बाइचुंग भूटिया बोले — पीएम के खिलाफ अपशब्द अस्वीकार्य, युवाओं से संयम की अपील
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने 4 अगस्त को स्पष्ट कहा कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, परंतु प्रधानमंत्री सहित किसी के भी विरुद्ध अपशब्दों का प्रयोग न केवल व्यक्तिगत रूप से बल्कि देश और समाज के लिए भी हानिकारक है। यह बयान नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए युवा प्रदर्शन के बाद उठे विवाद की पृष्ठभूमि में आया है।
भूटिया ने क्या कहा
भूटिया ने कहा, 'सभी को किसी भी मुद्दे पर विरोध करने, अपनी बात रखने का अधिकार है। इस दौरान गलत शब्दों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होना चाहिए। खासकर, प्रधानमंत्री के लिए गलत शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह न सिर्फ अपने आपके लिए बल्कि देश और समाज के लिए अच्छा नहीं है।' उन्होंने एक खिलाड़ी की भूमिका से आगे बढ़कर सामाजिक जिम्मेदारी की बात की।
खेल और युवाओं पर भूटिया का संदेश
भूटिया ने यह भी कहा, 'एक खिलाड़ी के तौर पर हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री और सरकार ज्यादा से ज्यादा युवाओं को खेल के क्षेत्र से जोड़ने का काम करे।' यह बयान उनकी उस सोच को दर्शाता है जिसमें वे युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा में लगाने की वकालत करते हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन और विवाद की पृष्ठभूमि
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में युवाओं का एक प्रदर्शन हुआ था। इस प्रदर्शन में शामिल कुछ युवाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करते दिखे। समाज के विभिन्न वर्गों की著名 हस्तियों ने इस भाषा की निंदा की और युवाओं से संयम बरतने की अपील की।
प्रदर्शन का अंत और पुलिस कार्रवाई
यह प्रदर्शन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हो गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन युवाओं के खिलाफ कार्रवाई की जिन्होंने प्रधानमंत्री के विरुद्ध अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। गौरतलब है कि कई युवाओं ने सार्वजनिक रूप से माफी माँगी और अपनी गलती स्वीकार की।
पीएम मोदी की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर साझा एक वीडियो में उन युवाओं को क्षमा कर दिया जिन्होंने उनके विरुद्ध अपशब्दों का प्रयोग किया था। उन्होंने सभी युवाओं को अपना मानते हुए कहा था कि उन्हें सही रास्ते पर लाना हमारी जिम्मेदारी है। यह पूरा प्रकरण लोकतांत्रिक विरोध की सीमाओं और भाषाई मर्यादा पर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है।