अहमदाबाद को ग्लासगो क्लोजिंग सेरेमनी में मिलेगा कॉमनवेल्थ गेम्स का झंडा और बैटन, 2030 की मेजबानी आधिकारिक
सारांश
मुख्य बातें
कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण में, अहमदाबाद को 1 अगस्त 2026 को ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान आधिकारिक रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स का झंडा और मेजबान बैटन सौंपा जाएगा। यह हस्तांतरण कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी की दिशा में अहमदाबाद की यात्रा की औपचारिक शुरुआत होगी, जो गेम्स का 100वाँ संस्करण होगा।
हैंडओवर सेरेमनी का स्वरूप
ग्लासगो हैंडओवर सेगमेंट को तीन चरणों में तैयार किया गया है। पहला चरण 'वंदे मातरम' की 150वीं सालगिरह को समर्पित होगा। दूसरे चरण में सितार वादक ऋषभ रिखीराम शर्मा और स्कॉटिश पाइपर रॉस आइंस्ली की क्लासिकल इंडियन जुगलबंदी प्रस्तुत की जाएगी, जो ग्लासगो 2026 और अहमदाबाद 2030 के बीच सांस्कृतिक सेतु का प्रतीक होगी। अंतिम चरण में पूरे भारत की एक दृश्यात्मक यात्रा दिखाई जाएगी, जिसमें गुजरात की विरासत और पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
गुजरात सरकार की उपस्थिति
इस अवसर पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ग्लासगो में उपस्थित हैं और वे अहमदाबाद के प्रतिनिधि के रूप में झंडा और बैटन ग्रहण करेंगे। यह उपस्थिति भारत सरकार और गुजरात प्रशासन की कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ग्लासगो में दर्शकों को अहमदाबाद 2030 का पहला प्रीव्यू भी दिखाया जाएगा।
किंग्स बैटन रिले की परंपरा
कॉमनवेल्थ गेम्स की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक किंग्स बैटन रिले पहली बार 1958 में कार्डिफ में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में शुरू हुई थी। कॉमनवेल्थ स्पोर्ट के अनुसार, यह रिले सभी 74 कॉमनवेल्थ देशों और इलाकों से होकर गुजरेगी। गेम्स के इतिहास में पहली बार प्रत्येक भाग लेने वाले देश और इलाके को अपना अलग बैटन मिलेगा, ताकि हर स्थान अपनी संस्कृति, विरासत और रचनात्मकता को उजागर कर सके। प्रत्येक बैटन पर यूके के राजा चार्ल्स तृतीय का संदेश अंकित होगा।
आयोजकों की प्रतिक्रिया
ग्लासगो 2026 की चीफ मार्केटिंग और सेरेमनी ऑफिसर लुईसा महोन ने कहा, "यह इंडियन सितार और स्कॉटिश पाइप के फ्यूजन के ज़रिए दो देशों की भावना को एक ही मंच पर लाएगा और साथ ही वंदे मातरम की 150वीं सालगिरह भी मनाएगा।" ग्लासगो 2026 के सेरेमनी डायरेक्टर चंदा सिंह ने कहा, "अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की सौवीं सालगिरह होगी और ग्लासगो में होने वाली सेरेमनी इस ऐतिहासिक सफर का पहला अध्याय होगा।"
कॉमनवेल्थ गेम्स का ऐतिहासिक संदर्भ
कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत 1930 में कनाडा के हैमिल्टन शहर में हुई थी। 2030 में अहमदाबाद में होने वाला संस्करण गेम्स का 100वाँ वर्ष होगा, जो इसे विशेष रूप से ऐतिहासिक बनाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक खेल आयोजनों में अपनी उपस्थिति को और सशक्त बना रहा है। अहमदाबाद 2030 भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी का दूसरा अवसर होगा, इससे पहले 2010 में नई दिल्ली इसकी मेजबान रह चुकी है।