कॉमनवेल्थ गेम्स पदक तालिका: ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर, भारत चौथे स्थान पर 564 पदकों के साथ
सारांश
मुख्य बातें
कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में ऑस्ट्रेलिया सर्वाधिक 2,596 पदकों के साथ शीर्ष स्थान पर काबिज है, जबकि भारत कुल 564 पदकों के साथ चौथे स्थान पर है। अगला संस्करण — 23वाँ कॉमनवेल्थ गेम्स — 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित होना है।
कॉमनवेल्थ गेम्स का इतिहास और स्वरूप
कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत 1930 में हुई थी और हर चार वर्ष पर इसका आयोजन होता है। एकमात्र व्यवधान तब आया जब 1938 के बाद ये खेल 12 वर्षों के अंतराल पर 1950 में आयोजित हुए। तब से यह चक्र अटूट रहा है और अब तक 22 संस्करण सम्पन्न हो चुके हैं।
इन खेलों में 72 दल हिस्सा लेते हैं — 56 दल स्वतंत्र राष्ट्रों का और 16 दल आश्रित क्षेत्रों एवं ब्रिटिश होम नेशंस (इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड) का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स ऐसे छह देश हैं जिन्होंने हर संस्करण में भागीदारी की है।
शीर्ष 5 देशों की पदक गणना
ऑस्ट्रेलिया इतिहास का सबसे सफल राष्ट्र है। उसने 1,001 स्वर्ण, 832 रजत और 763 कांस्य सहित कुल 2,596 पदक अपने नाम किए हैं। दूसरे स्थान पर इंग्लैंड है, जिसके खाते में 773 स्वर्ण, 783 रजत और 766 कांस्य — कुल 2,322 पदक हैं।
तीसरे स्थान पर कनाडा ने 510 स्वर्ण, 548 रजत और 589 कांस्य के साथ कुल 1,647 पदक जीते हैं। भारत चौथे स्थान पर है — 203 स्वर्ण, 190 रजत और 171 कांस्य के साथ कुल 564 पदक। पाँचवें स्थान पर न्यूज़ीलैंड है, जिसके 179 स्वर्ण, 232 रजत और 296 कांस्य सहित कुल 707 पदक हैं।
छठे से दसवें स्थान तक के देश
दक्षिण अफ्रीका कुल 416 पदकों के साथ छठे, स्कॉटलैंड 502 पदकों के साथ सातवें, केन्या 258 पदकों के साथ आठवें, नाइजीरिया 271 पदकों के साथ नौवें और वेल्स 334 पदकों के साथ दसवें स्थान पर है।
गौरतलब है कि केन्या और नाइजीरिया के कुल पदक वेल्स से कम होने के बावजूद उनकी रैंकिंग ऊँची है, क्योंकि पदक तालिका में स्वर्ण पदकों की संख्या को प्राथमिकता दी जाती है।
भारत की स्थिति और आगे की राह
ओलंपिक के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स एथलेटिक्स का दूसरा सबसे बड़ा वैश्विक मंच माना जाता है। भारत का चौथा स्थान उसकी बढ़ती खेल शक्ति का प्रमाण है, लेकिन कनाडा और इंग्लैंड से अंतर अभी भी व्यापक है। ग्लासगो 2026 भारत के लिए अपनी ऐतिहासिक पदक संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि का अवसर होगा।