विश्व गैंडा दिवस 2026: पाँच प्रजातियाँ, एक संकट — सुमात्राई गैंडे की संख्या सिर्फ 30-50 बची
सारांश
मुख्य बातें
विश्व गैंडा दिवस हर वर्ष 22 सितंबर को मनाया जाता है — गैंडों की पाँचों प्रजातियों के संरक्षण और उनके सामने खड़े खतरों के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से। 2026 में यह दिवस ऐसे समय पर आया है जब सुमात्राई गैंडे की वैश्विक संख्या महज 30 से 50 के बीच रह गई है, जो इस प्रजाति के अस्तित्व पर सबसे गंभीर प्रश्नचिह्न है।
भारत सरकार और राज्यों की प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा कि भारत का एक सींग वाला गैंडा केवल वन्यजीव विरासत का प्रतीक नहीं, बल्कि 'संरक्षण, बेहतर सुरक्षा और सामूहिक प्रयासों' की एक जीती-जागती कहानी है। मंत्रालय ने विश्व गैंडा दिवस 2026 पर भारत की संरक्षण यात्रा में हुई प्रगति का जश्न मनाते हुए भविष्य को सुरक्षित रखने की सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई।
बिहार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने भी एक्स पर पोस्ट कर कहा कि गैंडा 'जंगलों, घास के मैदानों और जल स्रोतों के प्राकृतिक संतुलन का अनिवार्य अंग है।' विभाग ने एक अन्य पोस्ट में बताया कि पटना ज़ू — बिहार का एकमात्र जैविक उद्यान — वर्ष 1979 से एक सींग वाले भारतीय गैंडे के संरक्षण और प्रजनन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और अब यह एक आधुनिक गैंडा संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र का रूप ले चुका है।
छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री केदार कश्यप ने भी इस अवसर पर संदेश देते हुए एक सींग वाले भारतीय गैंडे के प्राकृतिक आवास के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
गैंडे की पाँच प्रजातियाँ और उनकी स्थिति
एक सींग वाला गैंडा भारत और नेपाल में पाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की सूची में यह 'सुभेद्य' (Vulnerable) श्रेणी में है, जिसका अर्थ है कि इसकी संख्या में निरंतर गिरावट आ रही है। आवास और संरक्षण पर ध्यान न दिए जाने पर भविष्य में विलुप्ति का संकट गहरा सकता है।
सफेद गैंडा, जिसके दो सींग होते हैं, अफ्रीका का सबसे बड़ा गैंडा है और हाथी के बाद धरती पर रहने वाला दूसरा सबसे बड़ा स्थलीय स्तनधारी है। यह दक्षिण अफ्रीका, नामिबीया और जिम्बाब्वे में पाया जाता है और IUCN की 'निकटतम संकटग्रस्त' (Near Threatened) सूची में दर्ज है।
काला गैंडा भी दो सींगों वाला होता है — हुकदार होंठ इसकी विशेष पहचान हैं। यह पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में पाया जाता है और IUCN की सूची में 'अति संकटग्रस्त' (Critically Endangered) है। सींगों के अवैध व्यापार के कारण इसका बड़े पैमाने पर शिकार हुआ है।
जावन गैंडा एक सींग वाला और अत्यंत दुर्लभ प्राणी है। यह जावा, इंडोनेशिया में पाया जाता है और IUCN की 'अति संकटग्रस्त' सूची में शामिल है। इस प्रजाति में मादाओं में प्रायः सींग नहीं होता या बहुत छोटा होता है।
सुमात्राई गैंडा — जो दो सींगों वाला, सबसे अधिक बालों वाला और सभी प्रजातियों में सबसे छोटा और सबसे पुराना माना जाता है — अब दुनिया में केवल 30 से 50 ही शेष हैं। यह शर्मीला और अकेला रहने वाला जीव है, जो मुख्यतः सुमात्रा द्वीप, इंडोनेशिया में पाया जाता है। IUCN की सूची में यह भी 'अति संकटग्रस्त' है।
संरक्षण की ज़रूरत क्यों
गौरतलब है कि गैंडे पारिस्थितिक तंत्र में 'मेगा-हर्बीवोर' की भूमिका निभाते हैं — वे घास के मैदानों और वनों को संतुलित रखते हैं। इनके विलुप्त होने से न केवल जैव-विविधता, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिक शृंखला प्रभावित होती है। यह ऐसे समय में विशेष रूप से चिंताजनक है जब जलवायु परिवर्तन और आवास विनाश पहले से ही वन्यजीवों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, सुमात्राई और जावन गैंडों की वसूली के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सख्त शिकार-रोधी कानूनों के क्रियान्वयन और कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रमों का विस्तार आवश्यक है। भारत में एक सींग वाले गैंडे की बढ़ती संख्या एक सकारात्मक संकेत है, जो यह दर्शाता है कि दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामुदायिक भागीदारी से संरक्षण के लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं।