फास्टैग एनुअल पास ने पार किया 1 करोड़ उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा, 1,150 टोल प्लाजा पर लागू
सारांश
मुख्य बातें
फास्टैग एनुअल पास ने लॉन्च के बाद से 1 करोड़ उपयोगकर्ताओं का मील का पत्थर पार कर लिया है — केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 28 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी। यह योजना 15 अगस्त 2025 को शुरू की गई थी और राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित यात्रा करने वाले वाहन चालकों के बीच तेज़ी से लोकप्रियता हासिल कर रही है।
योजना की मुख्य विशेषताएँ
मंत्रालय के अनुसार, फास्टैग एनुअल पास देशभर के लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर मान्य है, जिनमें राष्ट्रीय राजमार्ग और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे दोनों शामिल हैं। इस पास के ज़रिए वाहन मालिकों को बार-बार फास्टैग रिचार्ज कराने की झंझट से मुक्ति मिलती है।
मात्र ₹3,075 के एकमुश्त भुगतान पर यह पास एक वर्ष या 200 टोल क्रॉसिंग तक — जो भी पहले पूरा हो — वैध रहता है। राजमार्ग यात्रा ऐप के ज़रिए भुगतान करने के बाद पास वाहन से जुड़े मौजूदा फास्टैग पर स्वतः सक्रिय हो जाता है।
पात्रता और उपयोग का तरीका
यह सुविधा उन सभी गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए उपलब्ध है जिनमें वैध फास्टैग लगा हुआ है। अलग से कोई नया फिज़िकल टैग लगाने की आवश्यकता नहीं है — मौजूदा फास्टैग पर ही पास सक्रिय हो जाता है, जिससे प्रक्रिया सरल और पूरी तरह डिजिटल रहती है।
वनटैग: फास्टैग पोर्टेबिलिटी की नई सुविधा
इसी बीच, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पिछले महीने 'वनटैग' सुविधा भी शुरू की है। यह एक फास्टैग पोर्टेबिलिटी सेवा है जिसके ज़रिए उपयोगकर्ता अपने वाहन पर लगे मौजूदा फास्टैग को बदले बिना उसका जारीकर्ता बैंक बदल सकते हैं।
इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए उपयोगकर्ता को राजमार्ग यात्रा ऐप में लॉग-इन कर अपना वाहन पंजीकरण नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद वर्तमान जारीकर्ता बैंक की ओर से एक 6 अंकों का मोबाइल वेरिफिकेशन कोड (MVC) भेजा जाता है। सत्यापन पूरा होते ही उपयोगकर्ता नया जारीकर्ता बैंक चुनकर केवाईसी और वॉलेट ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी कर सकता है।
फास्टैग की व्यापक पहुँच
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में फास्टैग की पहुँच अब 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है और कुल उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 13 करोड़ तक पहुँच गई है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों पर डिजिटल और निर्बाध टोल संग्रह को प्राथमिकता दे रही है।
गौरतलब है कि फास्टैग ने भारत की इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया है — टोल प्लाजा पर नकद लेनदेन घटा है, पारदर्शिता बढ़ी है और वाहन चालकों का बहुमूल्य समय बचा है।
आगे की राह
सरकार का मानना है कि फास्टैग एनुअल पास और वनटैग जैसी सुविधाएँ मिलकर देश की डिजिटल टोलिंग व्यवस्था को और सुदृढ़ करेंगी। इन पहलों से हाईवे यात्रियों को अधिक सुविधा, लचीलापन और बेहतर यात्रा अनुभव मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में और अधिक टोल प्लाजा को इस प्रणाली से जोड़े जाने की संभावना है।