CWG 2026 क्लोजिंग सेरेमनी: ग्लासगो से अहमदाबाद को मिली मेजबानी, शंकर महादेवन की आवाज़ से गूंजा OVO हाइड्रो
सारांश
मुख्य बातें
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (CWG 2026) का समापन 3 अगस्त 2026 को ग्लासगो के OVO हाइड्रो में एक भव्य क्लोजिंग सेरेमनी के साथ हुआ, और इसी के साथ अहमदाबाद को आधिकारिक रूप से CWG 2030 की मेजबानी सौंप दी गई। 11 यादगार दिनों के खेल उत्सव के समापन पर भारत के सांस्कृतिक प्रदर्शन ने दुनियाभर के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भारतीय गायक शंकर महादेवन, ऋषभ शर्मा और भूमि त्रिवेदी की प्रस्तुतियों ने स्टेडियम में ऐसा माहौल बनाया कि हज़ारों दर्शक अपनी सीटों से उठकर झूमने लगे।
मुख्य घटनाक्रम
खचाखच भरे OVO हाइड्रो में जैसे ही 'वंदे मातरम', 'शिव स्तोत्र' और 'सुनो गौर से दुनिया वालों' की धुनें गूंजीं, हज़ारों भारतीय दर्शक भावुक होकर खड़े हो गए। विदेशी दर्शकों ने भी भारतीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया। शाम की शुरुआत स्कॉटिश संस्कृति के जीवंत जश्न से हुई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर रॉक बैंड 'सिंपल माइंड्स', डांस ग्रुप 'डायवर्सिटी' और कई स्थानीय कलाकारों ने संगीत, नृत्य और विजुअल स्टोरीटेलिंग के ज़रिए धूम मचाई।
भारत का सांस्कृतिक प्रदर्शन
झंडा हस्तांतरण के बाद 18 मिनट 27 सेकंड के भारतीय सांस्कृतिक प्रदर्शन ने सबकी नज़रें खींच लीं। इस प्रस्तुति को चार हिस्सों में बाँटा गया था। पहला हिस्सा 'वसुधैव कुटुंबकम' की थीम पर आधारित था, जिसमें 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ को केंद्र में रखते हुए भारत के शांति, एकता और समावेशिता के संदेश को प्रस्तुत किया गया। दूसरे हिस्से में एक विशेष फिल्म दिखाई गई, जिसमें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सफ़र और यादगार उपलब्धियों को दर्शाया गया।
तीसरे हिस्से में भारतीय संगीतकार ऋषभ शर्मा और स्कॉटिश कलाकार रॉस एन्सली के बीच एक अनूठी संगीत जुगलबंदी हुई, जो ग्लासगो से अहमदाबाद तक गेम्स के सहज बदलाव का प्रतीक बनी। अंतिम और सबसे भव्य हिस्से में शंकर महादेवन, ऋषभ शर्मा और भूमि त्रिवेदी ने मिलकर ऐसी प्रस्तुति दी कि दर्शक तालियाँ बजाने, नाचने और गाने पर मजबूर हो गए।
झंडा हस्तांतरण और ऐतिहासिक क्षण
कॉमनवेल्थ गेम्स का बैटन स्कॉटलैंड से भारत को सौंपे जाने के दौरान स्टेडियम का माहौल अभूतपूर्व था। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी को कॉमनवेल्थ गेम्स का झंडा प्रतीकात्मक रूप से सौंपा गया। भारतीय स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा को भी CWG ध्वज थमाया गया। एथलीटों की परंपरागत परेड में कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियन जैस्मिन लैंबोरिया ने तिरंगा थामा और 74 कॉमनवेल्थ देशों एवं क्षेत्रों के एथलीटों ने एकजुट होकर मार्च किया।
अहमदाबाद 2030 का ऐतिहासिक महत्व
CWG 2030 का आयोजन इसलिए भी ऐतिहासिक होगा क्योंकि यह कॉमनवेल्थ गेम्स की 100वीं वर्षगांठ का संस्करण होगा। इस आयोजन के साथ भारत, ऑस्ट्रेलिया के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स की दो बार मेजबानी करने वाला दूसरा देश बन जाएगा। गौरतलब है कि भारत ने इससे पहले 2010 में नई दिल्ली में CWG की मेजबानी की थी। अहमदाबाद 2030 के लिए भारत की उल्टी गिनती आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है।
आगे क्या
ग्लासगो से मिली मेजबानी की ज़िम्मेदारी के साथ अब गुजरात और केंद्र सरकार के सामने शताब्दी संस्करण के लिए तैयारियों की बड़ी चुनौती है। हैंडओवर प्रेजेंटेशन में दिखाई गई भव्य विजुअल्स, जोशीली कोरियोग्राफी और दमदार संगीत ने दुनिया को अहमदाबाद 2030 के इरादों की पहली आधिकारिक झलक दे दी है। कॉमनवेल्थ परिवार अब उत्सुकता से 2030 के ऐतिहासिक आयोजन का इंतज़ार करेगा।