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बिहार में मानसून 2026: 35% कम बारिश, फिर भी 15 जिलों में बाढ़, 48.70 लाख प्रभावित

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बिहार में मानसून 2026: 35% कम बारिश, फिर भी 15 जिलों में बाढ़, 48.70 लाख प्रभावित

सारांश

बिहार में मानसून 2026 एक साथ दो संकट लेकर आया — सामान्य से 35% कम बारिश और रिकॉर्डतोड़ बाढ़। शिवहर में 62% वर्षा की कमी, तो पटना में गंगा ने 2016 का रिकॉर्ड तोड़ा। 48.70 लाख लोग प्रभावित, किसानों पर दोहरी मार।

मुख्य बातें

15 सितंबर 2026 तक बिहार में सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज; औरंगाबाद को छोड़कर सभी 37 जिले प्रभावित।
सर्वाधिक वर्षा की कमी शिवहर में 62% ; सीतामढ़ी और जहानाबाद में 58% की कमी।
पटना के गांधी घाट पर गंगा 50.58 मीटर — 2016 के 50.52 मीटर के रिकॉर्ड से 6 सेंटीमीटर अधिक।
13 सितंबर तक 15 जिलों के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों में 48.70 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित।
एक ही जिले में नदी किनारे बाढ़, तो दूर के हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति — किसानों पर दोहरी मार।
मानसून समाप्ति में करीब 15 दिन शेष; अंतिम वर्षा कृषि के लिए निर्णायक होगी।

बिहार में मानसून 2026 अपनी समाप्ति की ओर है, लेकिन इस वर्ष वर्षा का वितरण इतना असमान रहा है कि राज्य एक साथ दो विपरीत संकटों — बाढ़ और सूखे — से जूझ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की अधिकारिक अवधि 1 जून से 30 सितंबर तक है और 15 सितंबर 2026 तक राज्य में सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की जा चुकी है। औरंगाबाद को छोड़कर राज्य के सभी 37 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है।

बारिश की कमी: कौन-से जिले सबसे अधिक प्रभावित

आँकड़ों के अनुसार, 1 जून से 14 सितंबर के बीच कई जिलों में सामान्य से 50 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई। सबसे अधिक बारिश की कमी शिवहर जिले में रही, जहाँ सामान्य से 62 प्रतिशत कम वर्षा हुई। सीतामढ़ी और जहानाबाद में यह कमी 58 प्रतिशत रही। यह स्थिति उन किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय है जो खरीफ फसल पर निर्भर हैं।

गौरतलब है कि वर्षा की यह कमी केवल कृषि तक सीमित नहीं है — भूजल पुनर्भरण पर भी इसका दीर्घकालिक असर पड़ सकता है, जिसकी चिंता जल संसाधन विशेषज्ञ पहले से जताते रहे हैं।

नदियों का उफान: गंगा ने तोड़े दशकों के रिकॉर्ड

विडंबनापूर्ण रूप से, बारिश की कमी के बावजूद इस मानसून में गंगा, कोसी, गंडक सहित सात बड़ी नदियों और पुनपुन समेत छह से अधिक छोटी नदियों के जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इसका कारण ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में वर्षा और नेपाल व अन्य पड़ोसी क्षेत्रों से आने वाला अतिरिक्त पानी बताया जा रहा है।

पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर तक पहुँच गया, जो 2016 में दर्ज 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम स्तर से 6 सेंटीमीटर अधिक था। इसी प्रकार भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 36.80 मीटर दर्ज किया गया, जिसने 2021 में दर्ज 36.75 मीटर के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

बाढ़ का असर: 15 जिले, 575 ग्राम पंचायतें प्रभावित

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 13 सितंबर 2026 तक राज्य के 15 जिलों में बाढ़ से व्यापक तबाही हुई है। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल जिलों के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों में करीब 48.70 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।

बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं। कई इलाकों में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है।

