22 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आरती साहा: इंग्लिश चैनल पार करने वाली पहली एशियन महिला, भारत की सबसे युवा ओलंपियन की अमर गाथा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आरती साहा: इंग्लिश चैनल पार करने वाली पहली एशियन महिला, भारत की सबसे युवा ओलंपियन की अमर गाथा

सारांश

महज 11 वर्ष की उम्र में ओलंपिक और 19 वर्ष में इंग्लिश चैनल — आरती साहा की कहानी सिर्फ रिकॉर्ड की नहीं, उस अदम्य साहस की है जिसने एक कोलकाता की बच्ची को एशिया की पहली चैनल-विजेता महिला बना दिया। पद्मश्री पाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी की यह विरासत आज भी अटूट है।

मुख्य बातें

आरती साहा का जन्म 24 सितंबर 1940 को कोलकाता में हुआ; उन्होंने 4 वर्ष की उम्र में तैराकी शुरू की।
1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में 11 वर्ष 10 माह की उम्र में भाग लेकर वह सबसे युवा भारतीय ओलंपियन बनीं।
29 सितंबर 1959 को 16 घंटे 20 मिनट में 42 मील तैरकर इंग्लिश चैनल पार करने वाली पहली एशियन महिला बनीं।
भारत सरकार ने 1960 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया — यह सम्मान पाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी ।
23 अगस्त 1994 को निधन; 1998 में भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया।

आरती साहा — यह नाम भारतीय खेल इतिहास में उस साहस और संकल्प का प्रतीक है, जिसने एक छोटी बच्ची को विश्व मंच पर अजेय बना दिया। 24 सितंबर 1940 को कोलकाता में जन्मी आरती ने महज 4 वर्ष की आयु में तैराकी का पहला कदम उठाया और 5 वर्ष की उम्र में अपनी पहली प्रतियोगिता जीत ली। दशकों बाद भी उनकी उपलब्धियाँ भारतीय खेल जगत को प्रेरणा देती हैं।

प्रारंभिक जीवन और प्रशिक्षण

आरती साहा ने एशियन गेम्स चैंपियन और ओलंपियन सचिन नाग के मार्गदर्शन में तैराकी की बारीकियाँ सीखीं। यह वही दौर था जब भारत में महिला खिलाड़ियों के लिए पेशेवर प्रशिक्षण के अवसर अत्यंत सीमित थे। इसके बावजूद आरती ने घरेलू स्तर पर एक के बाद एक प्रतियोगिताएँ जीतीं। 1951 में उन्होंने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया, जो उनके ओलंपिक सफर की नींव बनी।

ओलंपिक में ऐतिहासिक उपस्थिति

1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में आरती साहा को भारतीय दल में स्थान मिला। उस समय उनकी आयु केवल 11 वर्ष 10 माह थी, जिसने उन्हें ओलंपिक में भाग लेने वाली सबसे युवा भारतीय खिलाड़ी बना दिया — यह रिकॉर्ड आज भी अटूट है। उन्होंने महिलाओं की 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक हीट में 3:40.8 सेकंड का समय निकाला और हीट में छठे स्थान पर रहीं। वह सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकीं, किंतु इस उम्र में ओलंपिक मंच पर उतरना ही अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि थी।

इंग्लिश चैनल विजय — एशिया की पहली महिला

आरती साहा की सबसे बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि 29 सितंबर 1959 को आई, जब उन्होंने इंग्लिश चैनल पार करने का दूसरा प्रयास किया। अगस्त 1959 का पहला प्रयास सफल नहीं रहा था, लेकिन आरती ने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में उन्होंने 16 घंटे 20 मिनट तक अथक तैराकी करते हुए 42 मील की दूरी तय की और इंग्लिश चैनल पार किया। यह ऐसे समय में आया जब एशिया की कोई भी महिला यह कारनामा नहीं कर पाई थी। आरती इंग्लिश चैनल पार करने वाली पहली एशियन महिला एथलीट बनीं — एक ऐसा कीर्तिमान जो उन्हें विश्व तैराकी के इतिहास में अमर कर गया।

राष्ट्रीय सम्मान और विरासत

भारत सरकार ने 1960 में आरती साहा को पद्मश्री से सम्मानित किया। वह यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान पाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। गौरतलब है कि उस युग में महिला एथलीटों को राष्ट्रीय मान्यता मिलना अत्यंत दुर्लभ था। 23 अगस्त 1994 को उनका निधन हो गया। उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए भारत सरकार ने 1998 में उनके सम्मान में एक विशेष डाक टिकट जारी किया।

आरती साहा की प्रेरणादायक विरासत

आरती साहा का जीवन उस भारत की कहानी है जहाँ साधनों की कमी के बावजूद इरादे अटल रहे। एक दशक से भी कम उम्र में राष्ट्रीय रिकॉर्ड, फिर ओलंपिक और अंततः इंग्लिश चैनल विजय — यह यात्रा आज भी भारत की हर युवा खिलाड़ी के लिए एक मशाल की तरह जलती है। उनकी विरासत केवल रिकॉर्ड की नहीं, बल्कि उस साहस की है जो हर बाधा को अवसर में बदल देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी मुख्यधारा की स्मृति में वह उपेक्षित रहीं। पद्मश्री मिला, डाक टिकट जारी हुआ, लेकिन राष्ट्रीय खेल पाठ्यक्रम में उनका नाम आज भी हाशिये पर है। जब भारत महिला खेलों में निवेश की बात करता है, तो आरती साहा जैसी अग्रदूतों की विरासत को केवल स्मारक नहीं, बल्कि नीतिगत प्रेरणा बनाने की ज़रूरत है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरती साहा कौन थीं और वह क्यों प्रसिद्ध हैं?
आरती साहा एक भारतीय तैराक थीं जो इंग्लिश चैनल पार करने वाली पहली एशियन महिला और भारत की सबसे युवा ओलंपियन के रूप में प्रसिद्ध हैं। उनका जन्म 24 सितंबर 1940 को कोलकाता में हुआ था और उन्होंने 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में मात्र 11 वर्ष 10 माह की उम्र में भाग लिया था।
आरती साहा ने इंग्लिश चैनल कब और कितने समय में पार किया?
आरती साहा ने 29 सितंबर 1959 को अपने दूसरे प्रयास में इंग्लिश चैनल पार किया। उन्होंने 16 घंटे 20 मिनट में 42 मील की दूरी तैरकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। अगस्त 1959 का उनका पहला प्रयास सफल नहीं हो पाया था।
आरती साहा को पद्मश्री कब मिला?
भारत सरकार ने आरती साहा को 1960 में पद्मश्री से सम्मानित किया। वह यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान पाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी थीं।
आरती साहा के कोच कौन थे?
आरती साहा ने एशियन गेम्स चैंपियन और ओलंपियन सचिन नाग के मार्गदर्शन में तैराकी की बारीकियाँ सीखीं। सचिन नाग के प्रशिक्षण में ही आरती ने 1951 में 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।
आरती साहा का निधन कब हुआ और उनकी स्मृति में क्या किया गया?
आरती साहा का निधन 23 अगस्त 1994 को हुआ। उनकी स्मृति को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने 1998 में उनके नाम पर एक विशेष डाक टिकट जारी किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले