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संजय राउत ने CM फडणवीस को लिखा पत्र, ठाणे डेटा सेंटर पर तत्काल रोक की मांग

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संजय राउत ने CM फडणवीस को लिखा पत्र, ठाणे डेटा सेंटर पर तत्काल रोक की मांग

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने CM फडणवीस को पत्र लिखकर ठाणे डेटा सेंटर पर तत्काल रोक माँगी है — पानी, बिजली और पर्यावरण को लेकर। यह माँग उस वक्त आई है जब MMR को देश के डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित किया जा रहा है और स्थानीय निवासी 'हीट आइलैंड' व संसाधन दबाव से चिंतित हैं।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 21 अक्टूबर 2026 को CM देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर ठाणे डेटा सेंटर परियोजना पर तत्काल रोक लगाने की माँग की।
राउत ने स्थानीय बुनियादी ढाँचे पर दबाव, जल खपत, बिजली लोड और पर्यावरणीय प्रभाव को आधार बनाया।
ठाणे नगर निगम (टीएमसी) , महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) और नागरिक प्रतिनिधियों की संयुक्त परामर्श बैठक की माँग की गई।
डेवलपर के 'वाटर-फ्री कूलिंग' दावों की स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा जाँच और सभी नियामक मंजूरियों को सार्वजनिक करने की अपील की गई।
राउत ने पूरे महाराष्ट्र में डेटा सेंटरों के लिए राज्य-स्तरीय नीतिगत दिशानिर्देश बनाने की भी माँग की।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक विस्तृत पत्र लिखकर ठाणे में निर्माणाधीन डेटा सेंटर परियोजना पर तत्काल रोक लगाने की माँग की। राउत ने स्थानीय बुनियादी ढाँचे पर गंभीर दबाव, संसाधनों की अत्यधिक खपत और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभावों को इस माँग का आधार बताया। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पत्र में क्या है मुख्य माँग

राउत ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक राज्य स्तर पर एक व्यापक और बाध्यकारी नीति नहीं बन जाती, तब तक ठाणे डेटा सेंटर परियोजना को पूरी तरह स्थगित रखा जाए। उन्होंने तर्क दिया कि तकनीकी बुनियादी ढाँचे का विस्तार स्थानीय निवासियों की नागरिक सुविधाओं और पारिस्थितिक संतुलन की बलि देकर नहीं किया जाना चाहिए।

राउत ने माँग की कि ठाणे नगर निगम (टीएमसी), महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी), बिजली वितरण कंपनियाँ, जल आपूर्ति प्राधिकरण, परियोजना डेवलपर्स और स्थानीय नागरिकों के प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त परामर्श बैठक आयोजित की जाए।

पारदर्शिता और नियामक जवाबदेही की माँग

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने सभी नियामक मंजूरियों — निर्माण अनुमति, जल आपूर्ति आवंटन, बिजली लोड स्वीकृति, वृक्ष-कटान अनुमति और पर्यावरणीय क्लियरेंस — को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने की अपील की। साथ ही उन्होंने माँग की कि सक्रिय और समाप्त हो चुकी अनुमतियों की कानूनी वैधता भी स्पष्ट की जाए।

राउत ने डेवलपर के 'वाटर-फ्री कूलिंग' के दावों की स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा जाँच कराने की भी माँग उठाई — जिसमें प्रतिदिन और पीक समय में पानी की खपत, स्रोत, रीसाइक्लिंग क्षमता और कूलिंग तकनीकों का मूल्यांकन शामिल हो।

बिजली आपूर्ति और स्थानीय ग्रिड पर चिंता

राउत ने बिजली की पीक माँग, विशेष आपूर्ति व्यवस्था और स्थानीय ग्रिड पर पड़ने वाले संभावित बोझ का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक करने का आग्रह किया। उन्होंने सवाल उठाया कि आवश्यक बिजली बुनियादी ढाँचे के निर्माण का खर्च कौन वहन करेगा — डेवलपर या राज्य का खजाना।

गौरतलब है कि बड़े डेटा सेंटर अत्यधिक ऊर्जा-गहन होते हैं और घनी आबादी वाले इलाकों में इनकी स्थापना से स्थानीय ग्रिड पर असंगत दबाव पड़ सकता है, जिसका खामियाजा आसपास के आवासीय उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है।

