एशियन पैरा गेम्स 2026: सुखचैन ने जैवलिन थ्रो एफ55 में ब्रॉन्ज, मंजीत व्यास को एफ13 में सिल्वर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पैरा एथलीट सुखचैन ने 21 अक्टूबर 2026 को आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की एफ55 भाला फेंक स्पर्धा में 29.94 मीटर की दूरी के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता और भारत की पदक तालिका में एक और उपलब्धि जोड़ी। यह थ्रो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।
मुख्य प्रदर्शन: सुखचैन का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ
सुखचैन ने कुल छह प्रयासों में अपनी सर्वश्रेष्ठ दूरी तीसरे प्रयास में दर्ज की। उनकी थ्रो का क्रम इस प्रकार रहा: 27.35 मीटर, 27.84 मीटर, 27.56 मीटर, 29.06 मीटर, 27.22 मीटर और अंतिम प्रयास में 29.94 मीटर, जो उनकी अंतिम और सर्वश्रेष्ठ दूरी बनी।
स्वर्ण पदक चीन के फीफेई झोउ ने जीता, जिन्होंने 37.63 मीटर की थ्रो के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। ईरान के जफर जाकेर ने 36.00 मीटर की अपनी सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ सिल्वर हासिल किया।
सुखचैन का एशियन पैरा गेम्स में सातत्य
गौरतलब है कि सुखचैन ने एशियन पैरा गेम्स 2022 में भी पुरुषों की एफ55 जैवलिन थ्रो स्पर्धा में 30.36 मीटर की थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता था। यह उनकी इस प्रतियोगिता में लगातार दूसरी पदक उपलब्धि है, जो उनकी निरंतरता और अनुभव को रेखांकित करती है।
मंजीत व्यास का शानदार सिल्वर
मंजीत व्यास ने पुरुषों की एफ13 जैवलिन थ्रो स्पर्धा (संयुक्त एफ12/13 वर्ग) में 61.03 मीटर की अपनी सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने यह उत्कृष्ट प्रदर्शन अपने दूसरे प्रयास में किया।
यह सिल्वर मंजीत के एक शानदार सीजन में नई कड़ी है। इससे पहले उन्होंने नई दिल्ली में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री और बेंगलुरु में इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था। एशियन पैरा गेम्स के क्वालीफायर में भी उन्होंने 59.08 मीटर की थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल किया था।
प्रदीप कुमार और आयुष वर्मा का योगदान
इससे पहले पुरुषों की एफ53/54 जैवलिन थ्रो स्पर्धा में प्रदीप कुमार और आयुष वर्मा ने क्रमशः सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीते। प्रदीप ने एफ54 वर्ग में अपने अंतिम प्रयास में 27.45 मीटर की व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ दूरी के साथ सिल्वर सुरक्षित किया, जबकि आयुष ने पाँचवें प्रयास में 17.88 मीटर की अपनी सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ ब्रॉन्ज हासिल किया।
भारत की जैवलिन थ्रो में बढ़ती ताकत
यह ऐसे समय में आया है जब भारत एशियन पैरा गेम्स में जैवलिन थ्रो के विभिन्न वर्गों में एक के बाद एक पदक अर्जित कर रहा है। पैरा एथलेटिक्स में भारत के इस सामूहिक प्रदर्शन से स्पष्ट है कि देश में पैरा खेलों के प्रशिक्षण और बुनियादी ढाँचे में लगातार सुधार हो रहा है। आगे भी भारतीय दल से पदकों की उम्मीद बनी हुई है।