अरिहा पंगमबम ने एरोबिक जिम्नास्टिक में रचा इतिहास, एशियन चैंपियनशिप में भारत का पहला स्वर्ण जीता
सारांश
मुख्य बातें
अरिहा पंगमबम ने 8 अगस्त 2026 को मनीला, फिलीपींस में आयोजित एशियन एरोबिक जिम्नास्टिक चैंपियनशिप की सीनियर महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया। 19 वर्षीया इस जिम्नास्ट ने 19.100 पॉइंट्स के कुल स्कोर के साथ यह खिताब अपने नाम किया और एशियन चैंपियनशिप के इतिहास में ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।
ऐतिहासिक प्रदर्शन का ब्यौरा
फाइनल में अरिहा का कुल स्कोर 19.100 पॉइंट्स रहा, जिसमें आर्टिस्ट्री में 8.650, एग्जीक्यूशन में 7.600 और डिफिकल्टी में 2.850 पॉइंट्स शामिल थे। यह जीत केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी — यह भारतीय एरोबिक जिम्नास्टिक के 10 संस्करणों की लंबी प्रतीक्षा का अंत था, जिसमें देश अब तक इस स्तर पर स्वर्ण पदक से वंचित रहा था।
पिछली निराशा से सोने तक का सफर
अरिहा ने बताया कि पिछली एशियन चैंपियनशिप में वह महज कुछ पॉइंट्स के अंतर से चौथे स्थान पर रह गई थीं, जिसका उन्हें गहरा मलाल रहा। उसी हार ने उनके भीतर वापसी का जज्बा जगाया। उन्होंने कहा, 'पिछली एशियन चैंपियनशिप में, मैं कुछ ही पॉइंट्स से चौथे स्थान पर थी। मुझे बहुत पछतावा हुआ। इसलिए, मैंने हमेशा सोचा कि अगली बार मुझे पदक जीतना है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जिम्नास्टिक अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
प्रदर्शन की सोच और तैयारी
अरिहा ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य केवल पदक नहीं, बल्कि एक कलाकार के रूप में अपनी भावनाएं मंच पर उतारना था। उन्होंने कहा, 'पदक जीतने के बजाय, एक परफॉर्मर होने के नाते मैं हमेशा चाहती थी कि लोग, चाहे जज हों या ऑडियंस, मेरे प्रदर्शन से समझें कि मैं क्या कहना चाहती हूं।' इस लक्ष्य के लिए उन्होंने प्रतिदिन सुबह और शाम के सत्रों में लगभग छह घंटे की कठोर ट्रेनिंग की। उन्होंने अपने कोच और माता-पिता के सहयोग को भी इस सफलता का अहम हिस्सा बताया।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल की प्रतिक्रिया
50 एथलीटों के भारतीय दल के प्रमुख इंदरजीत सिंह राठौर ने इस जीत को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा, 'यह 10वीं एशियन चैंपियनशिप है। जिम्नास्टिक में ऐसा कभी नहीं हुआ कि हमारा नेशनल एंथम बजाया गया हो। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी।' राठौर ने यह भी कहा कि अरिहा बहुत कम उम्र से इस खेल में हैं और पिछले 10 वर्षों की मेहनत का यह परिणाम है।
खेल के भविष्य पर असर
राठौर के अनुसार, यह स्वर्ण पदक भारत में एरोबिक जिम्नास्टिक के प्रति जागरूकता और भागीदारी बढ़ाने में सहायक हो सकता है। गौरतलब है कि अन्य खेलों की तुलना में यह खेल भारत में अभी भी अपेक्षाकृत कम चर्चित है। उन्होंने कहा कि ऐसी बड़ी उपलब्धियाँ नए खिलाड़ियों और उनके परिवारों को इस खेल से जोड़ने का काम करती हैं। इस चैंपियनशिप में भारत ने सीनियर एयरो स्टेप श्रेणी में एक कांस्य पदक भी अपने नाम किया। अरिहा की इस जीत के बाद भारतीय एरोबिक जिम्नास्टिक का भविष्य पहले से कहीं अधिक उज्ज्वल दिखता है।