कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 ग्लासगो: मीराबाई-लवलीना ने थामा तिरंगा, किंग चार्ल्स III ने किया उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
ग्लासगो के प्रतिष्ठित OVO हाइड्रो में 24 जुलाई 2026 को एक भव्य ओपनिंग सेरेमनी के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आधिकारिक आगाज़ हुआ। किंग चार्ल्स तृतीय ने परंपरानुसार खेलों का औपचारिक उद्घाटन किया, जबकि टोक्यो ओलंपिक की दो पदक विजेता — वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन — ने 'परेड ऑफ नेशंस' में भारतीय दल का नेतृत्व किया। यह आयोजन 2014 के बाद पहली बार ग्लासगो में लौटा है।
उद्घाटन समारोह: स्कॉटिश संस्कृति का जश्न
ओपनिंग सेरेमनी स्कॉटलैंड की सांस्कृतिक पहचान का उत्सव बनी, जिसमें संगीत, नृत्य और कहानी कहने की परंपरागत कलाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रसिद्ध कलाकारों केटी टुनस्टॉल, नाथन इवांस और सेंट फीनिक्स ने मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 11 दिनों तक चलने वाले इन खेलों के लिए मंच इससे बेहतर तरीके से तैयार नहीं हो सकता था।
भारत के ध्वजवाहक: मीराबाई और लवलीना
वेटलिफ्टिंग में टोक्यो ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू देश की ध्वजवाहक बनीं, जबकि टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ बैटन संभाली। जब भारतीय तिरंगा एरिना में पहुँचा, तो दर्शकों ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने कॉमनवेल्थ इतिहास के सबसे मजबूत दलों में से एक के साथ उतरा है।
भारतीय दल और पदक की उम्मीदें
भारत ने 125 एथलीटों का दल भेजा है, जो पैरा खेलों सहित 13 खेलों में प्रतिस्पर्धा करेगा। ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा एथलेटिक्स में सबसे बड़े आकर्षण होंगे। मीराबाई वेटलिफ्टिंग में और लवलीना बॉक्सिंग में प्रमुख पदक दावेदारों में शामिल हैं। गौरतलब है कि भारत की लॉन बॉल्स टीम ओपनिंग सेरेमनी से पहले ही मैदान पर उतर चुकी थी — उन्हें बर्मिंघम 2022 की यादगार जीत को दोहराने की उम्मीद है।
खेलों का दायरा और वेन्यू
कॉमनवेल्थ गेम्स के इस 23वें संस्करण में 74 देशों और क्षेत्रों के एथलीट 10 खेलों में भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिताएँ स्कॉटिश इवेंट कैंपस, स्कॉट्सटाउन स्टेडियम, टोलक्रॉस इंटरनेशनल स्विमिंग सेंटर और ग्लासगो एरिना जैसे प्रतिष्ठित स्थलों पर होंगी। पिछले संस्करणों की तुलना में खेलों का दायरा सीमित किया गया है, लेकिन आयोजकों का कहना है कि प्रतिस्पर्धा का स्तर उच्च बना रहेगा। मशाल जल चुकी है, झंडे फहरा चुके हैं — अब ग्लासगो पदकों, रिकॉर्ड और यादगार पलों का इंतजार कर रहा है।