आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वैज्ञानिक नवाचार की केंद्रीय भूमिका: वाइस-रीगल लॉज में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह

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आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वैज्ञानिक नवाचार की केंद्रीय भूमिका: वाइस-रीगल लॉज में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह

सारांश

दिल्ली के वाइस-रीगल लॉज में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 का भव्य समारोह आयोजित हुआ, जहाँ प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वैज्ञानिक नवाचार की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। शिक्षा, सरकार और उद्योग जगत के बीच सहयोग के माध्यम से ही भारत वैश्विक तकनीकी नेतृत्व प्राप्त कर सकता है।

मुख्य बातें

11 मई 2026 को वाइस-रीगल लॉज , नई दिल्ली में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 का आयोजन किया गया।
अविनाश चंद्र पांडेय ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वैज्ञानिक नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष जोर दिया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ' दिल्ली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद ' की स्थापना की योजना का उल्लेख किया।
भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन विज्ञान प्रतिभा खोज परीक्षा ' विद्यार्थी विज्ञान मंथन ' की पुस्तिका का विमोचन किया गया।
उपराज्यपाल सरदार तरणजीत सिंह संधू ने शिक्षा, सरकार और उद्योग के बीच सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

नई दिल्ली, 11 मई 2026 को इंद्रप्रस्थ विज्ञान भारती और दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त आयोजन में वाइस-रीगल लॉज में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 का एक व्यापक समारोह संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, विद्यार्थियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक परिवर्तन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया।

वैज्ञानिक नवाचार पर केंद्रित मुख्य संदेश

समारोह के उद्घाटन सत्र में इंद्रप्रस्थ विज्ञान भारती के अध्यक्ष एवं इंटर-यूनिवर्सिटी एक्सीलरेटर सेंटर के निदेशक प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वैज्ञानिक नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष जोर दिया। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय महासचिव विवेकानंद पाई ने सभा को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक प्रगति को राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

दिल्ली का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद

कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का विशेष वीडियो संदेश प्रस्तुत किया गया। उन्होंने स्थानीय शहरी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर नवाचार विकसित करने के उद्देश्य से 'दिल्ली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद' की स्थापना की योजना का उल्लेख किया। नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोवर्धन दास ने भारत की तकनीकी प्रगति और नवाचार-आधारित सुशासन की भूमिका पर प्रकाश डाला।

पैनल चर्चा और विशेषज्ञ विचार

समारोह का एक प्रमुख आकर्षण 'विश्व स्तरीय राजधानी के रूप में दिल्ली: एक वैश्विक मॉडल' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा रही, जिसमें प्रो. एमएम त्रिपाठी, प्रो. रंजना अग्रवाल, प्रो. एके भागी और डॉ. सचिन घुडे सहित अनेक विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस चर्चा में सतत शहरी विकास, जलवायु अनुकूलन, तकनीकी अवसंरचना और भविष्य-केंद्रित शहरों के लिए वैज्ञानिक नीति निर्माण जैसे विषयों पर विस्तृत विचार व्यक्त किए गए।

परमाणु प्रौद्योगिकी में भारत की उपलब्धियाँ

इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र के पूर्व निदेशक चंद्रशेखर गौरिनाथ करहाडकर ने 'वैज्ञानिक उत्कृष्टता से सामाजिक प्रभाव तक परमाणु प्रौद्योगिकी में भारत की यात्रा' विषय पर एक विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने भारत की परमाणु क्षमताओं और उनके सामाजिक अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की।

विज्ञान संचार और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र

एक अन्य महत्वपूर्ण पैनल चर्चा 'क्रिस्टलाइजिंग प्रोग्रेसः दिल्ली विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की भूमिका' विषय पर आयोजित की गई, जिसमें प्रो. शेखर सी. मांडे, डॉ. अनिल कोठारी और डॉ. अनीता अग्रवाल सहित कई प्रमुख वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। चर्चा में विज्ञान संचार, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और प्रौद्योगिकी-आधारित सामाजिक सशक्तिकरण को मजबूत करने पर बल दिया गया।

उपराज्यपाल का समापन संबोधन

समारोह के समापन सत्र में बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार, विज्ञान भारती के प्रवीण रामदास और प्रो. योगेश सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरणजीत सिंह संधू ने समापन संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा जगत, सरकार और उद्योग जगत के बीच सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

उपराज्यपाल ने कहा कि सतत विकास और आत्मनिर्भरता केवल मजबूत शोध पारिस्थितिकी तंत्र, दूरदर्शी नीति निर्माण और दीर्घकालिक संस्थागत प्रतिबद्धता के माध्यम से ही संभव है।

विद्यार्थी विज्ञान मंथन परीक्षा का विमोचन

उद्घाटन सत्र के दौरान भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन विज्ञान प्रतिभा खोज परीक्षा 'विद्यार्थी विज्ञान मंथन' की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया, जिसका उद्देश्य युवा वैज्ञानिक प्रतिभा को पहचानना और पोषित करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकारी घोषणाओं और नीति-निर्माण से लेकर वास्तविक कार्यान्वयन तक का अंतर भारत के अनेक विज्ञान पहलों में देखा गया है। दिल्ली विज्ञान परिषद, 'विद्यार्थी विज्ञान मंथन' जैसी पहलें सराहनीय हैं, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ये संस्थान स्थानीय समस्याओं — स्वास्थ्य निगरानी, जल प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण — के लिए वास्तविक, सत्यापन-योग्य समाधान तक पहुँचते हैं। भारत के वैज्ञानिक संस्थान विश्व-स्तरीय अनुसंधान करते हैं, किंतु उस ज्ञान का समाज तक पहुँचना अक्सर विलंबित होता है। जब तक शोध से सामाजिक प्रभाव का सीधा संबंध नहीं होता, तब तक ये समारोह केवल प्रतीकात्मक ही रहेंगे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 का समारोह कहाँ आयोजित किया गया?
समारोह 11 मई 2026 को नई दिल्ली के वाइस-रीगल लॉज में इंद्रप्रस्थ विज्ञान भारती और दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त आयोजन में किया गया। इसमें देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों ने भाग लिया।
प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने समारोह में क्या मुख्य संदेश दिया?
प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय , जो इंद्रप्रस्थ विज्ञान भारती के अध्यक्ष हैं, ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में वैज्ञानिक नवाचार की महत्वपूर्ण और केंद्रीय भूमिका पर विशेष जोर दिया।
दिल्ली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद क्या है?
यह दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा स्थापना की जाने वाली एक नई परिषद है, जिसका उद्देश्य स्थानीय शहरी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक नवाचार विकसित करना है।
विद्यार्थी विज्ञान मंथन परीक्षा क्या है?
यह भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन विज्ञान प्रतिभा खोज परीक्षा है, जिसकी पुस्तिका समारोह के उद्घाटन सत्र में विमोचित की गई। इसका उद्देश्य युवा वैज्ञानिक प्रतिभा को पहचानना और पोषित करना है।
उपराज्यपाल सरदार तरणजीत सिंह संधू ने अपने संबोधन में क्या कहा?
उपराज्यपाल ने कहा कि भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा जगत, सरकार और उद्योग जगत के बीच सहयोगात्मक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने सतत विकास और आत्मनिर्भरता के लिए मजबूत शोध पारिस्थितिकी तंत्र, दूरदर्शी नीति निर्माण और दीर्घकालिक संस्थागत प्रतिबद्धता पर बल दिया।
राष्ट्र प्रेस