7 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

2036 ओलंपिक-पैरालंपिक बोली: IOC से मिली पहचान पर पी. टी. उषा ने जताया गर्व, अक्टूबर अंत में पहली बड़ी प्रस्तुति

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
2036 ओलंपिक-पैरालंपिक बोली: IOC से मिली पहचान पर पी. टी. उषा ने जताया गर्व, अक्टूबर अंत में पहली बड़ी प्रस्तुति

सारांश

भारत की 2036 ओलंपिक बोली ने एक अहम मुकाम पार किया — IOC ने अहमदाबाद केंद्रित इस विजन को औपचारिक पहचान दी। IOA अध्यक्ष पी. टी. उषा ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताया। अब नजरें अक्टूबर के अंत पर टिकी हैं, जब भारत फ्यूचर होस्ट कमीशन के सामने पहली बार अपना दावा पेश करेगा।

मुख्य बातें

इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) ने 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक गेम्स की मेजबानी के लिए भारत के विजन को IOC द्वारा मिली पहचान का स्वागत किया।
भारत की बोली गुजरात के अहमदाबाद पर केंद्रित है और इसका थीम 'एक साथ उठना' (Rising Together) है।
उषा ने पहचान मिलने पर गर्व व्यक्त किया और कहा कि यह भारत की ऊर्जा, विविधता और एकजुटता की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि 2036 के लक्ष्य को खेल को सामाजिक विकास के माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।
भारत अक्टूबर 2026 के अंत में IOC के फ्यूचर होस्ट कमीशन के सामने पहली बार अपना विजन प्रस्तुत करेगा।

इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष पी. टी. उषा ने 7 अक्टूबर 2026 को कहा कि 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक गेम्स की मेजबानी के लिए भारत के विजन को अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) द्वारा औपचारिक रूप से पहचान मिलने पर उन्हें गहरी संतुष्टि और गर्व का अनुभव हो रहा है। गुजरात के अहमदाबाद को केंद्र में रखते हुए तैयार की जा रही भारत की इस बोली का थीम 'एक साथ उठना' (Rising Together) है, और देश अक्टूबर के अंत में IOC के फ्यूचर होस्ट कमीशन के सामने पहली बार अपना लक्ष्य प्रस्तुत करेगा।

भारत की बोली की मुख्य बातें

IOA के अनुसार, भारत की बोली को IOC के साथ सक्रिय सलाह-मशविरे के जरिए आकार दिया जा रहा है। यह प्रस्तावित आयोजन केवल एक बड़ा खेल इवेंट नहीं, बल्कि भारत में खेल संस्कृति के व्यापक रूपांतरण के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में देखा जा रहा है।

संस्थान का मानना है कि गेम्स की मेजबानी से खेलों में — विशेष रूप से युवाओं के बीच — भागीदारी बढ़ेगी, स्वस्थ और सक्रिय समुदायों का निर्माण होगा, तथा खेल शिक्षा और पेशेवर अवसरों में नई राहें खुलेंगी। IOA ने यह भी रेखांकित किया कि ओलंपिक और पैरालंपिक मूवमेंट को भारत की एक अरब से अधिक जनसंख्या — जो दुनिया की सबसे युवा और सर्वाधिक डिजिटल रूप से जुड़ी आबादियों में से एक है — के साथ जोड़ने का यह दुर्लभ अवसर होगा।

पी. टी. उषा का बयान

IOA अध्यक्ष पी. टी. उषा ने कहा, 'हम 2036 में ओलंपिक और पैरालंपिक गेम्स के लिए भारत के विजन और उम्मीदों को आईओसी से मिली पहचान से बहुत सम्मानित महसूस कर रहे हैं और गेम्स के आने वाले एडिशन के लिए संभावित होस्ट के एक खास ग्रुप का हिस्सा होने पर गर्व महसूस कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि 'एक साथ आगे बढ़ना' महज एक नारा नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा, लक्ष्य और विविधता को एकजुट करने की मजबूत प्रतिबद्धता है।

उषा ने आगे कहा, 'जैसे-जैसे हम 2036 के लिए अपना विजन विकसित कर रहे हैं, हम ऐसे गेम्स बनाना चाहते हैं जो एक युवा, डायनैमिक और उभरते भारत के आत्मविश्वास को दिखाएँ। जब भारत आगे बढ़ता है, तो हम चाहते हैं कि दुनिया हमारे साथ आगे बढ़े।'

केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इस अवसर पर कहा कि भारत का 2036 का लक्ष्य खेल को बड़े सामाजिक विकास के एक माध्यम के रूप में स्थापित करने की व्यापक सोच से जुड़ा है।

उन्होंने कहा, 'खेलों को भारत में लाकर, हम खेलों में ऐसे बदलाव को तेज कर सकते हैं जो हमारे समाज के हर हिस्से तक पहुंचे। ऐसा करके, दुनिया के सबसे गतिशील देशों में से एक में ओलंपिक आंदोलन के लिए एक मजबूत नया अध्याय शुरू कर सकते हैं।' उनके अनुसार, मेजबानी से लाखों युवा भारतीयों को खेलों में भाग लेने की प्रेरणा मिलेगी और शिक्षा व रोजगार में नए अवसर उत्पन्न होंगे।

अगला अहम पड़ाव

भारत के प्रस्ताव की अगली महत्त्वपूर्ण परीक्षा अक्टूबर 2026 के अंत में होगी, जब देश पहली बार IOC के फ्यूचर होस्ट कमीशन के सामने अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करेगा। यह प्रस्तुति भारत की आधिकारिक दावेदारी की दिशा में निर्णायक कदम मानी जा रही है।

गौरतलब है कि अहमदाबाद के अलावा, कई अन्य देश और शहर भी 2036 गेम्स की मेजबानी की दौड़ में हैं। ऐसे में IOC से मिली यह प्रारंभिक पहचान भारत की बोली को वैश्विक मंच पर मजबूती से आगे ले जाने का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह प्रक्रिया की शुरुआत भर है — अंत नहीं। असली सवाल यह है कि क्या भारत बुनियादी ढाँचे, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स की विश्वस्तरीय तैयारी का ठोस खाका IOC के सामने रख पाएगा, जो अब तक सार्वजनिक रूप से अस्पष्ट है। 'Rising Together' जैसे प्रेरणादायक नारे मेजबानी जीतने के लिए पर्याप्त नहीं होते — 2032 ब्रिसबेन और 2028 लॉस एंजेलेस की बोलियाँ इसीलिए सफल हुईं क्योंकि उनके पास तैयार स्टेडियम और परिवहन योजनाएँ थीं। भारत के पास सपना है, लेकिन अक्टूबर की प्रस्तुति बताएगी कि सपने के पीछे कितनी ठोस तैयारी है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की 2036 ओलंपिक बोली क्या है और यह किस शहर पर केंद्रित है?
भारत 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक गेम्स की मेजबानी के लिए दावेदारी कर रहा है, जिसका केंद्र गुजरात का अहमदाबाद है। इस बोली का थीम 'एक साथ उठना' है और इसे IOC के साथ सक्रिय सलाह-मशविरे से तैयार किया जा रहा है।
IOC ने भारत की बोली को किस रूप में पहचाना है?
IOC ने अपनी घोषणा में भारत को भविष्य के होस्ट चुनने की प्रक्रिया में शामिल 'संभावित होस्ट' के विशेष समूह में स्थान दिया है। यह औपचारिक पहचान भारत की बोली के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम है, हालाँकि अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।
भारत की 2036 ओलंपिक बोली का अगला बड़ा पड़ाव क्या है?
भारत अक्टूबर 2026 के अंत में IOC के फ्यूचर होस्ट कमीशन के सामने पहली बार अपना विजन और लक्ष्य प्रस्तुत करेगा। यह प्रस्तुति आधिकारिक दावेदारी की दिशा में निर्णायक मानी जा रही है।
पी. टी. उषा ने इस पहचान पर क्या कहा?
IOA अध्यक्ष पी. टी. उषा ने कहा कि उन्हें IOC से मिली इस पहचान पर गहरा सम्मान और गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने 'Rising Together' थीम को भारत की ऊर्जा, विविधता और एकजुटता की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
2036 ओलंपिक की मेजबानी से भारत को क्या फायदा होगा?
IOA के अनुसार, मेजबानी से युवाओं में खेल भागीदारी बढ़ेगी, स्वस्थ समुदायों का निर्माण होगा और शिक्षा व रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, एक अरब से अधिक की आबादी वाले भारत के माध्यम से ओलंपिक मूवमेंट को एक नई वैश्विक पहुँच मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 1 साल पहले