FIFA विश्व कप: पिता-पुत्र की 5 ऐतिहासिक जोड़ियाँ जिन्होंने देश के लिए खेला फुटबॉल का महाकुंभ
सारांश
मुख्य बातें
FIFA विश्व कप 2026 का आगाज़ 11 जून से होने जा रहा है, और इस मेगा इवेंट से पहले फुटबॉल इतिहास की उन 5 खास पिता-पुत्र जोड़ियों की चर्चा फिर तेज़ हो गई है, जिन्होंने अलग-अलग दशकों में अपने देश की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। मेक्सिको, स्पेन, ब्राज़ील, फ्रांस और रोमानिया — पाँच देशों की इन जोड़ियों ने पारिवारिक विरासत को विश्व मंच पर पहुँचाया, हालाँकि गोल का सूखा इन सभी के साथ जुड़ा रहा।
लुइस और मारियो पेरेज (मेक्सिको)
मेक्सिको की ओर से पिता लुइस पेरेज ने पहले-ही 1930 के उद्घाटन विश्व कप में हिस्सा लिया था। उनके बेटे और मिडफील्डर मारियो पेरेज ने 1950 के टूर्नामेंट में राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। उल्लेखनीय है कि दोनों ही पिता-पुत्र विश्व कप में एक भी गोल दर्ज नहीं कर सके।
मार्टी और जोस वैंटोलरा (स्पेन/मेक्सिको)
पिता मार्टी वैंटोलरा 1934 के विश्व कप में स्पेन की टीम का हिस्सा रहे। उनके बेटे जोस वैंटोलरा ने 1970 के विश्व कप में मेक्सिको की ओर से 4 मुकाबले खेले। दोनों ही पीढ़ियाँ अपने-अपने अभियानों में गोल करने से चूक गईं।
डोमिंगोस और अदेमिर दा गुइया (ब्राज़ील)
ब्राज़ील की ओर से पिता डोमिंगोस दा गुइया ने 1938 के विश्व कप में 4 मैच खेले थे, लेकिन गोल नहीं कर सके। उनके बेटे अदेमिर दा गुइया को 1974 के विश्व कप में सेलेकाओ की जर्सी में सिर्फ एक मैच खेलने का अवसर मिला। यह जोड़ी ब्राज़ील के स्वर्णिम युग की एक कम चर्चित कड़ी मानी जाती है।
रोजर और पैट्रिस रियो (फ्रांस)
पिता रोजर रियो ने 1934 के विश्व कप में फ्रांस की ओर से एक मुकाबला खेला था। उनके बेटे पैट्रिस रियो 1978 के विश्व कप अभियान का हिस्सा रहे। दोनों ही खिलाड़ी टूर्नामेंट में गोल दर्ज नहीं कर पाए, परन्तु फ्रेंच फुटबॉल की पीढ़ीगत निरंतरता का प्रतीक बने रहे।
निकोले और इओन लुपस्कु (रोमानिया)
पिता निकोले लुपस्कु ने 1970 के विश्व कप में रोमानिया की ओर से 3 मैच खेले। उनके बेटे इओन लुपस्कु 1990 और 1994 के विश्व कप में राष्ट्रीय टीम का हिस्सा रहे और कुल 8 मुकाबले खेले। फिर भी, इस पिता-पुत्र जोड़ी के नाम भी विश्व कप में कोई गोल दर्ज नहीं है।
क्यों खास है यह सूची
फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी देश का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में दुर्लभ उपलब्धि है। FIFA विश्व कप 2026 से ठीक पहले इन जोड़ियों की कहानियाँ यह याद दिलाती हैं कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल केवल खिताबों की नहीं, विरासतों की भी कहानी है। आने वाले टूर्नामेंट में देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई नई पिता-पुत्र जोड़ी इस ऐतिहासिक सूची में शामिल होती है।