22 अगस्त 2026
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संजय राउत का अमित शाह को पत्र: NUCFDC से महाराष्ट्र के सहकारी बैंकों के साथ अन्याय का आरोप

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संजय राउत का अमित शाह को पत्र: NUCFDC से महाराष्ट्र के सहकारी बैंकों के साथ अन्याय का आरोप

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अमित शाह को मराठी में पत्र लिखकर आरोप लगाया कि NUCFDC विधेयक जल्दबाजी में पारित हुआ और महाराष्ट्र के शहरी सहकारी बैंकों की संपत्ति सदस्यों की सहमति के बिना हस्तांतरित की गई — जिसे उन्होंने राज्य के सहकारी आंदोलन पर सीधा हमला बताया।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 20 अगस्त 2026 को केंद्रीय मंत्री अमित शाह को मराठी में पत्र लिखकर NUCFDC विधेयक, 2026 पर आपत्ति जताई।
पत्र की प्रति मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शरद पवार को भी भेजी गई।
8 अगस्त 2026 को मुंबई में उद्घाटित NUCFDC कार्यालय का परिसर पहले महाराष्ट्र-गोवा के शीर्ष शहरी सहकारी बैंक का मुख्यालय था।
आरोप है कि संपत्ति हस्तांतरण सदस्य समितियों की सहमति के बिना किया गया और हस्तांतरण आदेश सार्वजनिक नहीं किए गए।
NUCFDC के निदेशक मंडल में महाराष्ट्र के शहरी सहकारी बैंकों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
माधवपुरा मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में वसूली दावे अभी लंबित हैं।

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने 20 अगस्त 2026 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने और मुंबई में राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त विकास निगम (NUCFDC) कार्यालय के उद्घाटन पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। उनका आरोप है कि महाराष्ट्र के शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की संपत्तियाँ सदस्यों की सहमति के बिना हस्तांतरित की गई हैं।

पत्र की मुख्य बातें

राउत ने यह पत्र जानबूझकर मराठी भाषा में लिखा, ताकि महाराष्ट्र की जनता सीधे समझ सके कि उनके शब्दों में सहकारी क्षेत्र के साथ किस प्रकार 'अन्याय किया जा रहा है।' इस पत्र की प्रति मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रीय सहकारी समिति के अध्यक्ष शरद पवार को भी भेजी गई है।

राउत ने आरोप लगाया कि संसद के मानसून सत्र के दौरान यह विधेयक पर्याप्त चर्चा या संसदीय जाँच के बिना जल्दबाजी में पारित किया गया। उनका कहना है कि यह महाराष्ट्र के ऐतिहासिक सहकारी आंदोलन पर सीधा हमला है।

NUCFDC कार्यालय उद्घाटन पर सवाल

राउत ने 8 अगस्त 2026 को मुंबई में उद्घाटन किए गए NUCFDC कार्यालय के परिसर को लेकर आपत्ति जताई। उनके अनुसार यह परिसर पहले महाराष्ट्र और गोवा के शीर्ष शहरी सहकारी बैंक का मुख्यालय था — एक ऐसी संस्था जो स्थानीय सहकारी समितियों द्वारा वित्त पोषित थी।

गौरतलब है कि यह शीर्ष बैंक कई वर्षों से परिसमापन प्रक्रिया में है और परिसंपत्ति वितरण की प्रतीक्षा कर रही सदस्य समितियाँ इस निर्णय से सीधे प्रभावित हैं। राउत ने माधवपुरा मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में लंबित वसूली दावों का भी उल्लेख किया।

पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व पर आपत्ति

राउत ने बताया कि सहकारिता मंत्रालय और सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार की वेबसाइटों पर परिसंपत्ति हस्तांतरण आदेशों से जुड़े विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक अपारदर्शिता का उदाहरण बताया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि NUCFDC दिल्ली में पंजीकृत एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के रूप में संरचित है। आलोचकों का कहना है कि राज्य से पर्याप्त पूँजी प्राप्त करने के बावजूद इसके निदेशक मंडल में महाराष्ट्र के शहरी सहकारी बैंकों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है — जो संघीय सहकारी भावना के विरुद्ध है।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) के बीच सहकारी क्षेत्र के नियंत्रण को लेकर तनाव बना हुआ है। शिवसेना (यूबीटी) लंबे समय से सहकारी संस्थाओं पर केंद्र के बढ़ते प्रभाव का विरोध करती रही है।

आगे क्या होगा

राउत ने पत्र में केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण और हस्तांतरण आदेशों को सार्वजनिक करने की माँग की है। अब देखना यह होगा कि अमित शाह का मंत्रालय इन आरोपों का जवाब देता है या नहीं, और क्या सदस्य सहकारी समितियाँ कानूनी रास्ता अपनाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नीतिगत रवैया है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने अमित शाह को पत्र क्यों लिखा?
राउत ने NUCFDC संशोधन विधेयक, 2026 के जल्दबाजी में पारित होने और मुंबई में NUCFDC कार्यालय के उद्घाटन पर आपत्ति जताने के लिए 20 अगस्त 2026 को यह पत्र लिखा। उनका आरोप है कि महाराष्ट्र के शहरी सहकारी बैंकों की संपत्ति सदस्यों की सहमति के बिना हस्तांतरित की गई।
NUCFDC क्या है और इसका महाराष्ट्र से क्या संबंध है?
राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त विकास निगम (NUCFDC) दिल्ली में पंजीकृत एक NBFC है जो शहरी सहकारी बैंकों को वित्त पोषण देती है। विवाद यह है कि मुंबई में इसका कार्यालय उस परिसर में खोला गया जो पहले महाराष्ट्र और गोवा के शीर्ष शहरी सहकारी बैंक का मुख्यालय था, और इसके बोर्ड में महाराष्ट्र के बैंकों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
इस विवाद से कौन प्रभावित हो रहा है?
महाराष्ट्र और गोवा की वे सदस्य सहकारी समितियाँ सबसे अधिक प्रभावित हैं जो परिसमापन में फँसे शीर्ष बैंक से परिसंपत्ति वितरण की प्रतीक्षा कर रही हैं। माधवपुरा मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में लंबित वसूली दावे भी इससे जुड़े हैं।
राउत ने पारदर्शिता को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
राउत का कहना है कि सहकारिता मंत्रालय और केंद्रीय रजिस्ट्रार की वेबसाइटों पर परिसंपत्ति हस्तांतरण आदेशों का विवरण उपलब्ध नहीं है। उन्होंने माँग की है कि ये आदेश सार्वजनिक किए जाएँ और सदस्य समितियों से परामर्श किया जाए।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या है?
शिवसेना (यूबीटी) ने इसे महाराष्ट्र के सहकारी आंदोलन पर केंद्र का सीधा हमला बताया है। राउत ने पत्र की प्रति मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शरद पवार को भी भेजी है। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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