4 अगस्त 2026
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पीएम सूर्य घर योजना: 50 लाख से अधिक परिवारों को मुफ्त बिजली, 19 लाख घरों का बिल शून्य

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पीएम सूर्य घर योजना: 50 लाख से अधिक परिवारों को मुफ्त बिजली, 19 लाख घरों का बिल शून्य

सारांश

दो वर्षों में 50 लाख से अधिक परिवार, 19 लाख घरों का बिजली बिल शून्य और 12 लाख परिवारों को ग्रिड बिक्री से सालाना ₹3,500 की अतिरिक्त आय — पीएम सूर्य घर योजना अब सिर्फ सोलर पैनल लगाने की स्कीम नहीं, बल्कि आम परिवारों के लिए आय का नया ज़रिया बनती जा रही है।

मुख्य बातें

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत अब तक 50.06 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिल चुका है — योजना शुरू होने के मात्र 2 वर्षों में।
लगभग 19 लाख परिवारों का बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो चुका है।
12 लाख से अधिक परिवारों ने अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर वित्त वर्ष 2024-25 में कुल ₹421 करोड़ अर्जित किए; प्रति परिवार औसतन ₹3,500 सालाना ।
सरकार ने DBT के ज़रिये अब तक ₹28,024 करोड़ की सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी।
जुलाई 2026 योजना का सबसे सफल महीना रहा — अकेले इस महीने 5.06 लाख परिवार जुड़े और प्रतिदिन 16,328 इंस्टॉलेशन हुए।
कुल 14.8 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित; 34,219 विक्रेता पंजीकृत और 2.32 लाख लोगों को प्रशिक्षण।

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना ने 4 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक पड़ाव पार किया — केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि दुनिया के सबसे बड़े घरेलू रूफटॉप सोलर कार्यक्रम के तहत अब तक 50.06 लाख से अधिक परिवारों को लाभ पहुँच चुका है। योजना शुरू होने के मात्र दो वर्षों के भीतर यह उपलब्धि हासिल हुई है, जिसे सरकार के स्वच्छ ऊर्जा मिशन की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया जा रहा है।

मुख्य उपलब्धियाँ

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, योजना से पहले के पूरे दस वर्षों में देशभर में केवल 7.94 लाख रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन हुए थे। पीएम सूर्य घर योजना ने इससे कई गुना अधिक परिवारों तक अत्यंत कम समय में पहुँच बनाई है। ₹75,021 करोड़ के बजट वाली यह योजना अब वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ी से विस्तार पाने वाली स्वच्छ ऊर्जा पहलों में गिनी जाने लगी है।

सरकार के आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लगभग हर 6 दिन में एक लाख परिवार इस योजना से जुड़ रहे हैं। पिछले 9 महीनों में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की गति तीन गुना से अधिक बढ़ी है — अक्टूबर 2025 में प्रतिदिन औसतन 5,038 इंस्टॉलेशन हो रहे थे, जो जुलाई 2026 में बढ़कर 16,328 इंस्टॉलेशन प्रतिदिन तक पहुँच गए।

जुलाई 2026: अब तक का सबसे सफल महीना

जुलाई 2026 इस योजना के लिए अब तक का सर्वश्रेष्ठ महीना रहा। केवल इसी एक महीने में 5.06 लाख परिवारों को योजना का लाभ मिला — जो किसी भी एकल महीने का अब तक का सबसे बड़ा आँकड़ा है। योजना के विस्तार को गति देने के लिए सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में अब तक ₹28,024 करोड़ की सब्सिडी जारी की है।

आम जनता पर असर

सरकार के अनुसार, योजना के चलते अब लगभग 19 लाख परिवारों का बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो चुका है। इससे भी आगे, 12 लाख से अधिक परिवारों ने अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कुल ₹421 करोड़ की आय अर्जित की। इससे प्रति परिवार औसतन ₹3,500 सालाना की अतिरिक्त कमाई हुई — यानी यह योजना बिजली बचाने के साथ-साथ आय का नया स्रोत भी बन रही है।

