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हिंदी दिवस 2026: 'नई हिंदी किशोरावस्था में है' — लेखक शैलेश भारतवासी का विशेष विश्लेषण

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हिंदी दिवस 2026: 'नई हिंदी किशोरावस्था में है' — लेखक शैलेश भारतवासी का विशेष विश्लेषण

सारांश

हिंदी दिवस 2026 पर लेखक शैलेश भारतवासी का दावा — इंटरनेट के साथ जन्मी 'नई हिंदी' अब किशोरावस्था में है। भाषाई शुद्धता की बहस से लेकर साहित्य में संवाद-शैली तक, उनका विश्लेषण बताता है कि हिंदी खोल में बंद नहीं, बल्कि विस्तार में है।

मुख्य बातें

14 सितंबर 2026 को हिंदी दिवस मनाया गया; वैश्विक स्तर पर हिंदी तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।
लेखक शैलेश भारतवासी के अनुसार, इंटरनेट के साथ जन्मी 'नई हिंदी' को 13-14 वर्ष हो चुके हैं और वह किशोरावस्था में है।
पिछले 12-15 वर्षों में कंप्यूटर और इंटरनेट पर देशी भाषाओं की गति कई हजार गुना बढ़ी है।
भारतवासी का मत है कि भाषाई शुद्धता की जिद भाषा को 'खोल में बंद' कर देती है; दूसरी भाषाओं से संक्रमण आवश्यक है।
साहित्य में भाषाई प्रयोग को उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया; शैक्षणिक संस्थान अपनी परिधि में इसे नियंत्रित कर सकते हैं।

हिंदी दिवस 2026 के अवसर पर लेखक शैलेश भारतवासी ने कहा कि नई हिंदी को जन्मे अब 13-14 वर्ष हो चुके हैं और यह भाषा इस समय अपनी किशोरावस्था में है। 14 सितंबर 2026 को हिंदी दिवस मनाया गया, जिस उपलक्ष्य में भारतवासी ने भाषा के डिजिटल विकास, शुद्धता की बहस और साहित्य में भाषाई प्रयोगों पर अपनी राय साझा की।

इंटरनेट और देवनागरी का नया युग

शैलेश भारतवासी ने कहा कि हिंदी बनाम अंग्रेजी की कोई वास्तविक प्रतिस्पर्धा नहीं है। उनके अनुसार, 'पिछले 12-15 वर्षों में इंटरनेट तकनीक और देवनागरी के संदर्भ में देखें, और यूनिकोड के 25-26 वर्ष पुराने इतिहास को परखें, तो हिंदी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जबरदस्त गति मिली है।' उन्होंने रेखांकित किया कि कंप्यूटर पर देशी भाषाओं की उपयोगिता कई हजार गुना बढ़ चुकी है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर हिंदी तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा के रूप में स्थापित है। भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में हिंदी-भाषी क्षेत्रों का योगदान लगातार बढ़ रहा है, जो इस भाषा के डिजिटल भविष्य को और सुदृढ़ बना रहा है।

शुद्ध हिंदी की चुनौती और भाषाई संक्रमण

भाषाई शुद्धता के सवाल पर भारतवासी का स्पष्ट मत था। उन्होंने कहा, 'आज के दौर में अगर कोई प्रचलित भाषा दूसरी भाषाओं से शब्द नहीं लेगी, तो वह खुद को एक खोल में बंद करती जाएगी।' उनके अनुसार, भाषा के प्रसार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि 'बिना संक्रमण के दूसरी भाषाओं के शब्द ही नहीं, वाक्य विन्यास और शैली में जब तक एक-दूसरे का अंतर निहित नहीं होगा, कोई भी भाषा अपने आप को जीवित नहीं रख सकती।' वहीं, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक प्रकार की 'शुद्ध हिंदी' आज भी आपसी संवाद में प्रचलित है।

