हैरी केन के 75वें और 86वें मिनट में दो गोल, इंग्लैंड ने डीआर कांगो को 2-1 से हराकर राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई
सारांश
मुख्य बातें
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के 'राउंड ऑफ 32' में इंग्लैंड ने 2 जुलाई को अटलांटा में डीआर कांगो को 2-1 से हराकर 'राउंड ऑफ 16' में प्रवेश किया। कप्तान हैरी केन ने 75वें और 86वें मिनट में दो गोल दागकर टीम को एक गोल से पिछड़ने के बाद ऐतिहासिक वापसी दिलाई। अब इंग्लैंड का अगला मुकाबला 6 जुलाई को मेक्सिको सिटी स्टेडियम में मेक्सिको से होगा।
मैच का घटनाक्रम
मैच की शुरुआत से ही इंग्लैंड दबाव में थी। डीआर कांगो के ब्रायन सिपेंगा ने महज 7वें मिनट में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय गोल दागकर टीम को बढ़त दिला दी। दाईं ओर से आई क्रॉस-फील्ड बॉल को चांसल म्बेम्बा ने सिपेंगा की तरफ बढ़ाया और सिपेंगा ने बॉक्स के बाईं ओर खाली जगह से लो शॉट मारकर जॉर्डन पिकफोर्ड को नियर पोस्ट पर छका दिया।
इंग्लैंड ने पहले हाफ में वापसी के कई प्रयास किए। जूड बेलिंगहम के दो हेडर को कांगो के गोलकीपर लियोनेल म्पासी ने शानदार ढंग से रोका। हाफ-टाइम से ठीक पहले म्पासी ने केन की नजदीक से मारी गई वॉली को भी बचाया। नोनी माडुएके के बॉक्स में दौड़ने से रैशफोर्ड के लिए दूर वाले पोस्ट पर शूट करने का मौका बना, लेकिन एरॉन वान-बिसाका ने उसे गोल-लाइन से क्लियर कर दिया।
केन की मैच पलटने वाली जोड़ी
दूसरे हाफ में कोच थॉमस ट्यूशेल ने विंगर्स में बदलाव किया, जिससे टीम में नई ऊर्जा आई। सब्स्टीट्यूट एंथनी गॉर्डन ने क्रॉस डाला और केन ने 75वें मिनट में हेडर से बराबरी का गोल दागा। इसके बाद 86वें मिनट में केन अपने मार्कर से दूर निकले और नियर पोस्ट के अंदर एक अचूक शॉट मारकर इंग्लैंड को निर्णायक बढ़त दिला दी।
इस दौरान कांगो भी दूसरा गोल कर सकता था — योएन विसा ने वान-बिसाका के लो सेंटर को पोस्ट पर मार दिया, लेकिन टीम गोल से चूक गई। म्पासी ने अंत तक कांगो की उम्मीदें जिंदा रखीं, लेकिन केन के दूसरे गोल के बाद मैच का पासा पलट चुका था।
ऐतिहासिक वापसी और रिकॉर्ड
1986 के बाद यह पहली बार है जब 'थ्री लायंस' हाफ-टाइम में एक गोल से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए वर्ल्ड कप मैच जीती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब जर्मनी और नीदरलैंड जैसी दिग्गज टीमें नॉक-आउट स्टेज में ही बाहर हो चुकी थीं, और इंग्लैंड पर भी जल्दी बाहर होने का खतरा मंडरा रहा था।
गौरतलब है कि फीफा वर्ल्ड कप 1966 की चैंपियन इंग्लैंड टीम अफ्रीकी टीमों के खिलाफ अपने पिछले नौ वर्ल्ड कप मुकाबलों में कभी नहीं हारी थी। अटलांटा में इस जीत ने यह रिकॉर्ड बरकरार रखा।
कांगो का साहसी प्रदर्शन
डीआर कांगो ने इस टूर्नामेंट में पहली बार वर्ल्ड कप नॉकआउट मैच खेला। इसके बावजूद टीम ने इंग्लैंड जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ लगभग पूरे मैच तक बराबरी की टक्कर दी। म्पासी की गोलकीपिंग ने कांगो को मैच में बनाए रखा।
आगे क्या
इंग्लैंड अब 6 जुलाई को मेक्सिको सिटी स्टेडियम में मेक्सिको से भिड़ेगी। ट्यूशेल की टीम के लिए यह मैच और कठिन होगा, क्योंकि मेक्सिको घरेलू माहौल के करीब खेलेगा। केन के फॉर्म में वापसी इंग्लैंड के लिए सबसे बड़ी राहत है।