कैबिनेट ने ITLA को मंजूरी दी: मल्टीमॉडल परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्लानिंग को मिलेगा नया ढाँचा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (ITLA) की स्थापना को औपचारिक मंजूरी दे दी। यह एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) होगा, जो परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में एकीकृत योजना, अनुसंधान, परियोजना मूल्यांकन और क्रियान्वयन की निगरानी का केंद्रीय दायित्व सँभालेगा। यह निर्णय दशकों से विभिन्न परिवहन मंत्रालयों के बीच बिखरी योजना और समन्वय की कमी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ITLA क्या है और कैसे काम करेगा
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, ITLA परिवहन और लॉजिस्टिक्स के व्यापक क्षेत्रों में अनुसंधान, योजना, मूल्यांकन, निगरानी और प्रभाव आकलन को मज़बूत करने के लिए बनाया गया है। यह प्रयोजन वाहन राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष नीति-सहयोग संस्था के रूप में कार्य करेगा।
प्राधिकरण नीतिगत सहायता प्रदान करने के साथ-साथ डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करते हुए परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन, क्रियान्वयन की निगरानी और परिणामों का प्रभाव आकलन भी करेगा।
राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान
ITLA की एक प्रमुख जिम्मेदारी एक व्यापक राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करना होगी, जिसकी योजना अवधि कम-से-कम 10 वर्ष या उससे अधिक होगी। इस योजना में सड़क, रेलवे, बंदरगाह एवं शिपिंग, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय शिपिंग, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स — सभी प्रमुख परिवहन साधनों को समाहित किया जाएगा।
इसके अलावा, विभिन्न परिवहन मंत्रालयों द्वारा बनाई गई अल्पकालिक क्षेत्रीय और वार्षिक योजनाओं की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे दीर्घकालिक राष्ट्रीय रणनीति के अनुरूप हैं।
परियोजना मूल्यांकन और निगरानी का दायरा
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ITLA केंद्र सरकार की ₹500 करोड़ या उससे अधिक अनुमानित लागत वाली परिवहन एवं बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन करेगा। हालाँकि इन परियोजनाओं का वित्तीय मूल्यांकन मौजूदा तंत्र के माध्यम से जारी रहेगा।
यह प्राधिकरण ₹500 करोड़ से अधिक की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी भी करेगा और परियोजनाओं के दौरान उभरने वाली बाधाओं के समाधान के लिए एक समन्वित मंच की भूमिका निभाएगा। लागू होने के बाद परियोजनाओं के नतीजों का प्रभाव आकलन करना भी इसकी ज़िम्मेदारी होगी।
यह फैसला क्यों अहम है
गौरतलब है कि भारत में परिवहन नियोजन लंबे समय से कई मंत्रालयों — सड़क परिवहन, रेलवे, बंदरगाह, नागरिक उड्डयन और शहरी विकास — के बीच विभाजित रहा है, जिससे एकीकृत मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में रुकावटें आती रही हैं। सरकार का मानना है कि बेहतर समन्वय और मल्टीमॉडल एकीकरण से बुनियादी ढाँचे के विकास की दक्षता, स्थिरता और प्रभावशीलता में वृद्धि होगी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के मौजूदा अनुमानित स्तर से घटाकर वैश्विक मानकों के करीब लाने का प्रयास कर रहा है — एक लक्ष्य जिसे बार-बार सरकारी दस्तावेज़ों में प्राथमिकता दी गई है।
आगे क्या होगा
मंजूरी के बाद ITLA की विस्तृत संरचना, बजटीय प्रावधान और कार्यक्षेत्र के दिशानिर्देश जारी किए जाएँगे। एकीकृत राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान की पहली रूपरेखा सामने आने पर ही इस संस्था की वास्तविक कार्यप्रणाली और क्षेत्रीय मंत्रालयों के साथ उसके संबंध की परीक्षा होगी।