15 सितंबर 2026
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बिहार बाढ़ प्रबंधन पर दिलीप जायसवाल: सम्राट चौधरी सरकार की तारीफ, कांग्रेस की फरक्का संधि पर हमला

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बिहार बाढ़ प्रबंधन पर दिलीप जायसवाल: सम्राट चौधरी सरकार की तारीफ, कांग्रेस की फरक्का संधि पर हमला

सारांश

बिहार मंत्री दिलीप जायसवाल ने सम्राट चौधरी सरकार की बाढ़ प्रबंधन नीति की सराहना करते हुए कांग्रेस की फरक्का जल संधि को बिहार के बाढ़ संकट की जड़ बताया। ₹11,000 करोड़ की कोसी-मेची लिंक परियोजना को राहत की उम्मीद बताया।

मुख्य बातें

बिहार मंत्री दिलीप जायसवाल ने 15 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की बाढ़ प्रबंधन नीति की सराहना की।
बिहार में बाढ़ के तीन प्रमुख कारण: नेपाल से जल प्रवाह, पुनपुन व बूढ़ी गंडक नदियों का उफान और गंगा का जलस्तर।
भागलपुर और पीरपैंती के पास गंगा का बाढ़-जल 17-18 किलोमीटर तक फैल जाता है।
केंद्र सरकार ने कोसी-मेची लिंक परियोजना के लिए बिहार को ₹11,000 करोड़ दिए; दो लाख हेक्टेयर में जल-संचयन का लक्ष्य।
जायसवाल ने कांग्रेस-काल की फरक्का जल संधि को बिहार की बाढ़ समस्या की बड़ी वजह बताया।
UCC पर जायसवाल ने गृह मंत्री अमित शाह के रुख का समर्थन किया, इसे 'विकसित भारत' के लिए अनिवार्य बताया।

बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने 15 सितंबर 2026 को कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में इस वर्ष बाढ़ का प्रबंधन अत्यंत प्रभावी रहा है — चाहे नेपाल से आने वाली बाढ़ हो, गंगा का उफान हो या पुनपुन नदी का जलस्तर। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस शासन में हुई फरक्का जल संधि बिहार के लिए अनुचित थी और यही दीर्घकालिक बाढ़ संकट की एक बड़ी वजह है।

बिहार में बाढ़ के तीन प्रमुख कारण

जायसवाल ने बताया कि बिहार में बाढ़ की समस्या तीन मुख्य स्रोतों से उत्पन्न होती है। पहला — नेपाल के तराई और पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा होने पर वहाँ का जल बिहार में प्रवेश कर जाता है। दूसरा — पुनपुन और बूढ़ी गंडक नदियों का उफान। तीसरा — गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने पर निचले इलाकों में बाढ़ का विस्तार।

उन्होंने विशेष रूप से बताया कि जब गंगा में उफान आता है तो भागलपुर और पीरपैंती के आसपास बाढ़ का पानी 17-18 किलोमीटर तक फैल जाता है, जिससे निचले इलाकों की बड़ी आबादी प्रभावित होती है।

फरक्का संधि पर कांग्रेस को घेरा

जायसवाल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल से ही यह सवाल उठाया जाता रहा है कि कांग्रेस के शासन में हुई फरक्का को लेकर जल संधि उचित नहीं थी। उनके अनुसार, इसी संधि के कारण गंगा के बाढ़-जल के प्रवाह का नियंत्रण जटिल हो जाता है और बिहार के निचले क्षेत्रों में पानी का विस्तार अत्यधिक हो जाता है।

कोसी-मेची लिंक परियोजना और केंद्र का सहयोग

मंत्री ने केंद्र सरकार की कोसी-मेची लिंक परियोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए बिहार को ₹11,000 करोड़ आवंटित किए हैं। इससे मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्र में कोसी, मेची, महानंदा और तीस्ता नदियों के जल का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।

जायसवाल के अनुसार, लगभग दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जल-संचयन करके सिंचाई के लिए उपयोग किया जाएगा, जिससे बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ कृषि को भी लाभ होगा।

यूसीसी पर अमित शाह का समर्थन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की आवश्यकता दोहराए जाने पर जायसवाल ने पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में UCC देश की ज़रूरत बनेगी और विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू होगी। उन्होंने तर्क दिया कि UCC सभी नागरिकों को समान अधिकार देती है।

विपक्ष पर तीखा प्रहार

जायसवाल ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल सरकार का विरोध करने तक सिमट गई है। उनके अनुसार, विपक्ष की असली जिम्मेदारी लोगों की सेवा करना और उनके बीच जाना है, परंतु विपक्षी नेता दिल्ली या राज्य की राजधानी में बैठकर बयानबाजी करने में व्यस्त हैं।

उन्होंने कहा कि विपक्ष को बाढ़ पीड़ितों से मिलने, गरीबों की सेवा करने और उनके इलाज में सहयोग करने के लिए सक्रिय रूप से मैदान में उतरना चाहिए। कोसी-मेची लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के साथ बिहार में बाढ़ प्रबंधन की दिशा में आने वाले वर्षों में और ठोस परिणाम देखने की उम्मीद की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹11,000 करोड़ की कोसी-मेची परियोजना के क्रियान्वयन की गति क्या रहेगी, जबकि बिहार में बड़े जल-प्रबंधन प्रकल्प वर्षों तक अटके रहने का इतिहास है। यूसीसी का समर्थन बाढ़ संदर्भ में जोड़ना यह भी बताता है कि सत्ता पक्ष बाढ़ राहत के मुद्दे को व्यापक राजनीतिक एजेंडे से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप जायसवाल ने फरक्का संधि को गलत क्यों बताया?
जायसवाल के अनुसार, कांग्रेस शासन में हुई फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं थी क्योंकि इससे गंगा के बाढ़-जल का प्रवाह भागलपुर और पीरपैंती जैसे निचले इलाकों में 17-18 किलोमीटर तक फैल जाता है। यह मुद्दा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समय से भी उठाया जाता रहा है।
कोसी-मेची लिंक परियोजना क्या है और इसके लिए कितना धन मिला?
कोसी-मेची लिंक परियोजना एक केंद्रीय जल-प्रबंधन योजना है जिसके तहत मिथिलांचल और सीमांचल में कोसी, मेची, महानंदा और तीस्ता नदियों के जल का नियमन किया जाएगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए बिहार को ₹11,000 करोड़ आवंटित किए हैं और लगभग दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जल-संचयन का लक्ष्य है।
बिहार में बाढ़ के मुख्य कारण क्या हैं?
जायसवाल के अनुसार बिहार में बाढ़ तीन कारणों से आती है — नेपाल के तराई और पहाड़ी क्षेत्रों से जल का प्रवाह, पुनपुन और बूढ़ी गंडक नदियों का उफान, और गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि। इन तीनों के एक साथ सक्रिय होने पर स्थिति गंभीर हो जाती है।
मंत्री जायसवाल ने UCC पर क्या कहा?
जायसवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के UCC लागू करने के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता 'विकसित भारत' के लक्ष्य के लिए अनिवार्य है और यह सभी नागरिकों को समान अधिकार देती है। उन्होंने विपक्ष की इस मुद्दे पर आलोचना को अनुचित बताया।
बिहार सरकार ने इस बाढ़ में राहत के लिए क्या कदम उठाए?
जायसवाल के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार ने बाढ़ प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति की सहायता के लिए मुस्तैदी से काम किया है। नेपाल से आने वाली बाढ़, गंगा के उफान और पुनपुन नदी — तीनों मोर्चों पर त्वरित प्रतिक्रिया का दावा किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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