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स्पेसवॉक में एस्ट्रोनॉट्स टेथर रस्सी से क्यों बंधे रहते हैं? माइक्रोग्रैविटी का यह खतरा जानिए

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स्पेसवॉक में एस्ट्रोनॉट्स टेथर रस्सी से क्यों बंधे रहते हैं? माइक्रोग्रैविटी का यह खतरा जानिए

सारांश

अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी की स्थिति में एक छोटा-सा धक्का भी एस्ट्रोनॉट को अनियंत्रित घुमाव में डाल सकता है — और 2 फीट की दूरी तय करना भी असंभव हो सकता है। टेथर रस्सी इसीलिए स्पेसवॉक का सबसे ज़रूरी सुरक्षा नियम है।

मुख्य बातें

माइक्रोग्रैविटी में गुरुत्वाकर्षण समाप्त नहीं होता — स्पेसक्राफ्ट और एस्ट्रोनॉट दोनों एक साथ मुक्त गिरावट में होते हैं।
अंतरिक्ष में बिना सतह के धकेले गति या दिशा नियंत्रित करना संभव नहीं; मात्र 2 फीट की दूरी तय करना भी असंभव हो सकता है।
टेथर (सुरक्षा रस्सी) एस्ट्रोनॉट को स्पेस स्टेशन से जोड़े रखती है और गति नियंत्रण में भी सहायक है।
एस्ट्रोनॉट्स के पास मुख्य टेथर के अलावा बैकअप रस्सियाँ भी होती हैं।
अंतरिक्ष एजेंसियाँ स्पेसवॉक को अत्यंत जोखिम भरा कार्य मानती हैं; टेथर से बंधे रहना अनिवार्य नियम है।

अंतरिक्ष में स्पेसवॉक के दौरान एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन से एक मज़बूत सुरक्षा रस्सी — जिसे टेथर कहते हैं — से बाँधे रखना अनिवार्य होता है। इसकी मूल वजह माइक्रोग्रैविटी की वह अनोखी भौतिक स्थिति है, जिसमें गति पर नियंत्रण पृथ्वी की तुलना में बिल्कुल अलग तरीके से काम करता है। बिना टेथर के एस्ट्रोनॉट अनियंत्रित रूप से अंतरिक्ष में बह सकता है — और वापस लौटना लगभग असंभव हो सकता है।

माइक्रोग्रैविटी में गति का विज्ञान

पृथ्वी पर हम ज़मीन को पैरों से धकेलकर आगे बढ़ते हैं, लेकिन अंतरिक्ष में यह सुविधा नहीं होती। वहाँ गुरुत्वाकर्षण समाप्त नहीं होता — बल्कि स्पेसक्राफ्ट और उसमें मौजूद हर वस्तु पृथ्वी के चारों ओर एक साथ मुक्त गिरावट (free fall) की अवस्था में होती है। इसी कारण एस्ट्रोनॉट्स को भारहीनता का अनुभव होता है और 'ऊपर' व 'नीचे' का कोई बोध नहीं रहता।

अंतरिक्ष में हिलने-डुलने के लिए किसी सतह को धकेलना या खींचना ज़रूरी है। यदि कोई सतह उपलब्ध न हो, तो बल या टॉर्क उत्पन्न करना संभव नहीं होता और गति पर नियंत्रण पूरी तरह छूट जाता है।

न्यूटन के नियम और असली ख़तरा

न्यूटन के गति के नियम अंतरिक्ष में पूर्ण रूप से लागू होते हैं। एस्ट्रोनॉट्स के अनुभव बताते हैं कि स्पेसवॉक के दौरान यदि हाथ या पैर से हल्का-सा भी धक्का लग जाए और कोई सहारा न हो, तो मात्र 2 फीट की दूरी तय करना भी असंभव हो सकता है। एक बार अनियंत्रित घुमाव शुरू हो जाए, तो बिना किसी बाहरी सहारे के रुकना बेहद कठिन हो जाता है।

यही वह बिंदु है जहाँ टेथर की भूमिका केवल 'रस्सी' से कहीं अधिक हो जाती है — यह एस्ट्रोनॉट की गति और दिशा दोनों को नियंत्रित रखने का एकमात्र विश्वसनीय साधन है।

टेथर प्रणाली कैसे काम करती है

सुरक्षा के दृष्टिकोण से एस्ट्रोनॉट्स के पास मुख्य टेथर के साथ-साथ बैकअप रस्सियाँ भी होती हैं। यदि किसी कारण मुख्य रस्सी छूट जाए, तो बैकअप तंत्र उन्हें स्पेस स्टेशन से जोड़े रखता है। यह व्यवस्था केवल 'खो जाने' से बचाने तक सीमित नहीं है — यह गति नियंत्रण का सक्रिय उपकरण भी है।

