क्या माँग की है?
अनमोल के पिता किसान हैं और खेती-बाड़ी से परिवार का गुज़ारा होता है। घर में माता-पिता के अलावा एक छोटा भाई और छोटी बहन भी हैं जो पढ़ाई कर रहे हैं। बड़ी बहन प्रेमलता ने सरकार से परिवार को आर्थिक सहायता और रोज़गार दिलाने की अपील की है।
झारखंड श्रम विभाग परिवार की मदद के लिए क्या कर रहा है?
श्रम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अनमोल की कंपनी से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है और वायनाड प्रशासन से लगातार संपर्क बनाए रखा गया है। विभाग की ओर से मिलने वाली सहायता राशि और अन्य लाभ दिलाने के लिए तत्काल प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
वायनाड भूस्खलन में झारखंड के कितने मज़दूर प्रभावित हुए?
स्रोत में अनमोल डोडराय के मामले का विशेष उल्लेख है। अधिकारियों के अनुसार, वायनाड आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण झारखंड के अन्य प्रभावित मज़दूरों की पूरी जानकारी जुटाने में समय लग रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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