सेशेल्स स्वर्ण जयंती पर भारतीय सेना-नौसेना की परेड, INS तरकश व INS इक्षाक रहे मौजूद
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना और भारतीय नौसेना ने 29 जून 2026 को सेशेल्स की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ (स्वर्ण जयंती) के राष्ट्रीय दिवस समारोह में गौरवपूर्ण भागीदारी निभाई। पोर्ट विक्टोरिया में आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जो दोनों देशों के बीच गहरी रणनीतिक साझेदारी का स्पष्ट संकेत है।
मुख्य घटनाक्रम
असम रेजिमेंट के 32 सदस्यीय मार्चिंग दल ने समारोह में परेड की, जिसका नेतृत्व कैप्टन आर्यन एच. देओलकर ने किया। भारतीय नौसेना के मार्चिंग दल और नौसैनिक बैंड ने भी इस अवसर पर शानदार प्रस्तुति दी। यह भागीदारी विदेशी मित्र देशों के राष्ट्रीय आयोजनों में भारत की सैन्य उपस्थिति की परंपरा को आगे बढ़ाती है।
नौसैनिक पोतों की तैनाती
भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का युद्धपोत आईएनएस तरकश 26 जून 2026 को ही दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के दौरान पोर्ट विक्टोरिया पहुँच चुका था। उसके साथ स्वदेश में निर्मित सर्वेक्षण पोत आईएनएस इक्षाक भी मौजूद रहा। दोनों पोतों ने स्वर्ण जयंती समारोह में मार्चिंग दल और नौसैनिक बैंड के साथ हिस्सा लिया।
सामरिक महत्व
भारतीय नौसेना के अनुसार यह तैनाती समुद्री सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और हिंद महासागर दृष्टिकोण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और मज़बूत करती है। भारतीय युद्धपोत सेशेल्स रक्षा बलों के साथ पेशेवर संवाद और सामुदायिक गतिविधियों में भी भाग ले रहे हैं। गौरतलब है कि भारत और सेशेल्स के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण और विकास परियोजनाओं पर दशकों पुराना सहयोग रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि असम रेजिमेंट और भारतीय नौसेना के दलों की भागीदारी भारत और सेशेल्स के बीच स्थायी और मज़बूत मित्रता का एक और प्रमाण है। समारोह के दौरान भारतीय सैन्य दलों की परेड ने दोनों देशों के रक्षा संबंधों की गहराई को रेखांकित किया।
भारत-सेशेल्स संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और सेशेल्स के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जन-से-जन संबंध दशकों पुराने हैं। समय के साथ यह रिश्ता एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में विकसित हुआ है, जिसमें रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति व स्थिरता को बढ़ावा देना शामिल है। इस स्वर्ण जयंती समारोह में भारत की बहु-आयामी सैन्य उपस्थिति इस साझेदारी के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।