3 अक्टूबर 2026
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आइची-नागोया 2026: भारतीय ताइक्वांडो टीम पदक से चूकी, 24 साल का इंतज़ार जारी

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आइची-नागोया 2026: भारतीय ताइक्वांडो टीम पदक से चूकी, 24 साल का इंतज़ार जारी

सारांश

आइची-नागोया 2026 में एक बार फिर भारतीय ताइक्वांडो खाली हाथ लौटी। कशिश मलिक क्वार्टरफाइनल तक पहुँचीं, लेकिन पोडियम दूर रहा। 2002 बुसान में सुरेंद्र भंडारी का ब्रॉन्ज अब भी एकमात्र पदक है — 24 साल की प्रतीक्षा अधूरी है।

मुख्य बातें

भारतीय महिला ताइक्वांडो टीम — कशिश मलिक , ज्योति यादव , रूपा बेयोर — आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 से बिना पदक के लौटीं।
कशिश मलिक मिक्स्ड इंडिविजुअल वर्चुअल ताइक्वांडो के क्वार्टरफाइनल तक पहुँचीं, जो इस बार एशियन गेम्स में पहली बार शामिल था।
कशिश को पेरिस 2024 ओलंपिक चैंपियन किम यू-जिन ने -57 किग्रा वर्ग में 2-0 से हराया।
ज्योति यादव राउंड ऑफ 16 में और रूपा बेयोर सेमीफाइनल ग्रुप में पाँचवें स्थान पर रहकर बाहर हुईं।
भारत का एशियन गेम्स ताइक्वांडो में एकमात्र पदक 2002 बुसान में सुरेंद्र भंडारी का ब्रॉन्ज है — 24 साल का इंतज़ार जारी।

भारतीय ताइक्वांडो की तीन सदस्यीय महिला टीम आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 से बिना किसी पदक के लौट गई, जिससे देश का 2002 बुसान एशियन गेम्स के बाद से चला आ रहा पदक-सूखा एक और चार वर्षों के लिए बढ़ गया। 3 अक्टूबर 2026 को जापान के तोयोहाशी जिमनैजियम में प्रतियोगिता के समापन के साथ, कशिश मलिक, ज्योति यादव और रूपा बेयोर — तीनों — पोडियम फिनिश से वंचित रहीं।

मुख्य घटनाक्रम

कशिश मलिक ने भारत की ओर से सर्वाधिक आक्रामक प्रदर्शन किया और दो अलग-अलग इवेंट में उतरीं। मिक्स्ड इंडिविजुअल वर्चुअल ताइक्वांडो — जो इस बार आइची-नागोया में एशियन गेम्स में पहली बार शामिल किया गया था — में उन्होंने हांगकांग, चीन की सियू वाई लैम को 2-0 (राउंड स्कोर: 800-500 और 400-0) से हराकर क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया।

क्वार्टरफाइनल में कशिश का सामना कजाकिस्तान की रीता बाकिशेवा से हुआ। कशिश ने पहला राउंड 320-0 से जीता, परंतु बाकिशेवा ने अगले दो राउंड 460-0 और 340-0 से अपने नाम कर 2-1 से मैच पलट दिया। गौरतलब है कि बाकिशेवा ने बाद में इसी इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता।

महिलाओं के -57 किग्रा वर्ग में कशिश का सामना पेरिस 2024 ओलंपिक चैंपियन, कोरिया गणराज्य की किम यू-जिन से हुआ, जिन्होंने उन्हें 2-0 (स्कोर: 18-3, 17-2) से पराजित किया।

ज्योति और बेयोर का प्रदर्शन

ज्योति यादव महिला स्पर्धा के राउंड ऑफ 16 में बाहर हो गईं। थाईलैंड की कन्नालक चुएनचुकलिन ने उन्हें 2-0 (स्कोर: 15-4, 14-2) से हराया।

रूपा बेयोर महिला इंडिविजुअल इवेंट के सेमीफाइनल ग्रुप में 8 एथलीटों के बीच 7.6100 के स्कोर के साथ पाँचवें स्थान पर रहीं। मेडल राउंड के लिए टॉप चार में जगह बनाना ज़रूरी था, जो वे हासिल नहीं कर सकीं। वियतनाम की न्गोक तुयेत सांग चाऊ ने 7.9500 के स्कोर के साथ ग्रुप का अंतिम क्वालिफाइंग स्थान हासिल किया।

