मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 83 डॉलर प्रति बैरल के पार

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मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 83 डॉलर प्रति बैरल के पार

सारांश

मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में 2%25 से अधिक वृद्धि हुई है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से सप्लाई पर असर पड़ा है। जानें इस स्थिति का भारत के आयात पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

Key Takeaways

  • कच्चे तेल की कीमतें 83 डॉलर प्रति बैरल के पार गईं।
  • ईरान का जलडमरूमध्य बंद करना कीमतों में वृद्धि का कारण है।
  • भारत का आयात बिल प्रभावित हो सकता है।
  • भारत के पास 25 दिनों का भंडार है।
  • भारत ने तेल आयात में विविधता लाई है।

नई दिल्ली, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण गुरुवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई। सप्लाई पर पड़ रहे प्रभाव के चलते कीमतों में यह उछाल आया है, विशेषकर जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है।

सुबह के शुरुआती कारोबार में, इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क क्रूड का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 2.43 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 83.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (एनवाईमेक्स) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 2.63 प्रतिशत बढ़कर 76.63 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक कंटेनर जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ है, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा है।

तेल की कीमतों में निरंतर वृद्धि भारत के आयात बिल पर असर डाल सकती है। यदि कच्चे तेल की कीमत पूरे वर्ष में प्रति बैरल 1 डॉलर बढ़ती है, तो भारत का आयात बिल लगभग 16,000 करोड़ रुपए तक बढ़ सकता है।

इस बीच, सरकारी सूत्रों के अनुसार, कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के मामले में भारत फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में है। देश के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार और 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है, जिसमें वह तेल भी शामिल है जो जहाजों के माध्यम से भारत के बंदरगाहों की ओर आ रहा है।

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिसमें से लगभग 50 प्रतिशत तेल मिडिल ईस्ट के देशों से आता है, जो मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचता है। ईरान युद्ध के बाद इस मार्ग से सप्लाई प्रभावित हुई है।

हालांकि, भारत ने अफ्रीका, रूस और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाकर अपने स्रोतों में विविधता लाई है और रणनीतिक भंडार बनाकर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों से भी तेल आयात बढ़ाया है, जिसके चलते अब बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते नहीं आती।

भारत ने 31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष में कच्चे तेल के आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए थे। वहीं चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों (अप्रैल 2025 से जनवरी 2026) के दौरान 206.3 मिलियन टन कच्चे तेल के आयात पर 100.4 अरब डॉलर खर्च किए गए।

Point of View

बल्कि भारत जैसे आयातक देशों के लिए भी चिंता का विषय है। हमें इस संकट का सामना करने के लिए सही रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
NationPress
07/03/2026

Frequently Asked Questions

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का प्रमुख कारण क्या है?
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में तनाव और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का कितना प्रतिशत आयात करता है?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है।
क्या भारत के पास कच्चे तेल का भंडार है?
हां, भारत के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार मौजूद है।
अगर कच्चे तेल की कीमत एक डॉलर बढ़ती है, तो इसका भारत के आयात बिल पर क्या असर पड़ेगा?
यदि कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल 1 डॉलर बढ़ती है, तो भारत का आयात बिल लगभग 16,000 करोड़ रुपए बढ़ सकता है।
भारत ने अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता कैसे लाई है?
भारत ने अफ्रीका, रूस और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाकर अपने स्रोतों में विविधता लाई है।
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