एशियन गेम्स 2026: साक्षी चौधरी ने पेरिस ओलंपिक कांस्य पदक विजेता विलेगास को 5 0 से हराया, प्री क्वार्टर में प्रवेश
सारांश
मुख्य बातें
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय मुक्केबाज़ साक्षी चौधरी ने 22 सितंबर 2026 को निशियो जिमनैजियम में एशियन गेम्स के अपने पहले ही मुकाबले में पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता विनर आइरा विलेगास (फिलीपींस) को 5 0 के एकमत फैसले से परास्त कर प्री क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। यह जीत साक्षी के एशियन गेम्स डेब्यू को यादगार बनाने के साथ साथ भारतीय महिला मुक्केबाज़ी के लिए एक बड़ी उपलब्धि भी है।
मुकाबले का घटनाक्रम
साक्षी ने तीनों राउंड में 10 9 के स्कोर से एकमत जीत दर्ज की। उनके सटीक और तेज़ पंच पेरिस की कांस्य पदक विजेता विलेगास के लिए संभालना मुश्किल साबित हुए। पाँचों जजों ने एकमत से साक्षी के पक्ष में फैसला सुनाया, जो उनके प्रदर्शन की श्रेष्ठता को दर्शाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय मुक्केबाज़ी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नए चेहरों की दरकार थी। साक्षी ने अपने डेब्यू पर ही एक ओलंपिक पदक विजेता को पराजित कर यह साबित कर दिया कि वे बड़े मंच के लिए तैयार हैं।
आगे की चुनौती: वर्ल्ड चैंपियन से मुकाबला
प्री क्वार्टर फाइनल में गुरुवार को साक्षी का सामना 51 किग्रा वर्ग की मौजूदा विश्व चैंपियन अलुआ बाल्किबेकोवा से होगा। यह मुकाबला साक्षी की असली परीक्षा होगी और उनकी एशियन गेम्स पदक की राह इसी बाउट से तय होगी।
साक्षी का प्रभावशाली सफर
साक्षी पहले से ही भारतीय मुक्केबाज़ी में एक उल्लेखनीय नाम बन चुकी हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल्स में दो बार की विश्व चैंपियन निकहत ज़रीन को सेमीफाइनल में और मौजूदा विश्व चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा को फाइनल में हराकर टीम में जगह बनाई थी।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में साक्षी ने फाइनल में इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को 5 0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था। गौरतलब है कि निकहत ज़रीन और मीनाक्षी हुड्डा जैसी दिग्गज मुक्केबाज़ों को ट्रायल में हराना उनकी मानसिक दृढ़ता और तकनीकी परिपक्वता का प्रमाण है।
साक्षी की प्रेरणा और लक्ष्य
कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण जीतने के बाद साक्षी ने कहा था, "कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतना मेरे लिए सपने के सच होने जैसा है। अब मेरा पूरा फोकस एशियन गेम्स पर है। ये वो प्लेटफॉर्म हैं जिन पर मेरा हमेशा से लक्ष्य रहा है, और मैं अपनी क्षमता के मुताबिक श्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती हूँ।"
साक्षी ने यह भी कहा, "मैं अपने देश के लिए खेलती हूँ। यह सोच मुझे जोश देती है और मुझे पिछले मैच से बेहतर करने की ताकत और हिम्मत देती है।" देश के प्रति यह समर्पण उनके खेल में भी साफ दिखता है।
भारतीय मुक्केबाज़ी पर असर
साक्षी की यह जीत भारतीय महिला मुक्केबाज़ी के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने एक ओलंपिक पदक विजेता को हराकर अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता सिद्ध की है। अब सभी की निगाहें गुरुवार के उस बड़े मुकाबले पर टिकी हैं जहाँ विश्व चैंपियन बाल्किबेकोवा उनकी राह में खड़ी हैं।