एशियन गेम्स सेलिंग में सिल्वर: मनु फ्रांसिस और प्रिंस नोबल का नेदुंबसेरी में जोरदार स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
एशियन गेम्स की पुरुष सेलिंग स्किफ स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतने वाले केरल के एथलीट मनु फ्रांसिस और प्रिंस नोबल कुरिशिंगल स्वदेश लौटने पर केरल के नेदुंबसेरी एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत से सराबोर हुए। 16 अक्टूबर 2026 को हुए इस स्वागत समारोह में दोनों एथलीट्स के परिजन, मित्र और वरापुझा पंचायत के अध्यक्ष विजू चुल्लीकाड विशेष रूप से उपस्थित रहे।
नौ रेसों की जंग, 23 नेट पॉइंट्स की जीत
एर्नाकुलम निवासी इस जोड़ी ने पुरुषों की सेलिंग स्किफ श्रेणी में कुल नौ रेसों में भाग लिया और 23 नेट पॉइंट्स अर्जित कर सिल्वर मेडल पर कब्ज़ा किया। तीसरे स्थान पर रही टीम के भी उतने ही अंक थे, लेकिन रेस में फिनिश की स्थिति के आधार पर मनु और प्रिंस को रजत पदक से नवाज़ा गया।
यह उपलब्धि इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि उनके ग्रुप में दो ओलंपियन शामिल थे — जिनमें से एक वर्ल्ड कप विजेता भी रह चुके हैं। ऐसे में भारतीय जोड़ी का यह प्रदर्शन सेलिंग जगत में एक साहसिक उपस्थिति दर्ज कराता है।
फाइनल में चुनौतियाँ और वापसी
दोनों एथलीट्स ने बताया कि फाइनल के दिन उन्हें चक्रवात के कारण तेज़ हवाओं, नाव में तकनीकी खराबी और कुछ छोटी-मोटी गलतियों के कारण भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बीच रेस में वे खिसककर चौथे स्थान पर आ गए थे। गौरतलब है कि अंतिम दिन की शुरुआत में उनके पास एक पॉइंट की बढ़त थी, जो तीसरी रेस के बाद पलटती दिखी। परंतु दोनों ने ट्रेनिंग और रणनीति पर भरोसा रखते हुए शानदार वापसी की और फाइनल रेस में दूसरा स्थान हासिल कर लिया।
प्रिंस नोबल का बयान
प्रिंस नोबल कुरिशिंगल ने पत्रकारों से कहा, 'हमारे ग्रुप में काफी मज़बूत प्रतियोगी थे। उनमें एक नहीं, बल्कि दो ओलंपियन शामिल थे। वे पहले ही अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व कर चुके थे और उनमें से एक ने तो वर्ल्ड कप भी जीता था। आखिरी दिन तक हम आगे चल रहे थे। तीसरी रेस के बाद हम लगभग चौथे स्थान पर खिसक गए थे, लेकिन हमें अपनी ट्रेनिंग पर पूरा भरोसा था। हमने वही करने की कोशिश की जिसकी हमने हमेशा प्रैक्टिस की थी। ईश्वर की कृपा से, हमने रेस को ऐसे मुकाम पर खत्म किया कि हमें सिल्वर मेडल मिल गया।'
खेल को बढ़ावा देने की अपील
दोनों एथलीट्स ने कहा कि सेलिंग एक अत्यंत रोमांचक खेल है, जिसमें प्रतिभाशाली युवाओं के लिए आगे बढ़ने के अनेक अवसर मौजूद हैं। उन्होंने अन्य युवाओं को इस खेल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी इस उपलब्धि ने देश और विशेष रूप से केरल को गर्व से भर दिया है। आने वाले समय में यह जोड़ी अपने प्रदर्शन को और निखारते हुए अगले बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी करेगी।