एशियन गेम्स 2026: अनाहत सिंह फाइनल में, स्क्वैश के एशियाई फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने 26 सितंबर 2026 को नागोया में एशियन गेम्स 2026 के महिला सिंगल्स सेमीफाइनल में जापान की विश्व रैंकिंग में छठे स्थान की खिलाड़ी सतोमी वातानाबे को 3-2 (9-11, 11-13, 12-10, 11-6, 11-3) से पराजित कर ऐतिहासिक फाइनल में प्रवेश किया। 18 वर्षीया अनाहत एशियाई खेलों के महिला सिंगल्स स्क्वैश फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं और उनका कम से कम रजत पदक सुनिश्चित हो चुका है।
रोमांचक मुकाबले का घटनाक्रम
शुरुआती दो गेम 9-11 और 11-13 से गँवाने के बाद अनाहत पर दबाव बेहद बढ़ गया था। तीसरे गेम में 8-10 से पिछड़ने के बावजूद उन्होंने जबरदस्त मानसिक दृढ़ता दिखाते हुए गेम 12-10 से अपने नाम किया और वापसी का संकेत दिया।
चौथे गेम में 8-6 से पिछड़ने के बाद उन्होंने लगातार पाँच अंक जीतकर गेम 11-6 से जीता और मुकाबले को 2-2 की बराबरी पर ला दिया। निर्णायक पाँचवें गेम में अनाहत ने वातानाबे को कोई मौका नहीं दिया और 11-3 के एकतरफा स्कोर से जीतकर फाइनल में जगह पक्की की।
ऐतिहासिक उपलब्धि का महत्व
यह केवल एक खेल की जीत नहीं है — यह भारतीय महिला स्क्वैश के लिए एक मील का पत्थर है। इससे पहले कोई भी भारतीय महिला एशियाई खेलों के स्क्वैश सिंगल्स फाइनल तक नहीं पहुँची थी। गौरतलब है कि अनाहत पिछले एशियन गेम्स में महिला और मिक्स्ड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली टीम का भी हिस्सा रह चुकी हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय स्क्वैश का स्तर अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार ऊँचा हो रहा है, और युवा पीढ़ी के खिलाड़ी अनुभवी प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती देने में सक्षम हो रहे हैं।
ओलंपिक कोटे का दांव
फाइनल की अहमियत महज पदक तक सीमित नहीं है। एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने पर खिलाड़ी को लॉस एंजिल्स ओलंपिक में सीधे प्रवेश मिलता है। इस तरह अनाहत के सामने एकसाथ महाद्वीपीय खिताब और ओलंपिक टिकट का दोहरा मौका है — यह दाँव इस फाइनल को भारतीय खेल इतिहास में और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज से संतोष
उधर, भारत की मिक्स्ड डबल्स जोड़ी जोशना चिनप्पा और वेलवन सेंथिलकुमार को सेमीफाइनल में हांगकांग, चीन की जोड़ी ली का यी और तांग मिंग होंग के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बावजूद दोनों खिलाड़ी ब्रॉन्ज मेडल के साथ अपना अभियान समाप्त करेंगे, जो भारतीय स्क्वैश के लिए एक और सम्मानजनक उपलब्धि है।
आगे क्या
अनाहत सिंह अब महिला सिंगल्स फाइनल में उतरेंगी, जहाँ उनका मुकाबला एशिया की किसी अन्य शीर्ष खिलाड़ी से होगा। यदि वह गोल्ड जीतती हैं, तो न केवल एशियाई चैंपियन बनेंगी बल्कि 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए भारत का कोटा भी सुनिश्चित करेंगी। भारतीय स्क्वैश की यह नई पीढ़ी आने वाले वर्षों में और बड़े मंच पर दस्तक देने को तैयार दिखती है।