24 साल का पदक सूखा — ऐतिहासिक संदर्भ

भारत ने एशियन गेम्स में ताइक्वांडो में अब तक मात्र एक पदक जीता है — 2002 बुसान एशियन गेम्स में सुरेंद्र भंडारी का ब्रॉन्ज मेडल। यह ऐसे समय में आया है जब ताइक्वांडो सियोल 1986 से प्रत्येक एशियन गेम्स में (बीजिंग 1990 को छोड़कर) शामिल रहा है। इस दौरान एशिया की कई छोटी ताइक्वांडो शक्तियों ने भी पदक सूची में अपनी जगह बनाई है, लेकिन भारत का खाता नहीं खुला।

यह ऐसी स्थिति है जो भारतीय ताइक्वांडो के ढाँचागत विकास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। तीनों भारतीय खिलाड़ियों ने जूझकर प्रदर्शन किया, लेकिन एशिया की शीर्ष चुनौतियों के सामने अंतर साफ़ दिखा।

आगे की राह

भारतीय ताइक्वांडो टीम को अब एशियन गेम्स में पदक के लिए कम-से-कम चार साल और प्रतीक्षा करनी होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक घरेलू ढाँचे में सुधार, कोचिंग का स्तर ऊँचा करना और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र नहीं बढ़ाया जाता, तब तक पदक की राह कठिन बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ओलंपिक चैंपियन के सामने स्कोर का अंतर और बाकी दोनों खिलाड़ियों का जल्दी बाहर होना बताता है कि प्रतिस्पर्धात्मक खाई अभी गहरी है। सवाल यह है कि बिना अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र, विशेषज्ञ कोचिंग और मज़बूत चयन पाइपलाइन के, अगले चार साल क्या बदलेंगे? जब तक संरचनात्मक निवेश नहीं होता, 2030 के एशियन गेम्स में भी यही सुर्खी दोहराई जा सकती है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आइची-नागोया 2026 में भारत की ताइक्वांडो टीम ने कैसा प्रदर्शन किया?
भारत की तीन सदस्यीय महिला ताइक्वांडो टीम — कशिश मलिक, ज्योति यादव और रूपा बेयोर — कोई भी पदक नहीं जीत सकीं। कशिश क्वार्टरफाइनल तक पहुँचीं, जबकि ज्योति राउंड ऑफ 16 में और बेयोर सेमीफाइनल ग्रुप में पाँचवें स्थान पर रहीं।
भारत का एशियन गेम्स में ताइक्वांडो का आखिरी पदक कब आया था?
भारत का एशियन गेम्स ताइक्वांडो में एकमात्र पदक 2002 में बुसान, दक्षिण कोरिया में आया था, जब सुरेंद्र भंडारी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। तब से 24 साल में भारत पोडियम पर नहीं लौटा है।
कशिश मलिक का आइची-नागोया में प्रदर्शन क्या रहा?
कशिश मलिक ने दो इवेंट में हिस्सा लिया। मिक्स्ड इंडिविजुअल वर्चुअल ताइक्वांडो में उन्होंने क्वार्टरफाइनल में जगह बनाई, लेकिन कजाकिस्तान की रीता बाकिशेवा से 1-2 से हार गईं। महिला -57 किग्रा में पेरिस 2024 ओलंपिक चैंपियन किम यू-जिन ने उन्हें 2-0 से हराया।
मिक्स्ड इंडिविजुअल वर्चुअल ताइक्वांडो इवेंट क्या है?
यह एशियन गेम्स में आइची-नागोया 2026 में पहली बार शामिल किया गया नया इवेंट है। इसमें खिलाड़ी वर्चुअल फॉर्मेट में प्रतिस्पर्धा करते हैं और स्कोरिंग अंकों के आधार पर राउंड जीते जाते हैं।
भारतीय ताइक्वांडो को अगला एशियन गेम्स पदक जीतने के लिए कितना इंतज़ार करना होगा?
आइची-नागोया 2026 में पदक न जीतने के बाद, भारतीय ताइक्वांडो टीम को अगले एशियन गेम्स तक कम-से-कम चार साल और प्रतीक्षा करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कोचिंग ढाँचे और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र के बिना यह चुनौती बरकरार रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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