कमज़ोर वर्गों तक पहुँच

योजना का लाभ आर्थिक रूप से कमज़ोर तबकों तक पहुँचाने पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), गरीबी रेखा से नीचे (BPL) और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) परिवारों के लिए चार राज्यों में लगभग 1.6 लाख इंस्टॉलेशन पूरे किए जा चुके हैं। इस मॉडल को अब 12 राज्यों में लागू करने की मंजूरी भी मिल चुकी है।

रोज़गार और उद्योग पर प्रभाव

पीएम सूर्य घर योजना केवल स्वच्छ ऊर्जा तक सीमित नहीं रही — इसने सोलर उद्योग में रोज़गार और कारोबार के नए अवसर भी खोले हैं। योजना के तहत अब तक 34,219 विक्रेताओं (वेंडर्स) का पंजीकरण हुआ है, जिनमें से 29,469 सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। विभिन्न क्षमता-विकास कार्यक्रमों के तहत 2.32 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। मंत्रालय के अनुसार, अब तक कुल 14.8 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की जा चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने परिवार वास्तव में शून्य बिल की स्थिति में पहुँचे हैं और कितने महीनों तक बने रहे — सरकार ने अभी तक इसका दीर्घकालिक डेटा सार्वजनिक नहीं किया। ₹75,021 करोड़ के बजट में से केवल ₹28,024 करोड़ की सब्सिडी जारी हुई है, यानी आधे से अधिक बजट अभी भी बाकी है — जो यह संकेत देता है कि विस्तार की रफ्तार और तेज़ होनी चाहिए। SC/ST और BPL परिवारों तक पहुँच का मॉडल अभी केवल चार राज्यों तक सीमित था और 12 राज्यों में विस्तार की मंजूरी अभी हाल की है — इसलिए समावेशी लाभ का दावा अभी समय से पहले है। यदि ग्रिड-बिक्री आय का यह मॉडल वास्तव में स्केल हुआ, तो यह भारत की ऊर्जा राजनीति को बदल सकता है — लेकिन वितरण कंपनियों की वित्तीय सेहत और नेट मीटरिंग नीतियों की एकरूपता पर यह निर्भर करेगा, जो राज्य-दर-राज्य अभी भी असमान है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना क्या है?
पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख रूफटॉप सोलर पहल है, जिसका बजट ₹75,021 करोड़ है और लक्ष्य आम परिवारों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर उनका बिजली बिल शून्य या न्यूनतम करना है। यह दुनिया का सबसे बड़ा घरेलू रूफटॉप सोलर कार्यक्रम माना जाता है।
योजना से अब तक कितने परिवारों को फायदा मिला है?
4 अगस्त 2026 तक योजना के तहत 50.06 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिल चुका है। इनमें से लगभग 19 लाख परिवारों का बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया है।
क्या परिवार अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर सकते हैं?
हाँ, योजना के तहत 12 लाख से अधिक परिवारों ने अतिरिक्त सोलर बिजली ग्रिड को बेची और वित्त वर्ष 2024-25 में कुल ₹421 करोड़ की आय अर्जित की। प्रति परिवार औसतन ₹3,500 सालाना की अतिरिक्त कमाई हुई।
योजना की सब्सिडी कैसे मिलती है?
सरकार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजती है। अब तक ₹28,024 करोड़ की सब्सिडी इस तरह जारी की जा चुकी है, जिससे सोलर सिस्टम लगाने की शुरुआती लागत काफी कम हो जाती है।
क्या गरीब और SC/ST परिवारों को भी इस योजना का लाभ मिल रहा है?
हाँ, PMAY, BPL और SC/ST परिवारों के लिए चार राज्यों में लगभग 1.6 लाख इंस्टॉलेशन पूरे किए जा चुके हैं। इस मॉडल को अब 12 राज्यों में विस्तारित करने की मंजूरी मिल चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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