अनाहत सिंह ने 8 बार की वर्ल्ड चैंपियन नूर एलशेरबिनी को हराया, सिलिकॉन वैली ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुँचीं
सारांश
मुख्य बातें
भारत की स्क्वैश स्टार अनाहत सिंह ने 22 अक्टूबर 2026 को रेडवुड सिटी (अमेरिका) में जारी सिलिकॉन वैली ओपन स्क्वैश टूर्नामेंट के दूसरे राउंड में मिस्र की 8 बार की वर्ल्ड चैंपियन नूर एलशेरबिनी को सीधे गेमों में पराजित कर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। 18 वर्षीया अनाहत की यह जीत उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
मैच का विवरण
वर्ल्ड नंबर 15 अनाहत ने USD 1,43,500 के इस PSA गोल्ड इवेंट में टॉप सीड और वर्ल्ड नंबर 3 एलशेरबिनी को महज 30 मिनट में 11-8, 11-8, 11-7 के स्कोर से हराया। तीनों गेम में अनाहत का खेल एकसमान और दबाव-मुक्त रहा, जो किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए असाधारण परिपक्वता का संकेत है।
गौरतलब है कि एलशेरबिनी महिला स्क्वैश की सबसे सफल खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं और उनके खिलाफ यह जीत वैश्विक स्तर पर अनाहत की रैंकिंग और प्रतिष्ठा दोनों को नई ऊँचाई पर ले जाएगी।
अनाहत की प्रतिक्रिया
जीत के बाद अनाहत ने कहा, 'मैं उनका हर एक मैच देखकर बड़ी हुई हूँ। मैं वो सब हासिल करना चाहती हूँ, जो उन्होंने अपने करियर में किया है। वे सभी स्क्वैश प्लेयर्स के लिए प्रेरणा हैं। उनके साथ कोर्ट साझा करने का मौका मुझे पहली बार मिला। मुझे उम्मीद नहीं थी कि यह इस तरह होगा। मुझे लगा कि मुझे सेटल होने और उनके साथ खेल को समझने में थोड़ा समय लगेगा। लेकिन मेरा गेम प्लान अच्छा काम कर गया।'
यह ऐसे समय में आया है जब अनाहत पिछले कुछ महीनों से लगातार बड़े मंचों पर अपनी छाप छोड़ रही हैं और उनका प्रदर्शन ऊपर की ओर जाता दिख रहा है।
अगला मुकाबला
अनाहत का क्वार्टर फाइनल में सामना मिस्र की ही वर्ल्ड नंबर 14 सलमा हनी से होगा। यह भी एक कड़ी चुनौती होगी, लेकिन एलशेरबिनी पर मिली जीत के बाद अनाहत का आत्मविश्वास चरम पर होगा।
अनाहत की उपलब्धियाँ
पिछले महीने एशियन गेम्स 2026 में अनाहत स्क्वैश सिंगल्स फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, हालाँकि फाइनल में मलेशिया की सिवासंगरी सुब्रमण्यम से हार के बाद उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
हांग्जो एशियन गेम्स 2023 में उन्होंने महिला टीम और मिक्स्ड डबल्स इवेंट में दो ब्रॉन्ज मेडल जीते थे। इस साल की शुरुआत में वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप 2026 में उन्होंने लड़कियों का एकल खिताब जीता और यह खिताब हासिल करने वाली पहली भारतीय बनीं — इस जीत ने इस इवेंट में मिस्र का 15 साल का वर्चस्व समाप्त किया।
भारतीय स्क्वैश का उभरता भविष्य
अनाहत सिंह तेज़ी से वैश्विक स्क्वैश की एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रही हैं। 18 वर्ष की उम्र में वर्ल्ड नंबर 3 को हराना यह साबित करता है कि भारतीय स्क्वैश एक नए युग की दहलीज़ पर है। आने वाले सीज़न में उनकी विश्व रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार की संभावना है।