एशियन गेम्स 2026: भारत ने 85 पदकों के साथ चौथा स्थान पाया, महिला हॉकी-क्रिकेट सहित दर्जनों ऐतिहासिक उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने एशियन गेम्स 2026 का अपना अभियान आइची-नागोया, जापान में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य सहित कुल 85 पदकों के साथ पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहते हुए समाप्त किया। क्रिकेट, हॉकी, तीरंदाजी, मुक्केबाजी और एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन के बावजूद भारत हांगझोउ 2023 में बने अपने रिकॉर्ड 106 पदकों के आँकड़े को नहीं तोड़ सका। फिर भी, 85 पदकों का यह प्रदर्शन एशियन गेम्स इतिहास में भारत का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
पदक तालिका और समग्र प्रदर्शन
महाद्वीपीय बहु-खेल प्रतियोगिता के 20वें संस्करण में करीब 500 भारतीय खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। तुलनात्मक रूप से, हांगझोउ 2023 में करीब 650 खिलाड़ियों के बड़े दल ने 28 स्वर्ण, 38 रजत और 40 कांस्य सहित रिकॉर्ड 106 पदक जीते थे। इस बार छोटे दल के साथ 85 पदक अर्जित करना भारतीय खेलों की परिपक्वता को दर्शाता है।
पदक-संख्या के लिहाज से एथलेटिक्स सबसे आगे रहा, जिसमें भारत ने कुल 24 पदक जीते। निशानेबाजी में 15 पदक मिले, जिनमें 3 स्वर्ण शामिल हैं। स्वर्ण पदकों के मामले में तीरंदाजी शीर्ष पर रही, जहाँ भारत ने 5 स्वर्ण जीते। मुक्केबाजी में भी 3 स्वर्ण पदक आए।
ऐतिहासिक उपलब्धियाँ और नए रिकॉर्ड
इन खेलों में कई भारतीय खिलाड़ियों ने इतिहास रचा। मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने स्वर्ण पदक जीतकर 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बनने का गौरव हासिल किया।
तीरंदाजी में 17 वर्षीया कुमकुम महोद ने एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रिकर्व स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने का इतिहास रचा। उन्होंने अंकिता भक्त और कीर्ति शर्मा के साथ महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण जीता — यह एशियन गेम्स में भारतीय महिलाओं का टीम रिकर्व वर्ग का पहला स्वर्ण था।
गोल्फर प्रणवी शरत उर्स एशियन गेम्स में गोल्फ का स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, और नीरज चौहान ने कांस्य जीतकर ऑल-इंडियन पोडियम पूरा किया। निशानेबाज नीरू धांडा ने महिला ट्रैप स्पर्धा में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता, जबकि कुमकुम और सुरूची सिंह ने मिश्रित टीम 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण जीतकर एशियाई रिकॉर्ड की बराबरी की।
एथलेटिक्स में विथ्या रामराज ने महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ में 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ते हुए कांस्य पदक जीता। सावन बरवाल ने मैराथन में 1982 के बाद भारत को पहला पदक दिलाया और राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया। सरवेश कुशारे ने पुरुषों की हाई जंप में भारत के 56 साल के पदक सूखे को समाप्त किया। बरानिका एलंगोवन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय पोल वॉल्टर बनीं। उल्लेखनीय है कि नीरज चोपड़ा चोट के कारण इन खेलों में भाग नहीं ले सके।
भारोत्तोलन में मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता — यह एशियन गेम्स में उनका पहला पदक था और 1998 बैंकॉक एशियन गेम्स के बाद भारत का इस खेल में पहला पदक। स्क्वैश में अनाहत सिंह एशियन गेम्स एकल वर्ग में रजत जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
अन्य ऐतिहासिक प्रथमों में सुचिका तारियाल ने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में और जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में भारत को एशियन गेम्स का पहला पदक दिलाया। सीमा कुमारी ने महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में 16 साल के पदक सूखे को समाप्त किया। रोशिबिना देवी ने वुशु में लगातार तीसरा महाद्वीपीय पदक जीता।
टीम खेलों में सफलता
टीम स्पर्धाओं में भारत का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को 19 रन से हराकर खिताब का बचाव किया, जबकि महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को हराकर स्वर्ण पदक जीता। पुरुष और महिला कबड्डी टीमों ने भी स्वर्ण पदक हासिल किए।
सबसे भावनात्मक क्षण भारतीय महिला हॉकी टीम की जीत रही, जिसने 44 साल का इंतजार खत्म करते हुए एशियन गेम्स का खिताब अपने नाम किया। कुश्ती में अमन सहरावत ने स्वर्ण, अंतिम पंघाल ने रजत और दीपक पूनिया ने कांस्य पदक जीता। भाला फेंक में यशवीर सिंह ने रजत और रोहित यादव ने कांस्य पदक जीता।
ओलंपिक कोटा और आगे की राह
आइची-नागोया में भारत ने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए तीरंदाजी और हॉकी में महत्वपूर्ण कोटा भी हासिल किया। इन खेलों में सात खेलों — तीरंदाजी, हॉकी, नौकायन, स्क्वैश, सर्फिंग, टेनिस और ट्रायथलॉन — में ओलंपिक कोटा दाँव पर थे। भारत ने पुरुष और महिला हॉकी, मिश्रित टीम कंपाउंड तीरंदाजी और महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धाओं में कोटा जीतकर अपने एशियन गेम्स अभियान को ओलंपिक की तैयारी से भी जोड़ दिया।
गौरतलब है कि भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन शुक्रवार को रहा जब उसने 6 स्वर्ण सहित कुल 12 पदक जीते। इस प्रकार, भले ही हांगझोउ के रिकॉर्ड आँकड़े को नहीं तोड़ा जा सका, आइची-नागोया 2026 भारतीय खेलों के इतिहास में ऐतिहासिक 'प्रथम' और राष्ट्रीय रिकॉर्डों के लिहाज से एक असाधारण अध्याय साबित हुआ।