प्रदूषण और सार्वजनिक सुनवाई की माँग

प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभावों पर राउत ने माँग की कि आसपास की आवासीय इमारतों पर शोर और वायु प्रदूषण का आकलन किया जाए। उन्होंने बैकअप डीजल जनरेटर, कूलिंग सिस्टम और निर्माण कार्यों के लिए कड़े नियमों के पालन को अनिवार्य बनाने की वकालत की।

राउत ने पत्र में यह भी कहा: 'बैठकों का आधिकारिक विवरण, डेवलपर्स द्वारा किए गए वादे और नियमों को लागू करने की समय-सीमा सार्वजनिक की जानी चाहिए। यदि अनुमति की शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो तुरंत नियामक प्रतिबंध लगाए जाएँ और काम रोका जाए; काम को तभी फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाए, जब सभी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठा लिए जाएँ।'

व्यापक पृष्ठभूमि: MMR में डेटा सेंटर विस्तार

राउत की यह माँग ऐसे समय में आई है जब मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) को देश के प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्थानीय नागरिक कार्यकर्ताओं और निवासियों ने बिजली की अस्थिरता, जल आपूर्ति में व्यवधान और उपनगरीय इलाकों में 'हीट आइलैंड' प्रभाव — यानी स्थानीय स्तर पर तापमान में असामान्य वृद्धि — को लेकर चिंता जताई है। राउत ने माँग की कि राज्य सरकार पूरे महाराष्ट्र में डेटा सेंटरों के लिए पानी की खपत, बिजली उपयोग, उत्सर्जन, शोर और सामुदायिक प्रभाव को समाहित करते हुए स्पष्ट नीतिगत दिशानिर्देश तैयार करे। आगे क्या होता है, यह काफी हद तक मुख्यमंत्री फडणवीस की प्रतिक्रिया और नियामक एजेंसियों के रुख पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बाध्यकारी नीति नहीं बनाता, हर नई परियोजना इसी टकराव को दोहराती रहेगी।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने ठाणे डेटा सेंटर पर रोक की माँग क्यों की?
राउत ने स्थानीय बुनियादी ढाँचे पर गंभीर दबाव, अत्यधिक जल खपत, बिजली ग्रिड पर बोझ और पर्यावरणीय प्रभावों का हवाला देते हुए यह माँग की। उनका कहना है कि जब तक राज्य-स्तरीय व्यापक नीति नहीं बनती, परियोजना स्थगित रहनी चाहिए।
राउत ने CM फडणवीस से किन बैठकों और जाँच की माँग की है?
राउत ने ठाणे नगर निगम, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजली वितरण कंपनियों, जल प्राधिकरणों, डेवलपर्स और नागरिक प्रतिनिधियों की एक संयुक्त परामर्श बैठक की माँग की। इसके अलावा डेवलपर के 'वाटर-फ्री कूलिंग' दावों की स्वतंत्र विशेषज्ञ जाँच और सभी नियामक मंजूरियों को सार्वजनिक करने की अपील की।
ठाणे डेटा सेंटर परियोजना से स्थानीय निवासियों को क्या खतरा है?
स्थानीय निवासियों और नागरिक कार्यकर्ताओं ने बिजली की अस्थिरता, जल आपूर्ति में व्यवधान और उपनगरीय इलाकों में 'हीट आइलैंड' प्रभाव यानी असामान्य तापमान वृद्धि की आशंका जताई है। शोर और वायु प्रदूषण भी चिंता के विषय हैं।
महाराष्ट्र सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
राउत के पत्र पर अब तक मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आगे का घटनाक्रम CM फडणवीस के जवाब और संबंधित नियामक एजेंसियों के रुख पर निर्भर करेगा।
MMR में डेटा सेंटर विवाद की व्यापक पृष्ठभूमि क्या है?
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन को देश के प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस तेज़ विस्तार के बीच घनी आबादी वाले उपनगरों में ऊर्जा-गहन परियोजनाओं की स्थापना को लेकर पर्यावरणीय और नागरिक चिंताएँ बढ़ रही हैं, जिनके लिए अभी राज्य-स्तर पर कोई स्पष्ट नीतिगत ढाँचा मौजूद नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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