फीफा वर्ल्ड कप 2026: इंग्लैंड बनाम डीआर कांगो राउंड ऑफ 32 — ट्यूशेल कर सकते हैं प्लेइंग इलेवन में बदलाव
सारांश
मुख्य बातें
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में इंग्लैंड का मुकाबला बुधवार को डीआर कांगो से होगा। हेड कोच थॉमस ट्यूशेल इस अहम मुकाबले के लिए अपनी शुरुआती प्लेइंग इलेवन में कई अहम बदलाव कर सकते हैं। ग्रुप-एल की विजेता इंग्लैंड के लिए यह मैच राउंड ऑफ 16 में प्रवेश की राह खोलने वाला होगा।
इंग्लैंड का ग्रुप चरण — मिली-जुली तस्वीर
इंग्लैंड ने ग्रुप-एल में शीर्ष स्थान हासिल किया, लेकिन उसका सफर पूरी तरह आश्वस्त करने वाला नहीं रहा। घाना के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के बाद टीम ने पनामा को 2-0 से हराया। मजबूत डिफेंस वाली टीमों को तोड़ने की क्षमता पर अभी भी सवाल बने हुए हैं, और इंग्लैंड के अपने रक्षापंक्ति में भी कुछ खामियाँ उजागर हुई हैं जिनका फायदा कोई भी तेज़-तर्रार विरोधी उठा सकता है।
पनामा के खिलाफ मिडफील्डर जूड बेलिंगहैम इंग्लैंड के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी रहे। उन्होंने कॉर्नर से मिले मौके को गोल में बदलकर टीम का खाता खोला और फिर हैरी केन के दूसरे गोल की ज़मीन तैयार कर जीत सुनिश्चित की।
संभावित प्लेइंग इलेवन में बदलाव
सबसे बड़ी संभावित वापसी मिडफील्डर डेक्लान राइस की है, जो हल्की काफ (पिंडली) की चोट के कारण पनामा मैच से बाहर थे। उम्मीद है कि राइस इलियट एंडरसन के साथ मिडफील्ड संभालेंगे, जबकि मॉर्गन रोजर्स को बेंच पर बैठना पड़ सकता है।
डिफेंस में रीस जेम्स हैमस्ट्रिंग चोट के कारण उपलब्ध नहीं हैं। जैरेल क्वांसाह का खेलना भी संदिग्ध है क्योंकि उन्हें शनिवार को टखने में चोट लगी थी। ऐसे में जेड स्पेंस राइट-बैक और निको ओ'राइली लेफ्ट-बैक के रूप में शुरुआत कर सकते हैं। स्पेंस के आक्रामक रन से टीम को अतिरिक्त ताकत मिल सकती है।
राइट विंग पर बुकायो साका और नोनी माडुके के बीच चुनाव ट्यूशेल के लिए एक बड़ा फैसला होगा। पनामा मैच में साका पूरी तरह फिट नहीं दिखे, जबकि माडुके भी खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए। लेफ्ट फ्लैंक पर मार्कस रैशफोर्ड के एंथनी गॉर्डन से आगे अपनी जगह बनाए रखने की संभावना है।
डीआर कांगो — टूर्नामेंट का सबसे बड़ा चौंकाने वाला दल
डीआर कांगो इस विश्व कप की सबसे अप्रत्याशित टीमों में से एक साबित हुई है। ग्रुप चरण में उसने उज्बेकिस्तान को हराया, पुर्तगाल के साथ ड्रॉ खेला और कोलंबिया से 1-0 की करीबी हार के बावजूद राउंड ऑफ 32 में जगह पक्की की।
गौरतलब है कि जैरे के नाम से खेलते हुए डीआर कांगो 1974 में फीफा वर्ल्ड कप में भाग लेने वाला उप-सहारा अफ्रीका का पहला देश था। उस अभियान में तीनों मैचों में हार मिली, जिसमें यूगोस्लाविया के खिलाफ 9-0 की करारी शिकस्त भी शामिल थी। लेकिन मौजूदा टीम उस दौर से कहीं अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है।
कांगो की ताकत — अनुभवी खिलाड़ियों का जखीरा
सेड्रिक बाकम्बु, नोआ सादिकी, योएन विसा, एक्सल तुआनजेबे और इंग्लैंड के पूर्व अंडर-21 डिफेंडर आरोन वान-बिसाका जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी डीआर कांगो को एक कठिन प्रतिद्वंद्वी बनाती है। फ्रांसीसी लीग में खेलने वाले कई खिलाड़ी भी उनके दल में शामिल हैं, जिससे उनकी तकनीकी गुणवत्ता और भी ऊँची है।
राउंड ऑफ 16 की दौड़ में शामिल इंग्लैंड के लिए यह मैच आसान नहीं होगा — और ट्यूशेल की टीम को डीआर कांगो को कम आंकने की गलती से बचना होगा। आने वाले घंटे बताएंगे कि ग्रुप चरण की चुनौतियों से सीखते हुए इंग्लैंड किस रणनीति के साथ उतरती है।