महिला टी20 विश्व कप 2026: बेथ बैरेट-वाइल्ड बोलीं — सही मार्केटिंग से दर्शक ज़रूर जुड़ेंगे
सारांश
मुख्य बातें
आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 की टूर्नामेंट निदेशक बेथ बैरेट-वाइल्ड ने कहा है कि महिला क्रिकेट के लिए दर्शक पहले से मौजूद हैं — ज़रूरत है तो केवल सटीक मार्केटिंग और सुनियोजित टिकट रणनीति की। 11 जून को एक खास बातचीत में उन्होंने 2017 महिला वनडे विश्व कप से मिली सीख का हवाला देते हुए कहा कि एक बार माँग पैदा होने के बाद उसे सही आपूर्ति से भुनाना अनिवार्य है।
2017 का सबक: माँग थी, रास्ता नहीं था
बैरेट-वाइल्ड ने बताया कि लॉर्ड्स में खेले गए इंग्लैंड बनाम भारत के 2017 महिला वनडे विश्व कप फाइनल के सारे टिकट बिक गए थे — और यह इंग्लैंड में शायद पहला मौका था जब एक महिला क्रिकेट मुकाबले ने राष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी पहचान बनाई। उन्होंने कहा, "अगर आप महिला क्रिकेट को चमकने का मौका दें, उसकी सही मार्केटिंग करें और टिकट बेचने की अच्छी रणनीति अपनाएँ, तो ऐसे दर्शक मौजूद हैं जो इसे देखना चाहते हैं।"
हालाँकि, उस ऐतिहासिक फाइनल के बाद एक बड़ी चूक हुई — नए फैन्स के लिए आगे के मैच देखने या इंग्लैंड की महिला टीम को फॉलो करते रहने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं बनाया गया था। उस गर्मी में इंग्लैंड की महिला टीम ने फाइनल के बाद कोई और मैच नहीं खेला, जिससे बना हुआ उत्साह बिखर गया।
2026 की योजना: लगातार क्रिकेट का कैलेंडर
बैरेट-वाइल्ड ने बताया कि इस बार इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने उस गलती से सबक लेते हुए एक सुनियोजित कैलेंडर तैयार किया है। 5 जुलाई को लॉर्ड्स में महिला टी20 विश्व कप फाइनल होगा। उसके ठीक पाँच दिन बाद, 10 जुलाई से भारत और इंग्लैंड की महिला टीमों के बीच टेस्ट मैच शुरू होगा। फिर 17 जुलाई को ओवल में वाइटैलिटी ब्लास्ट महिला टी20 फाइनल डे होगा, और उसके बाद 'द हंड्रेड' टूर्नामेंट का आगाज़ होगा।
उन्होंने कहा, "इसे लोगों को आकर्षित करने के एक मौके के तौर पर बहुत सोच-समझकर चुना गया है। इससे मैं बहुत उत्साहित हूँ।" उनके अनुसार विश्व कप फाइनल में पहुँचने वाली टीमों — चाहे वे इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, भारत, ऑस्ट्रेलिया या वेस्टइंडीज़ हों — की खिलाड़ी 'द हंड्रेड' में भी खेलेंगी, जिससे फैन्स का जुड़ाव बना रहेगा।
महिला क्रिकेट का बदलता ढाँचा
बैरेट-वाइल्ड ने बताया कि 2017 में इंग्लैंड में केवल 15 पेशेवर महिला क्रिकेटर थीं। आज यह संख्या बढ़कर 150 से अधिक हो गई है। देश में अब 9 पूर्ण पेशेवर और 9 अर्ध-पेशेवर महिला टीमें हैं, और उनके नीचे एक और बेस लेवल भी है। उन्होंने कहा कि ग्रासरूट से लेकर शीर्ष पेशेवर स्तर तक का रास्ता अब स्पष्ट है — जो 2017 में बिल्कुल नहीं था।
यह ऐसे समय में आया है जब इंग्लैंड में महिला खेलों की व्यापक सफलता की लहर चल रही है। 2022 में वेम्बली में 'लायोनेसिस' का UEFA महिला यूरो जीतना और 2025 में ट्विकेनहम में 'रेड रोज़ेज़' का महिला रग्बी विश्व कप जीतना इस बदलाव के प्रतीक हैं।
ग्रासरूट पहल: 5 लाख महिलाओं तक पहुँचने का लक्ष्य
टूर्नामेंट का एक बड़ा उद्देश्य ज़मीनी स्तर पर भी काम करना है। बैरेट-वाइल्ड ने बताया कि इंग्लैंड और वेल्स में क्लब 'स्पिरिट पार्टीज़', ओपन डेज़ और टेस्टर सेशन के ज़रिए 5 लाख महिलाओं और लड़कियों को बैट और बॉल थामने के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा, "हमारा मकसद सिर्फ मैदान पर क्रिकेट नहीं है — हम चाहते हैं कि हर लड़की यह सपना देख सके कि वह एक दिन पेशेवर क्रिकेटर बन सकती है। 2017 में शायद ऐसा नहीं था, हम उस स्तर पर नहीं थे।"
2027 और आगे की राह
बैरेट-वाइल्ड ने 2027 की ओर देखते हुए कहा कि महिला एशेज सीरीज़ एक और बड़ा अवसर होगी। उनके अनुसार, मोमेंटम बनाए रखने का मतलब केवल 2026 तक सीमित नहीं है — ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगली गर्मी में भी उस लय को जारी रखना ईसीबी के लिए उतना ही ज़रूरी है, ताकि महिला क्रिकेट की फैन फॉलोइंग और मज़बूत हो सके।