22 जुलाई 2026
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77 लाख से अधिक वार्षिक फास्टैग पास जारी, नेशनल हाईवे पर 63 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज: गडकरी

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77 लाख से अधिक वार्षिक फास्टैग पास जारी, नेशनल हाईवे पर 63 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज: गडकरी

सारांश

जून 2026 तक 77 लाख से अधिक वार्षिक फास्टैग पास और 63 करोड़ ट्रांजैक्शन — और 98% टोल संग्रह अब डिजिटल। सरकार अब एआई और एएनपीआर आधारित मल्टी लेन फ्री फ्लो सिस्टम की ओर बढ़ रही है, जहाँ टोल प्लाजा पर रुकना इतिहास बन जाएगा।

मुख्य बातें

जून 2026 तक देशभर में 77 लाख से अधिक वार्षिक फास्टैग पास जारी किए गए।
इन पासों के माध्यम से नेशनल हाईवे टोल प्लाजा पर 63 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज।
कार, जीप और वैन श्रेणी के कुल ईटीसी लेनदेन में वार्षिक फास्टैग पास की हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत ।
एनईटीसी कार्यक्रम के तहत नेशनल हाईवे का 98 प्रतिशत टोल संग्रह अब फास्टैग से।
सरकार ने एएनपीआर , एआई एनालिटिक्स और आरएफआईडी आधारित मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया।

केंद्र सरकार ने 22 जुलाई 2026 को राज्यसभा में बताया कि जून 2026 तक देशभर में 77 लाख से अधिक वार्षिक फास्टैग पास जारी किए जा चुके हैं और इन पासों के ज़रिए नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर 63 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज हुए हैं। यह आँकड़े देश की इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ईटीसी) व्यवस्था की बढ़ती पकड़ को दर्शाते हैं।

मुख्य घटनाक्रम

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि कार, जीप और वैन श्रेणी के वाहनों द्वारा किए जाने वाले कुल ईटीसी लेनदेन में वार्षिक फास्टैग पास की हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि इस योजना से टोल संचालन अधिक कुशल हुआ है और सड़क उपयोगकर्ताओं की यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक बनी है।

सरकार के अनुसार, नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (एनईटीसी) कार्यक्रम के तहत नेशनल हाईवे पर होने वाले कुल टोल शुल्क संग्रह का करीब 98 प्रतिशत फास्टैग के माध्यम से हो रहा है — जो डिजिटल भुगतान की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

डिजिटल सुरक्षा और पारदर्शिता

सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी फास्टैग लेनदेन एक बहु-स्तरीय सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था के तहत संपन्न होते हैं, जिसमें टोल मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर, टोल प्लाजा का अक्वायरर बैंक, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) केंद्रीय क्लियरिंग हाउस के रूप में और फास्टैग जारी करने वाला बैंक शामिल होते हैं।

इस प्रक्रिया में काटे गए टोल शुल्क की जानकारी तत्काल वाहन चालक को दी जाती है और प्रत्येक लेनदेन का रिकॉर्ड केंद्रीय डेटाबेस में सुरक्षित रखा जाता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अक्वायरर बैंक, एनपीसीआई और फास्टैग जारी करने वाले बैंक की भागीदारी के बिना कोई भी लेनदेन संभव नहीं है।

शिकायत निवारण व्यवस्था

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने टोल शुल्क से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए कई निवारण तंत्र विकसित किए हैं। गडकरी ने कहा कि टोल शुल्क संग्रह में पारदर्शिता और संचालन की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

आगे की योजना: मल्टी लेन फ्री फ्लो

टोल व्यवस्था को और आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित एनालिटिक्स और आरएफआईडी आधारित फास्टैग सिस्टम पर आधारित मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है।

इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने, गति धीमी करने या किसी विशेष लेन में प्रतीक्षा करने की ज़रूरत नहीं होगी — टोल शुल्क स्वतः उनके खाते से कट जाएगा। यह बदलाव राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात प्रवाह को और सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह डिजिटलीकरण आम वाहन चालक के लिए वास्तविक बचत और सुविधा में तब्दील हो रहा है। वार्षिक पास की 33 प्रतिशत हिस्सेदारी बताती है कि नियमित यात्री योजना को अपना रहे हैं, पर शिकायत निवारण की गुणवत्ता और गलत कटौती की दर पर सरकार ने कोई आँकड़ा साझा नहीं किया। एमएलएफएफ की घोषणा महत्वाकांक्षी है, लेकिन जीएनएसएस आधारित टोलिंग की पिछली समय-सीमाएँ चूकने के बाद इस नई प्रणाली की क्रियान्वयन तिथि और जवाबदेही ढाँचे पर स्पष्टता ज़रूरी है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वार्षिक फास्टैग पास क्या होता है और यह सामान्य फास्टैग से कैसे अलग है?
वार्षिक फास्टैग पास एक प्रीपेड वार्षिक सदस्यता है जो नेशनल हाईवे पर एक निश्चित अवधि के लिए असीमित या निर्धारित संख्या में टोल-मुक्त या रियायती दर पर यात्रा की सुविधा देती है। सामान्य फास्टैग में हर बार टोल प्लाजा पर खाते से शुल्क कटता है, जबकि वार्षिक पास में एकमुश्त भुगतान से बार-बार कटौती से राहत मिलती है।
जून 2026 तक कितने वार्षिक फास्टैग पास जारी हुए और कितने ट्रांजैक्शन दर्ज हुए?
सरकार के अनुसार जून 2026 तक देशभर में 77 लाख से अधिक वार्षिक फास्टैग पास जारी किए गए हैं। इन पासों के माध्यम से नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर 63 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज हुए हैं।
मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली क्या है और इससे वाहन चालकों को क्या फायदा होगा?
एमएलएफएफ एक अत्याधुनिक टोल प्रणाली है जिसमें एएनपीआर कैमरे, एआई एनालिटिक्स और आरएफआईडी आधारित फास्टैग के ज़रिए चलती गाड़ी से ही टोल शुल्क स्वतः काट लिया जाएगा। वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने, गति धीमी करने या लाइन में प्रतीक्षा करने की ज़रूरत नहीं होगी, जिससे ईंधन की बचत और यातायात प्रवाह में सुधार होगा।
नेशनल हाईवे पर कितना टोल संग्रह अब फास्टैग से हो रहा है?
सरकार के अनुसार नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (एनईटीसी) कार्यक्रम के तहत नेशनल हाईवे पर कुल टोल शुल्क संग्रह का लगभग 98 प्रतिशत अब फास्टैग के माध्यम से हो रहा है। यह आँकड़ा देश में डिजिटल टोल भुगतान की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
फास्टैग लेनदेन में सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है?
प्रत्येक फास्टैग लेनदेन में टोल मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर, अक्वायरर बैंक, एनपीसीआई (केंद्रीय क्लियरिंग हाउस) और फास्टैग जारी करने वाला बैंक — इन चारों की भागीदारी अनिवार्य है। इनमें से किसी एक की भी अनुपस्थिति में लेनदेन संभव नहीं है, और प्रत्येक कटौती की सूचना तत्काल वाहन चालक को दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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