फीफा वर्ल्ड कप में गोल दागने वाले 5 सबसे युवा खिलाड़ी: पेले से गावी तक का सफर
सारांश
मुख्य बातें
फीफा वर्ल्ड कप के मंच पर जहाँ अनुभवी दिग्गजों ने इतिहास रचा, वहीं कुछ किशोर खिलाड़ियों ने भी अपनी उम्र से कहीं बड़ा खेल दिखाते हुए गोल दागकर रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराया। पेले से लेकर गावी तक, ये पाँच खिलाड़ी वर्ल्ड कप के सबसे युवा गोलस्कोरर के रूप में फुटबॉल इतिहास में अमर हो गए हैं।
पेले — सबसे युवा गोलस्कोरर
ब्राज़ील के महान फुटबॉलर पेले आज भी फीफा वर्ल्ड कप में गोल दागने वाले सबसे युवा खिलाड़ी हैं। उन्होंने 1958 वर्ल्ड कप में वेल्स के खिलाफ मात्र 17 साल 239 दिन की आयु में यह उपलब्धि हासिल की थी। यह गोल मैच के 156वें मिनट में आया और ब्राज़ील ने वह मुकाबला 1-0 से जीता। गौरतलब है कि उसी टूर्नामेंट में पेले ने ब्राज़ील को विश्व चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
मैनुअल रोसास — 1930 के युवा मैक्सिकन स्ट्राइकर
मैनुअल रोसास ने फीफा वर्ल्ड कप 1930 में मैक्सिको की तरफ से खेलते हुए 18 साल 93 दिन की उम्र में गोल दागा था। यह गोल मैच के 222वें मिनट में आया। हालाँकि, अर्जेंटीना के खिलाफ मैक्सिको को उस मुकाबले में 6-3 से हार का सामना करना पड़ा। यह वर्ल्ड कप का पहला संस्करण था, जो उरुग्वे में आयोजित हुआ था।
गावी — 2022 वर्ल्ड कप का युवा स्पेनिश सितारा
स्पेन के मिडफील्डर गावी ने फीफा वर्ल्ड कप 2022 में 18 साल 110 दिन की उम्र में गोल दागकर इस सूची में तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने कोस्टा रिका के खिलाफ मैच के 74वें मिनट में खाता खोला। स्पेन ने वह मैच 7-0 के बड़े अंतर से जीता, जो उस टूर्नामेंट के सबसे एकतरफा परिणामों में से एक रहा।
माइकल ओवेन — इंग्लैंड का 1998 का युवा तूफान
इंग्लैंड के स्ट्राइकर माइकल ओवेन ने फीफा वर्ल्ड कप 1998 में रोमानिया के खिलाफ 18 साल 190 दिन की उम्र में अपना पहला वर्ल्ड कप गोल किया। यह गोल मैच के 14वें मिनट में आया। बावजूद इसके, इंग्लैंड वह मुकाबला 1-2 से गँवा बैठी। उसी टूर्नामेंट में ओवेन ने अर्जेंटीना के खिलाफ एक यादगार गोल भी दागा था, जिसे आज भी वर्ल्ड कप के सर्वश्रेष्ठ गोलों में गिना जाता है।
निकोले कोवाक्स — 1930 के रोमानियाई नायक
रोमानिया के निकोले कोवाक्स ने फीफा वर्ल्ड कप 1930 में पेरू के खिलाफ 18 साल 197 दिन की उम्र में गोल दागा। उन्होंने मैच के 89वें मिनट में यह गोल किया और रोमानिया ने वह मुकाबला 3-1 से जीता। यह उस वर्ल्ड कप में रोमानिया की पहली जीत थी। इस सूची में कोवाक्स पाँचवें स्थान पर हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि युवा प्रतिभाओं की चमक वर्ल्ड कप के शुरुआती दौर से ही बिखरती रही है।
इन पाँचों खिलाड़ियों की कहानियाँ यह साबित करती हैं कि फीफा वर्ल्ड कप का मंच उम्र नहीं, बल्कि प्रतिभा और साहस को परखता है। आने वाले वर्ल्ड कप में भी कोई नया युवा सितारा इस सूची में अपनी जगह बना सकता है।