कैसे ‘स्पेस नेटवर्क’ अंतरिक्ष में संचार का काम करता है, जानें वैज्ञानिक डेटा की पृथ्वी पर पहुंचने की प्रक्रिया
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अंतरिक्ष में कार्यरत एस्ट्रोनॉट्स और पृथ्वी पर स्थित उनके सहयोगियों के बीच लगातार संचार बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इस उद्देश्य के लिए वैज्ञानिकों ने ‘स्पेस नेटवर्क’ नामक एक अत्याधुनिक संचार प्रणाली का विकास किया है। यह नेटवर्क अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के साथ जुड़े रहने में सहायक है।
सबसे पहले, यह जानना महत्वपूर्ण है कि स्पेस नेटवर्क क्या है? इस नेटवर्क में ट्रैकिंग और डेटा रिले सैटेलाइट (टीडीआरएस) का एक समूह शामिल है। ये सैटेलाइट पृथ्वी से लगभग 35 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थित होते हैं और अंतरिक्ष में सेल टावर की तरह कार्य करते हैं। स्पेस स्टेशन अपनी कक्षा में कहीं भी हो, टीडीआरएस सैटेलाइट से संपर्क स्थापित कर सकता है।
जब स्पेस स्टेशन पर कोई अंतरिक्ष यात्री मिशन कंट्रोल को डेटा, वीडियो या ऑडियो भेजना चाहता है, तो स्टेशन का कंप्यूटर उस डेटा को रेडियो सिग्नल में परिवर्तित कर देता है। यह सिग्नल स्टेशन के एंटीना के माध्यम से टीडीआरएस सैटेलाइट तक पहुंचता है। इसके बाद, टीडीआरएस इसे न्यू मैक्सिको के व्हाइट सैंड्स कॉम्प्लेक्स तक रिले करता है, जहां से सिग्नल लैंडलाइन के जरिए ह्यूस्टन भेजा जाता है। यह पूरी प्रक्रिया मिलीसेकंड में पूरी होती है, जिससे बातचीत में कोई देरी नहीं होती।
अब सवाल यह है कि वैज्ञानिक प्रयोगों का डेटा पृथ्वी पर कैसे भेजा जाता है? अंतरिक्ष यात्री स्पेस स्टेशन पर भौतिकी, जीव विज्ञान, खगोल विज्ञान, और मौसम विज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण प्रयोग करते हैं। इन प्रयोगों से प्राप्त वैज्ञानिक डेटा भी इसी स्पेस नेटवर्क के माध्यम से पृथ्वी पर भेजा जाता है। डेटा को रेडियो सिग्नल में बदलकर टीडीआरएस सैटेलाइट तक भेजा जाता है, फिर व्हाइट सैंड्स और ह्यूस्टन होते हुए इसे वैज्ञानिकों तक पहुंचाया जाता है। इस प्रणाली की मदद से वैज्ञानिक लगभग रीयल टाइम में डेटा प्राप्त करते हैं।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा इस नेटवर्क का उपयोग शैक्षिक कार्यक्रमों के लिए भी करती है। अंतरिक्ष यात्री वीडियो और वॉइस कॉल के माध्यम से स्कूल के बच्चों के सवालों का उत्तर देते हैं। जब यह नेटवर्क उपलब्ध नहीं था, अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से केवल 15 मिनट तक ही संपर्क कर पाते थे। अब लगभग हर समय संपर्क बना रहता है। स्पेस नेटवर्क का प्रबंधन नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर (मैरीलैंड) द्वारा किया जाता है, जबकि इसकी रणनीतिक देखरेख स्कैन प्रोग्राम ऑफिस के पास है।