किसानों पर दोहरी मार: एक ही जिले में बाढ़ और सूखा

इस वर्ष बिहार में मानसून की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि एक ही जिले में नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का पानी फसलें डुबो रहा है, जबकि उसी जिले के अन्य हिस्सों में वर्षा के अभाव में खेतों में नमी की कमी बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के किसान पहले से ही कृषि लागत और बाज़ार की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं।

मानसून की विदाई में अब करीब 15 दिन शेष हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी के घटने और जनजीवन के सामान्य होने की प्रतीक्षा है, तो वहीं कम बारिश वाले जिलों में किसान मानसून की बची हुई अवधि में अच्छी वर्षा की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण की दीर्घकालिक रणनीति के बिना यह चक्र हर वर्ष दोहराता रहेगा। बची हुई मानसूनी वर्षा कृषि और जल संसाधन दोनों दृष्टिकोण से निर्णायक होगी — यह तय करेगी कि खरीफ फसल की क्षति किस हद तक सीमित हो पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस वर्ष का आँकड़ा विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि गंगा ने दशकों पुराने रिकॉर्ड तोड़े जबकि कुल वर्षा 35% नीचे रही। यह दर्शाता है कि समस्या केवल वर्षा की मात्रा की नहीं, बल्कि नदी प्रबंधन, ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र और राज्य की जल-संचयन अवसंरचना की विफलता की भी है। हर वर्ष बाढ़ राहत पर करोड़ों खर्च होते हैं, लेकिन स्थायी तटबंध नवीनीकरण और जलग्रहण प्रबंधन की नीति अधूरी रहती है। जब तक नीति-निर्माता बाढ़ और सूखे को एक साझा जल-प्रशासन समस्या के रूप में नहीं देखेंगे, तब तक बिहार का किसान इस दोहरे संकट में फँसा रहेगा।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में मानसून 2026 में बारिश कितनी कम हुई है?
मौसम विभाग के आँकड़ों के अनुसार, 1 जून से 14 सितंबर 2026 के बीच बिहार में सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। औरंगाबाद को छोड़कर राज्य के सभी 37 जिलों में बारिश की कमी रही, जिसमें शिवहर में सर्वाधिक 62 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।
बिहार में बाढ़ से कितने लोग प्रभावित हैं?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार 13 सितंबर 2026 तक 15 जिलों के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों में करीब 48.70 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। पटना, भागलपुर, सारण और वैशाली सहित कई जिलों में फसलें डूबीं और लोगों को घर छोड़ना पड़ा।
पटना में गंगा का जलस्तर इस वर्ष कितना ऊँचा रहा?
पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर तक पहुँचा, जो 2016 में दर्ज 50.52 मीटर के पिछले रिकॉर्ड से 6 सेंटीमीटर अधिक है। भागलपुर के सुल्तानगंज में भी गंगा 36.80 मीटर तक पहुँची, जिसने 2021 के 36.75 मीटर के रिकॉर्ड को पार कर दिया।
बारिश कम होने के बावजूद बिहार में बाढ़ क्यों आई?
विशेषज्ञों के अनुसार बिहार की नदियों — विशेषकर गंगा, कोसी और गंडक — के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों और नेपाल से आने वाले अतिरिक्त पानी के कारण जलस्तर बढ़ा। राज्य में स्वयं वर्षा कम होने के बावजूद सात बड़ी और छह से अधिक छोटी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया।
मानसून की विदाई से पहले बिहार के किसानों की स्थिति क्या है?
किसानों के सामने इस वर्ष दोहरी चुनौती है — नदी किनारे के क्षेत्रों में बाढ़ ने खड़ी फसलें नष्ट कर दीं, जबकि दूर के इलाकों में पर्याप्त वर्षा न होने से फसलें सूखने की कगार पर हैं। मानसून की विदाई में करीब 15 दिन शेष हैं, और किसान अंतिम वर्षा पर निर्भर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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