महाराष्ट्र: डेटा सेंटर के पर्यावरणीय असर की जाँच के लिए डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटी गठित
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 13 अक्टूबर 2026 को परमाणु ऊर्जा आयोग (एटॉमिक एनर्जी कमीशन) के पूर्व चेयरमैन डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी गठित की है, जो राज्य भर में डेटा सेंटरों के पर्यावरणीय, इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का विस्तृत अध्ययन करेगी। सरकारी आदेश सोमवार देर रात जारी किया गया। यह कदम तब उठाया गया है जब महाराष्ट्र स्वयं को देश के प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।
समिति गठन की पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्यों द्वारा 2026 के मॉनसून सत्र में नियम 101 के तहत लाए गए 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' के बाद यह समिति बनाई गई है। विधायकों ने बिजली, पानी, जमीन और मौजूदा जल संसाधनों पर डेटा सेंटरों की भारी माँग के साथ-साथ तापमान वृद्धि, ध्वनि प्रदूषण, पर्यावरण क्षति और स्थानीय नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जताई थी। इसके जवाब में उद्योग मंत्री उदय सामंत ने विधानसभा को आश्वस्त किया था कि संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों की एक व्यापक समिति गठित की जाएगी।
समिति की संरचना और सदस्य
इस उच्च-स्तरीय समिति में शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। प्रमुख सदस्यों में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ऊर्जा विभाग), प्रधान सचिव (जल संसाधन विभाग), प्रधान सचिव (पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग), महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) तथा महाराष्ट्र राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड (एमएसईटीसीएल) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शामिल हैं।
शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों से डॉ. एस. वेंकट मोहन (निदेशक, सीएसआईआर-एनईईआरआई, नागपुर), प्रो. एम.वी. राणे (मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी बॉम्बे) और प्रो. डॉ. शमिता कुमार (पर्यावरण शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, भारती विद्यापीठ, पुणे) को शामिल किया गया है। उद्योग जगत से श्रीनिवास पी. (सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, डेटा सेंटर डिजाइन, योटा डेटा सर्विसेज) और प्रसाद कल्याणरमन (वाइस प्रेसिडेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज, अमेज़न वेब सर्विसेज) भी समिति के सदस्य हैं।
समिति के कार्यक्षेत्र और ज़िम्मेदारियाँ
समिति का मुख्य कार्य पर्यावरण, पानी, ऊर्जा, वायु, ध्वनि और स्थानीय इकोसिस्टम पर डेटा सेंटरों के प्रभाव का निष्पक्ष, वैज्ञानिक और तकनीकी आकलन करना है। इसके अलावा यह ऊर्जा-कुशल, हरित और टिकाऊ डेटा सेंटर संचालन के लिए दिशानिर्देश तैयार करने हेतु वैश्विक और राष्ट्रीय सर्वोत्तम पद्धतियों का अध्ययन करेगी।
समिति को जल संरक्षण, जल पुनर्चक्रण और वैकल्पिक कूलिंग प्रौद्योगिकियों की सिफारिश करने का भी दायित्व सौंपा गया है। इसके साथ ही वह राज्य में डेटा सेंटरों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का प्रस्ताव देगी और स्थानीय रोज़गार, कौशल विकास एवं कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों को बढ़ावा देने के उपाय भी सुझाएगी। गौरतलब है कि समिति स्थानीय ग्रामीणों, स्थानीय निकायों और जन-प्रतिनिधियों के लिए जन-जागरूकता और संवाद का ढाँचा भी तैयार करेगी।
समयसीमा और प्रशासनिक सहयोग
समिति को सरकारी आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। एमआईडीसी, उद्योग निदेशालय और सेवाएँ निदेशालय की ओर से समिति को प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। आवश्यकतानुसार समिति संबंधित सरकारी अधिकारियों और विषय-विशेषज्ञों को भी चर्चा में आमंत्रित कर सकती है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में डेटा सेंटरों की संख्या में तेज़ वृद्धि हो रही है और उनके पर्यावरणीय बोझ को लेकर सार्वजनिक बहस तेज़ हो रही है। महाराष्ट्र का यह कदम अन्य राज्यों के लिए एक संभावित मॉडल बन सकता है। समिति की सिफारिशें राज्य की डेटा सेंटर नीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगी।