अश्मिता चालिहा का BWF कोरिया मास्टर्स सुपर 300 खिताब, फाइनल में हान कियान शी को 14-21, 21-14, 21-14 से हराया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी अश्मिता चालिहा ने रविवार, 9 अगस्त को आसन सिटी में BWF कोरिया मास्टर्स सुपर 300 टूर्नामेंट का महिला सिंगल्स खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। फाइनल में उन्होंने चीन की चौथी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी हान कियान शी को 53 मिनट में 14-21, 21-14, 21-14 से पराजित किया — यह उनके करियर का पहला BWF वर्ल्ड टूर खिताब है।
मुख्य घटनाक्रम: उलटफेर भरी जीत
पहले गेम में 9-5 की शुरुआती बढ़त गंवाने और 14-21 से गेम हारने के बाद अश्मिता ने जबरदस्त मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया। दूसरे और तीसरे गेम में उन्होंने बेहतर सटीकता और कोर्ट कवरेज के बल पर लगातार 21-14, 21-14 से जीत दर्ज की। विश्व रैंकिंग में 50वें स्थान पर काबिज 26 वर्षीय गुवाहाटी की इस खिलाड़ी ने चौथी वरीयता प्राप्त प्रतिद्वंद्वी को उसी के खेल में मात दी।
पूरे टूर्नामेंट में शानदार सफर
अश्मिता का प्रदर्शन पहले दौर से ही प्रभावशाली रहा। उन्होंने क्वालीफायर में रिरीना हिरामोतो और फिर किम मिन जी को सीधे गेम में हराया। क्वार्टर फाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त हिना अकेची को 20-22, 21-15, 21-19 से हराना उनके अभियान का निर्णायक मोड़ रहा। सेमीफाइनल में उन्होंने हमवतन रक्षिता रामराज को पराजित कर फाइनल में जगह बनाई।
भारतीय बैडमिंटन के लिए ऐतिहासिक संदर्भ
इस जीत के साथ अश्मिता इस वर्ष सुपर 300 खिताब जीतने वाली देविका सिहाग और तन्वी शर्मा के बाद तीसरी भारतीय महिला बनीं। कुल मिलाकर, वह 2025 में सिंगल्स BWF खिताब जीतने वाली चौथी भारतीय महिला हैं — इनसे पहले तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन, पीवी सिंधु ने जापान ओपन और देविका सिहाग ने थाईलैंड मास्टर्स का खिताब जीता था। पुरुष वर्ग में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने मई में सिंगापुर बैडमिंटन ओपन में पुरुष डबल्स खिताब जीता था।
चोट से वापसी और रैंकिंग में उछाल
मई में तीन महीने की चोट से उबरने के बाद अश्मिता की BWF टूर पर वापसी उल्लेखनीय रही है। चाइना मास्टर्स और मलेशिया मास्टर्स — अपने पहले दो टूर्नामेंट — में उन्होंने क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। इस वर्ष का उनका पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन जून में मकाऊ ओपन का सेमीफाइनल था, जहाँ वे दक्षिण कोरिया की पार्क गा यून से हारी थीं। कोरिया मास्टर्स की इस जीत के बाद अश्मिता पहली बार विश्व रैंकिंग के टॉप 40 में प्रवेश करेंगी — एक ऐसा मुकाम जो उनके पुनरुत्थान की कहानी को और पुख्ता करता है।