अरिहा पंगमबम ने एशियन एयरोबिक जिम्नास्टिक्स में रचा इतिहास, 19.100 अंकों के साथ जीता गोल्ड
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय एयरोबिक जिम्नास्ट अरिहा पंगमबम ने एशियन एयरोबिक जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप की सीनियर महिला व्यक्तिगत श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया — वह इस प्रतिष्ठित खिताब को अपने नाम करने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। फिलीपींस में आयोजित फाइनल में 22 वर्षीय अरिहा ने 19.100 अंक हासिल किए, जिसमें आर्टिस्ट्री में 8.650, एग्जीक्यूशन में 7.600 और डिफिकल्टी में 2.850 अंक शामिल थे।
पोडियम पर राष्ट्रगान — एक ऐतिहासिक पल
स्वर्ण पदक जीतने के बाद अरिहा ने अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा, 'जब मुझे यह गोल्ड मेडल मिला, तो वह पल बहुत शानदार था। मैं इसे शब्दों में बयां भी नहीं कर सकती।' उन्होंने बताया कि पोडियम पर भारत का राष्ट्रगान बजते सुनना उनके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव था। 'जब मैंने पोडियम पर अपने देश का राष्ट्रगान बजते हुए सुना, तो उस पल मुझे गर्व भी महसूस हुआ क्योंकि मैं कुछ हासिल कर पाई थी, सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए।'
अरिहा ने आगे कहा कि इससे पहले वह और उनके साथी केवल दूसरे देशों के राष्ट्रगान सुनते आए थे और मन में यह सवाल उठता था कि पोडियम पर भारत का राष्ट्रगान कब बजेगा। 'तो जब इस साल मुझे मेडल मिला और हमारा राष्ट्रगान बजा, तो वह वाकई बहुत शानदार अनुभव था। यह न सिर्फ मेरे लिए, बल्कि हमारी पूरी टीम के लिए एक बहुत बड़ा पल था।'
इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती
अरिहा ने भारतीय जिम्नास्टों के सामने आने वाली बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी खुलकर जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एयरोबिक जिम्नास्टिक्स में डबल फ्लेक्स फ्लोर (लकड़ी का फ्लोर) पर प्रतिस्पर्धा होती है, लेकिन भारत में उत्तराखंड में केवल एक ऐसा फ्लोर है जो नेशनल गेम्स के दौरान उपलब्ध हुआ था। 'दुर्भाग्य से, न सिर्फ मैं, बल्कि पूरे भारत के ज्यादातर जिम्नास्ट उस पर ट्रेनिंग भी नहीं कर पाए।'
उन्होंने बताया कि अधिकांश भारतीय जिम्नास्ट रबड़ इंटरलॉकिंग मैट पर अभ्यास करते हैं और प्रतियोगिता से पहले केवल एक दिन की पोडियम ट्रेनिंग मिलती है। 'सिर्फ एक दिन में तालमेल बिठाना हमारे लिए बहुत मुश्किल होता है। यही वह मुश्किल थी जिसका हमने सामना किया।'
कोच और परिवार का योगदान
अरिहा ने अपने कोच की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि कोच ने न केवल जिम्नास्टिक्स की तकनीकी बारीकियाँ सिखाईं, बल्कि बायोमैकेनिक्स और एनाटॉमिकल टर्म्स की भी जानकारी दी ताकि वह अपने प्रदर्शन को गहराई से समझ सकें। 'उन्होंने सफल एथलीट्स की कई कहानियाँ सुनाकर हमें मोटिवेट भी किया।'
प्रतियोगिता के दौरान परिवार वहाँ मौजूद नहीं था, लेकिन अरिहा की बहन उसी श्रेणी में प्रतिस्पर्धा में शामिल थीं। माता-पिता घर पर लाइवस्ट्रीम के जरिए मैच देख रहे थे और अरिहा के फोन करने से पहले ही उन्होंने बधाई देने के लिए फोन किया।
डेलिगेशन प्रमुख की प्रतिक्रिया और भविष्य की उम्मीदें
डेलिगेशन के हेड इंदरजीत सिंह राठौर ने कहा कि जीत का अहसास शब्दों से परे था। 'जब अरिहा ने ऐसा किया, तो हमारी 49 लोगों की पूरी टीम खुशी से रो पड़ी।' उन्होंने विश्वास जताया कि एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने के बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी पदक संभव है।
राठौर ने इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी स्वीकार करते हुए कहा कि बेहतर पोडियम सुविधाओं के बिना भी खिलाड़ियों की प्रतिभा ने यह उपलब्धि दिलाई। उन्होंने सरकार और बड़ी कंपनियों से बेहतर पोडियम इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में सहयोग की अपील की, ताकि भविष्य में और अधिक पदक जीते जा सकें। अरिहा पंगमबम अब वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी में जुटी हैं, और पूरे देश की निगाहें उन पर टिकी हैं।