साहित्य और भाषाई सुचितापन

हिंदी साहित्य में गाली को संवाद के रूप में प्रयोग करने के सवाल पर भारतवासी ने कहा कि गाली दुनिया के हर समाज का अभिन्न हिस्सा रही है। साहित्य हमेशा आम जनता का पक्षधर रहा है, इसलिए उसमें प्रायः वही भाषा प्रयुक्त होती है जो आम बोलचाल की है। उनके अनुसार, इसकी सीमा कोई अकेला व्यक्ति तय नहीं कर सकता, हालाँकि शैक्षणिक संस्थान अपनी शास्त्रीय परिधि में इसे नियंत्रित अवश्य कर सकते हैं।

गौरतलब है कि भारतवासी ने सिनेमा और साहित्य की तुलना भी की। उनका कहना था कि सिनेमा में भाषाई असंयम साहित्य की तुलना में कहीं अधिक है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया — 'हर चीज को लोकतांत्रिक किया जा रहा है, तो भाषाई सुचितापन भी लोकतांत्रिक हुआ है।'

नई हिंदी: किशोरावस्था में एक भाषा

भारतवासी का सबसे चर्चित कथन यह रहा कि 'नई हिंदी को जन्मे 13-14 वर्ष हो गए हैं, वह अब अपनी किशोरावस्था में है।' यह टिप्पणी उस हिंदी के संदर्भ में है जो इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के साथ विकसित हुई है — एक ऐसी हिंदी जो न पूर्णतः शास्त्रीय है, न ही अंग्रेजी-मिश्रित हिंग्लिश।

यह विश्लेषण इस लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिले सात दशक से अधिक हो चुके हैं, फिर भी भाषा का रूप और स्वरूप निरंतर परिवर्तनशील है। आने वाले वर्षों में यह 'किशोर' हिंदी किस दिशा में परिपक्व होती है, यह भारतीय भाषाई परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक गहरा भाषानीतिक सवाल छुपा है — राजभाषा के रूप में सात दशक पुरानी हिंदी अगर अभी किशोरावस्था में है, तो क्या सरकारी नीतियाँ और पाठ्यक्रम उस 'नई हिंदी' को पहचानते भी हैं जो डिजिटल स्क्रीन पर जी रही है? हिंदी दिवस हर साल मनाया जाता है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर उसी शास्त्रीय बहस में उलझी रहती है जिसे भारतवासी जैसे लेखक पुरानी चुनौती मानते हैं। असली सवाल यह है कि यूनिकोड और सोशल मीडिया से निखरी यह हिंदी, जो करोड़ों युवाओं की रोज़मर्रा की भाषा है, कब शिक्षा और नीति में केंद्र में आएगी।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शैलेश भारतवासी ने 'नई हिंदी' से क्या तात्पर्य बताया?
शैलेश भारतवासी के अनुसार 'नई हिंदी' वह भाषा है जो इंटरनेट और डिजिटल तकनीक के साथ पिछले 13-14 वर्षों में विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि यह हिंदी अभी अपनी किशोरावस्था में है और तेज़ी से परिपक्व हो रही है।
हिंदी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। वैश्विक स्तर पर हिंदी तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।
क्या हिंदी में दूसरी भाषाओं के शब्द लेना उचित है?
लेखक शैलेश भारतवासी का स्पष्ट मत है कि जो भाषा दूसरी भाषाओं से शब्द और शैली नहीं ग्रहण करती, वह खुद को सीमित कर लेती है। उनके अनुसार, भाषाई संक्रमण किसी भी भाषा के जीवित रहने की शर्त है।
इंटरनेट और यूनिकोड ने हिंदी को कैसे प्रभावित किया है?
भारतवासी के अनुसार, यूनिकोड के लगभग 25-26 वर्षों के इतिहास और पिछले 12-15 वर्षों की इंटरनेट क्रांति ने हिंदी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापक पहुँच दी है। कंप्यूटर पर देशी भाषाओं की उपयोगिता कई हजार गुना बढ़ी है।
साहित्य में भाषाई प्रयोगों पर शैलेश भारतवासी का क्या दृष्टिकोण है?
भारतवासी का कहना है कि साहित्य हमेशा आम जनता की भाषा का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए वहाँ आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग स्वाभाविक है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया, हालाँकि शैक्षणिक संस्थान अपनी शास्त्रीय सीमाओं के भीतर इसे नियंत्रित कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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