अंतरिक्ष एजेंसियाँ स्पेसवॉक को अत्यंत जोखिम भरा कार्य मानती हैं। छोटी-सी चूक एस्ट्रोनॉट को ऐसी अनियंत्रित स्थिति में डाल सकती है जहाँ से वापसी संभव न हो। इसीलिए टेथर से बंधे रहना स्पेसवॉक का सबसे बुनियादी और अनिवार्य सुरक्षा नियम है।

स्पेसवॉक पर इसका व्यावहारिक असर

टेथर प्रणाली एस्ट्रोनॉट्स को न केवल सुरक्षित रखती है, बल्कि उन्हें स्पेस स्टेशन के बाहर जटिल मरम्मत कार्य, वैज्ञानिक प्रयोग और उपकरण स्थापना जैसे कार्य आत्मविश्वास के साथ करने की सुविधा भी देती है। यह व्यवस्था मानव अंतरिक्ष अभियानों की सुरक्षा वास्तुकला का एक अभिन्न हिस्सा है।

गौरतलब है कि जैसे-जैसे अंतरिक्ष मिशन और अधिक महत्वाकांक्षी होते जा रहे हैं — चंद्रमा और मंगल तक — स्पेसवॉक सुरक्षा प्रणालियों को और अधिक उन्नत बनाने पर शोध जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन माइक्रोग्रैविटी की भौतिक वास्तविकता को शायद ही समझाती है। न्यूटन के नियमों का यह व्यावहारिक प्रयोग — जहाँ एक छोटा धक्का जानलेवा हो सकता है — आम पाठक के लिए अंतरिक्ष विज्ञान को सुलभ बनाने का अवसर है। जैसे-जैसे भारत का गगनयान मिशन आकार ले रहा है, इस तरह की बुनियादी वैज्ञानिक साक्षरता भारतीय दर्शकों के लिए और भी प्रासंगिक हो जाती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्पेसवॉक के दौरान एस्ट्रोनॉट्स टेथर रस्सी से क्यों बंधे रहते हैं?
माइक्रोग्रैविटी में किसी सतह के बिना गति नियंत्रित करना असंभव होता है, इसलिए एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन से टेथर रस्सी से बाँधा जाता है। यह रस्सी उन्हें अनियंत्रित रूप से अंतरिक्ष में बह जाने से बचाती है और गति नियंत्रण में भी मदद करती है।
माइक्रोग्रैविटी क्या होती है और यह एस्ट्रोनॉट्स को कैसे प्रभावित करती है?
माइक्रोग्रैविटी वह स्थिति है जिसमें स्पेसक्राफ्ट और उसमें मौजूद सब कुछ पृथ्वी के चारों ओर एक साथ मुक्त गिरावट में होता है, जिससे भारहीनता का अनुभव होता है। इस स्थिति में 'ऊपर' और 'नीचे' का कोई बोध नहीं रहता और हिलने-डुलने के लिए किसी सतह को धकेलना या खींचना ज़रूरी होता है।
क्या टेथर टूट जाए तो एस्ट्रोनॉट का क्या होगा?
इसी संभावना को देखते हुए एस्ट्रोनॉट्स के पास मुख्य टेथर के अलावा बैकअप रस्सियाँ भी होती हैं। यदि मुख्य रस्सी किसी कारण से छूट जाए, तो बैकअप तंत्र उन्हें स्पेस स्टेशन से जोड़े रखता है।
अंतरिक्ष में बिना टेथर के क्या खतरा होता है?
बिना टेथर के हाथ या पैर का हल्का धक्का भी एस्ट्रोनॉट को अनियंत्रित घुमाव में डाल सकता है, जिसे रोकना बेहद कठिन होता है। एस्ट्रोनॉट्स के अनुभव बताते हैं कि ऐसी स्थिति में मात्र 2 फीट की दूरी तय करना भी असंभव हो सकता है।
क्या टेथर रस्सी केवल सुरक्षा के लिए होती है?
नहीं, टेथर रस्सी केवल एस्ट्रोनॉट को 'खो जाने' से बचाने तक सीमित नहीं है — यह गति नियंत्रण का सक्रिय साधन भी है। इसकी मदद से एस्ट्रोनॉट स्पेस स्टेशन के बाहर जटिल मरम्मत और वैज्ञानिक प्रयोग आत्मविश्वास के साथ कर पाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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