वर्ल्ड स्क्वैश चैंपियनशिप: अभय सिंह की अगुवाई में भारतीय चौकड़ी मिस्र में 8-16 मई को मैदान में
सारांश
मुख्य बातें
भारत का चार सदस्यों वाला पुरुष दल 8 से 16 मई तक मिस्र के गीजा में आयोजित होने वाली वर्ल्ड स्क्वैश चैंपियनशिप में अपनी दावेदारी साबित करने के लिए तैयार है। प्रोफेशनल स्क्वैश एसोसिएशन (PSA) द्वारा संचालित इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अभय सिंह भारतीय चुनौती की अगुवाई करेंगे, जबकि वीर चोटरानी, रमित टंडन और वेलावन सेंथिलकुमार उनके साथ देश की सेवा करेंगे। यह चैंपियनशिप पाम हिल्स क्लब और पीजीसी गोल्फ सेंट्रल मॉल में आयोजित होगी, जहाँ दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी भाग लेंगे।
भारतीय खिलाड़ियों के सामने चुनौतियाँ
भारत के शीर्ष खिलाड़ी अभय सिंह (विश्व रैंकिंग में 22वें स्थान पर) को पहले ही राउंड में अपने ही देश के सहयोगी वीर चोटरानी का सामना करना होगा — एक ऐसी स्थिति जो दोनों के लिए समान रूप से चुनौतीपूर्ण है। यदि अभय आगे बढ़ते हैं, तो उन्हें दूसरे राउंड में डिफेंडिंग चैंपियन मुस्तफा असल (वर्तमान नंबर एक पुरुष खिलाड़ी) या जर्मनी के राफेल कंदरा जैसे दिग्गजों का सामना करना पड़ सकता है।
वेलावन सेंथिलकुमार को भी कठिन प्रारंभिक चुनौती मिली है — वह फ्रांस के विक्टर क्रूइन (विश्व रैंकिंग में 5वें, छठे सीड) के विरुद्ध खेलेंगे। इसी बीच, रमित टंडन (विश्व रैंकिंग में 40वें) अपना अभियान मिस्र के करीम एल टॉर्की के खिलाफ शुरू करेंगे, जो उनसे उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वी हैं।
पिछले वर्ष की विफलता से सीख
भारत को पिछली चैंपियनशिप में निराशाजनक परिणाम का सामना करना पड़ा था। शिकागो में आयोजित पिछले संस्करण में भारतीय दल दूसरे राउंड में ही बाहर हो गया था। अभय सिंह, वीर चोटरानी और रमित टंडन सभी कड़े मुकाबलों में हार गए, जबकि वेलावन सेंथिलकुमार को पेरू के डिएगो एलियास ने पहले ही राउंड में बाहर कर दिया। यह बार भारतीय दल बेहतर प्रदर्शन की आशा लगाए हुए है।
महिला दल की अनुपस्थिति
इस बार की प्रतियोगिता में भारत की होनहार युवा महिला खिलाड़ी अनाहत सिंह भाग नहीं ले रहीं, जो भारतीय महिला स्क्वैश का एक बड़ा नुकसान है। गौरतलब है कि भारत अभी तक वर्ल्ड स्क्वैश चैंपियनशिप की सिंगल्स कैटेगरी में अपना पहला मेडल हासिल नहीं कर पाया है।
ओलंपिक डेब्यू से पहले मेडल की खोज
भारत के लिए यह चैंपियनशिप विशेष महत्व रखती है, क्योंकि स्क्वैश 2028 लॉस एंजिल्स समर ओलंपिक में अपनी शुरुआत करने वाला है। ओलंपिक से पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप में सफलता हासिल करना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बन गया है। देश की इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप में पहली बार एकल श्रेणी में पदक जीतने की आशा है।